आईसीजीएस अक्षय: भारतीय तटरक्षक बल को मिला स्वदेशी नई पीढ़ी का तेज गश्ती पोत
भारत की समुद्री सुरक्षा को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में भारतीय तटरक्षक बल ने 27 जून 2026 को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। गोवा के वास्को स्थित गोवा शिपयार्ड लिमिटेड में नई पीढ़ी के फास्ट पेट्रोल वेसल (एफपीवी) आईसीजीएस अक्षय को औपचारिक रूप से भारतीय तटरक्षक बल में शामिल किया गया। यह 52 मीटर लंबा स्वदेशी पोत आदम्य श्रेणी का चौथा जहाज है और इसे आत्मनिर्भर भारत तथा मेक इन इंडिया पहल के तहत विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य तटीय सुरक्षा, समुद्री निगरानी और कानून प्रवर्तन अभियानों को और अधिक प्रभावी बनाना है।
आईसीजीएस अक्षय की प्रमुख विशेषताएं
आईसीजीएस अक्षय एक आधुनिक फास्ट पेट्रोल वेसल है, जिसे विशेष रूप से भारतीय तटीय क्षेत्रों में तेज गति से गश्त और सुरक्षा अभियानों के लिए डिजाइन किया गया है। इस पोत में 65 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जो देश की रक्षा विनिर्माण क्षमता को दर्शाता है। इसकी सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी विशेषता कंट्रोलेबल पिच प्रोपेलर आधारित प्रणोदन प्रणाली है। यह तकनीक पहली बार भारतीय तटरक्षक बल के किसी जहाज वर्ग में शामिल की गई है, जिससे पोत की गति, संचालन क्षमता और ईंधन दक्षता में सुधार होता है। इसे दो 3,000 किलोवाट क्षमता वाले डीजल इंजनों से संचालित किया जाता है।
तकनीकी क्षमता और हथियार प्रणाली
आईसीजीएस अक्षय का विस्थापन लगभग 320 टन है। इस पोत पर छह अधिकारी और 35 नाविक तैनात रहते हैं तथा इसका नेतृत्व कमांडेंट (जूनियर ग्रेड) दीपक चौबे कर रहे हैं। सुरक्षा और रक्षा के लिए इसमें 30 मिमी की सीआरएन-91 नौसैनिक तोप तथा दो 12.7 मिमी स्थिरीकृत रिमोट-नियंत्रित मशीनगनें लगाई गई हैं। ये हथियार समुद्री गश्त, तस्करी विरोधी अभियान तथा अन्य सुरक्षा कार्यों के दौरान प्रभावी सुरक्षा प्रदान करते हैं।
समुद्री सुरक्षा में भूमिका
आईसीजीएस अक्षय को भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) की निगरानी, मत्स्य संसाधनों की सुरक्षा, तटीय गश्त, तस्करी और समुद्री डकैती विरोधी अभियान, समुद्री कानूनों के प्रवर्तन, खोज एवं बचाव अभियान तथा समुद्री पर्यावरण संरक्षण जैसे अनेक महत्वपूर्ण कार्यों के लिए तैयार किया गया है। भारत की लगभग 7,516.6 किलोमीटर लंबी समुद्री तटरेखा और द्वीपीय क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए ऐसे आधुनिक गश्ती पोत अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। आदम्य श्रेणी के कुल आठ पोत विकसित किए जा रहे हैं, जिनसे भारतीय तटरक्षक बल की परिचालन क्षमता और मजबूत होगी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारतीय तटरक्षक बल की स्थापना वर्ष 1978 में हुई थी और यह रक्षा मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
- विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) किसी तटीय देश की आधार रेखा से 200 समुद्री मील तक फैला होता है।
- गोवा शिपयार्ड लिमिटेड वास्को (गोवा) स्थित एक प्रमुख रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है।
- सीआरएन-91 एक 30 मिमी नौसैनिक तोप है, जिसका उपयोग भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक बल के कई जहाजों पर किया जाता है।
आईसीजीएस अक्षय का भारतीय तटरक्षक बल में शामिल होना देश की समुद्री सुरक्षा और स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमता के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। अत्याधुनिक तकनीक, उच्च स्वदेशीकरण और बहुउद्देशीय परिचालन क्षमता से लैस यह पोत भारत की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा, कानून प्रवर्तन और आपदा राहत अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। साथ ही यह आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत रक्षा क्षेत्र में बढ़ती तकनीकी आत्मनिर्भरता का भी सशक्त उदाहरण है।