आरबीआई ने रेपो दर 5.25% पर बरकरार रखी, महंगाई और विकास पर संतुलित नजर

आरबीआई ने रेपो दर 5.25% पर बरकरार रखी, महंगाई और विकास पर संतुलित नजर

भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की 3 अगस्त से 5 अगस्त 2026 तक चली द्विमासिक बैठक के बाद गवर्नर संजय मल्होत्रा ने घोषणा की कि रेपो दर को 5.25% पर ही बरकरार रखा जाएगा। यह लगातार चौथी बैठक है जिसमें रेपो दर में कोई बदलाव नहीं किया गया है। आरबीआई का यह निर्णय बढ़ती महंगाई और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखने की रणनीति को दर्शाता है।

मौद्रिक नीति समिति की भूमिका

मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के तहत गठित छह सदस्यीय वैधानिक निकाय है। इसका प्रमुख कार्य नीति रेपो दर तय करना है, जिसके आधार पर आरबीआई वाणिज्यिक बैंकों को सरकारी प्रतिभूतियों के बदले अल्पकालिक ऋण उपलब्ध कराता है। समिति में तीन सदस्य आरबीआई से तथा तीन सदस्य भारत सरकार द्वारा नियुक्त किए जाते हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य मूल्य स्थिरता बनाए रखते हुए आर्थिक विकास को समर्थन देना है।

नीति दरें और मौद्रिक रुख

5 अगस्त 2026 को एमपीसी ने रेपो दर के साथ-साथ स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (एसडीएफ) दर 5% तथा मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (एमएसएफ) और बैंक दर 5.5% पर यथावत रखी। समिति ने अपनी नीति का रुख भी ‘तटस्थ’ (न्यूट्रल) बनाए रखा, जिससे भविष्य में आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार ब्याज दरों में बढ़ोतरी या कटौती दोनों की संभावना खुली रहती है।

महंगाई और विकास का आकलन

जून 2026 में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.38% पर पहुंच गई, जो आरबीआई के 4% के मध्यम अवधि के लक्ष्य से ऊपर है। हालांकि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में औसत महंगाई 3.9% रही, फिर भी केंद्रीय बैंक ने मुद्रास्फीति पर सतर्क रुख बनाए रखा। दूसरी ओर, आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर का अनुमान 6.6% पर बरकरार रखा, जिससे यह संकेत मिलता है कि घरेलू अर्थव्यवस्था में विकास की संभावनाएं अभी भी मजबूत मानी जा रही हैं।

एफसीएनआर(बी) और बाह्य वाणिज्यिक उधारी में राहत

आरबीआई ने बताया कि एफसीएनआर(बी) जमा योजना और एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग (ईसीबी) ढांचे के तहत दी गई विशेष राहतों के माध्यम से लगभग 40.82 अरब अमेरिकी डॉलर जुटाए जा चुके हैं। इन विशेष प्रावधानों की समयसीमा 30 सितंबर 2026 तक बढ़ाई गई है, जिससे विदेशी मुद्रा प्रवाह को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • भारत में लचीले मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण (फ्लेक्सिबल इन्फ्लेशन टार्गेटिंग) व्यवस्था के तहत उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई का मध्यम अवधि का लक्ष्य 4% है।
  • मौद्रिक नीति समिति में कुल छह सदस्य होते हैं, जिनमें तीन आरबीआई और तीन भारत सरकार द्वारा नियुक्त किए जाते हैं।
  • रेपो दर, आरबीआई की लिक्विडिटी एडजस्टमेंट फैसिलिटी (एलएएफ) का प्रमुख नीति उपकरण है।
  • स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (एसडीएफ) और मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (एमएसएफ) आरबीआई के तरलता प्रबंधन गलियारे (लिक्विडिटी कॉरिडोर) के महत्वपूर्ण घटक हैं।

आरबीआई का ताज़ा मौद्रिक नीति निर्णय यह दर्शाता है कि केंद्रीय बैंक फिलहाल महंगाई पर नियंत्रण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखने की नीति पर कायम है। रेपो दर को स्थिर रखते हुए आरबीआई ने संकेत दिया है कि भविष्य के निर्णय घरेलू और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, महंगाई के रुझान तथा विकास की गति को ध्यान में रखकर लिए जाएंगे।

Originally written on August 5, 2026 and last modified on August 5, 2026.

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