आरबीआई ने बैंकों के लिए निवेश उतार-चढ़ाव रिजर्व की अनिवार्यता हटाई

आरबीआई ने बैंकों के लिए निवेश उतार-चढ़ाव रिजर्व की अनिवार्यता हटाई

भारतीय रिजर्व बैंक ने 8 अप्रैल 2026 को वाणिज्यिक बैंकों के लिए निवेश उतार-चढ़ाव रिजर्व की अनिवार्यता समाप्त कर दी। यह बदलाव रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (कमर्शियल बैंक्स – क्लासिफिकेशन, वैल्यूएशन एंड ऑपरेशन ऑफ इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो) द्वितीय संशोधन निर्देश, 2026 के तहत लागू किया गया। आरबीआई का यह निर्णय 18 मई 2026 से प्रभावी हो गया।

क्या होता है निवेश उतार-चढ़ाव रिजर्व

निवेश उतार-चढ़ाव रिजर्व यानी इन्वेस्टमेंट फ्लक्चुएशन रिजर्व एक अतिरिक्त सुरक्षा निधि थी, जिसे बैंक अपने निवेश पोर्टफोलियो के मूल्य में गिरावट से होने वाले संभावित नुकसान के लिए बनाए रखते थे। सरकारी प्रतिभूतियों और अन्य निवेश साधनों के बाजार मूल्य में बदलाव से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए इस रिजर्व का उपयोग किया जाता था। इसका उद्देश्य बैंकों को बाजार जोखिम से अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करना था।

आरबीआई ने क्यों हटाई यह व्यवस्था

आरबीआई के अनुसार अब बाजार जोखिम के लिए पूंजी प्रावधान और निवेश पोर्टफोलियो के वर्गीकरण तथा मूल्यांकन से जुड़े संशोधित नियम पहले से ही पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करते हैं। इसलिए अलग से निवेश उतार-चढ़ाव रिजर्व बनाए रखने की आवश्यकता नहीं रह गई है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि वर्तमान बैंकिंग नियामकीय ढांचा बाजार जोखिमों को संभालने के लिए पर्याप्त मजबूत हो चुका है।

टियर-1 पूंजी में शामिल होगा रिजर्व

17 मई 2026 तक निवेश उतार-चढ़ाव रिजर्व में मौजूद राशि को अब टियर-1 पूंजी के रूप में माना जाएगा। बैंकों को यह राशि स्टैच्यूटरी रिजर्व, जनरल रिजर्व या लाभ-हानि खाते में स्थानांतरित करनी होगी। टियर-1 पूंजी बैंक की वित्तीय मजबूती का प्रमुख संकेतक होती है और यह बासेल पूंजी मानकों के तहत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

एनपीए प्रावधान से जुड़ी शर्तों में राहत

आरबीआई ने पूंजी पर्याप्तता अनुपात यानी सीआरएआर की गणना में तिमाही लाभ को शामिल करने के लिए गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों के प्रावधान संबंधी शर्त हटाने का भी प्रस्ताव दिया है। इससे बैंकों को पूंजी प्रबंधन में अधिक लचीलापन मिल सकता है।

विभिन्न बैंक श्रेणियों पर प्रभाव

आरबीआई ने सहकारी बैंकों, स्मॉल फाइनेंस बैंकों और पेमेंट बैंकों के लिए भी अलग-अलग परिपत्र जारी किए हैं। इनका उद्देश्य संचालन संबंधी समस्याओं का समाधान करना और विभिन्न बैंक श्रेणियों के बीच नियमों में समानता लाना है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना 1935 में हुई थी।
  • टियर-1 पूंजी बैंक की मुख्य वित्तीय शक्ति का मापदंड मानी जाती है।
  • सीआरएआर बैंक की सॉल्वेंसी मापने वाला महत्वपूर्ण संकेतक है।
  • स्टैच्यूटरी रिजर्व और जनरल रिजर्व बैंक की पूंजी संरचना का हिस्सा होते हैं।

आरबीआई का यह कदम बैंकिंग क्षेत्र में पूंजी प्रबंधन को अधिक सरल और लचीला बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे बैंकों की वित्तीय दक्षता और नियामकीय अनुपालन प्रक्रिया में सुधार आने की संभावना है।

Originally written on May 19, 2026 and last modified on May 19, 2026.

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