आईएनएस मालवन: भारतीय नौसेना को मिलेगा अत्याधुनिक स्वदेशी पनडुब्बी रोधी युद्धपोत

आईएनएस मालवन: भारतीय नौसेना को मिलेगा अत्याधुनिक स्वदेशी पनडुब्बी रोधी युद्धपोत

भारतीय नौसेना की समुद्री सुरक्षा क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में आईएनएस मालवन एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह माहे श्रेणी (Mahe-class) के पनडुब्बी रोधी उथले जल युद्धपोत (Anti-Submarine Warfare Shallow Water Craft – ASW-SWC) का दूसरा पोत है। इस जहाज का डिजाइन और निर्माण कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (सीएसएल), कोच्चि द्वारा किया गया है तथा इसे 31 मार्च 2026 को भारतीय नौसेना को सौंप दिया गया था। इसका औपचारिक कमीशनिंग समारोह 22 जुलाई 2026 को आयोजित किया जाएगा। यह पोत भारत की स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमता और आत्मनिर्भर भारत अभियान को नई मजबूती प्रदान करेगा।

माहे श्रेणी के एएसडब्ल्यू-एसडब्ल्यूसी पोत क्या हैं?

माहे श्रेणी के एएसडब्ल्यू-एसडब्ल्यूसी ऐसे विशेष युद्धपोत हैं, जिन्हें उथले तटीय क्षेत्रों में संचालन के लिए विकसित किया गया है। इनका मुख्य उद्देश्य पनडुब्बी रोधी युद्ध (Anti-Submarine Warfare), माइन युद्ध (Mine Warfare) तथा लो इंटेंसिटी मैरीटाइम ऑपरेशंस (LIMO) को अंजाम देना है। तटीय और उथले समुद्री क्षेत्रों में पनडुब्बियों का पता लगाना अपेक्षाकृत कठिन होता है, इसलिए इस श्रेणी के पोत आधुनिक सेंसर और उन्नत हथियार प्रणालियों से लैस किए गए हैं।

डिजाइन और तकनीकी विशेषताएं

आईएनएस मालवन की लंबाई लगभग 80 मीटर है तथा इसका विस्थापन (Displacement) लगभग 1,100 टन है। इस युद्धपोत में वॉटरजेट प्रणोदन प्रणाली का उपयोग किया गया है, जो उथले समुद्री क्षेत्रों में बेहतर गति और उच्च स्तर की संचालन क्षमता प्रदान करती है। इसके अलावा इसमें अत्याधुनिक सेंसर, टॉरपीडो और बहुउद्देशीय पनडुब्बी रोधी रॉकेट लगाए गए हैं, जिससे यह समुद्री सुरक्षा अभियानों में अत्यधिक प्रभावी साबित होगा।

स्वदेशी जहाज निर्माण को बढ़ावा

आईएनएस मालवन में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। यह जहाज आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत भारत में युद्धपोतों के स्वदेशी डिजाइन और निर्माण को बढ़ावा देने का उत्कृष्ट उदाहरण है। कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड, जो भारत का प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र का शिपयार्ड है, ने इस परियोजना के माध्यम से देश की रक्षा विनिर्माण क्षमता को और मजबूत किया है। इससे विदेशी निर्भरता कम होगी और घरेलू रक्षा उद्योग को नई गति मिलेगी।

नौसेना में भूमिका और कमीशनिंग

आईएनएस मालवन को भारतीय नौसेना में अभय श्रेणी के कार्वेट युद्धपोतों का स्थान लेने के लिए शामिल किया जा रहा है। अभय श्रेणी के पोत लंबे समय से तटीय और उथले जल क्षेत्रों में पनडुब्बी रोधी अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। नए पोत के शामिल होने से नौसेना की परिचालन क्षमता और आधुनिक तकनीकी दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। 22 जुलाई 2026 को आयोजित होने वाले कमीशनिंग समारोह में भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह मुख्य अतिथि होंगे, जबकि वाइस एडमिरल संजय वात्स्यायन भी इस अवसर पर उपस्थित रहेंगे।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • माहे श्रेणी के एएसडब्ल्यू-एसडब्ल्यूसी पोत उथले तटीय क्षेत्रों में पनडुब्बी रोधी अभियानों के लिए विकसित किए गए हैं।
  • वॉटरजेट प्रणोदन प्रणाली उथले जल में बेहतर संचालन क्षमता और तेज़ गतिशीलता प्रदान करती है।
  • कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (सीएसएल) भारत का प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र का जहाज निर्माण केंद्र है।
  • लो इंटेंसिटी मैरीटाइम ऑपरेशंस (LIMO) में तटीय गश्त, निगरानी और सीमित समुद्री सुरक्षा अभियान शामिल होते हैं।

आईएनएस मालवन का भारतीय नौसेना में शामिल होना देश की समुद्री सुरक्षा और स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमता के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। अत्याधुनिक तकनीक, उच्च स्वदेशीकरण और आधुनिक पनडुब्बी रोधी क्षमताओं से लैस यह युद्धपोत हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक उपस्थिति को मजबूत करेगा और भविष्य की समुद्री सुरक्षा चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने में अहम भूमिका निभाएगा।

Originally written on July 17, 2026 and last modified on July 17, 2026.

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