आईआईएससी का SraVaani मॉडल भारतीय भाषाओं की आवाज़ तकनीक को नई रफ्तार देगा

आईआईएससी का SraVaani मॉडल भारतीय भाषाओं की आवाज़ तकनीक को नई रफ्तार देगा

बेंगलुरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) ने SraVaani नाम का एक ओपन-सोर्स बहुभाषी स्पीच-रिकग्निशन मॉडल जारी किया है। यह मॉडल बोले गए शब्दों को टेक्स्ट में बदलता है और भारतीय भाषाओं व बोलियों की व्यापक डिजिटल पहुंच को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

SraVaani क्या करता है

SraVaani को SPIRE Lab ने ARTPARK के सहयोग से और Google के समर्थन के साथ विकसित किया है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह 65 भारतीय भाषाओं और बोलियों में आवाज़ को लिखित रूप में बदल सकता है। इनमें 20 अनुसूचित भारतीय भाषाएँ और 45 क्षेत्रीय भाषाएँ शामिल हैं, जैसे गारो, अंगिका, चकमा, कोकबोरोक, तुलु, बुंदेली और बज्जिका।

मॉडल 10 लिपियों को सपोर्ट करता है और इसमें ऑटोमैटिक लैंग्वेज आइडेंटिफिकेशन की सुविधा भी है। इससे उपयोगकर्ता को पहले भाषा चुनने की जरूरत नहीं पड़ती और सिस्टम खुद भाषा पहचानकर स्पीच रिकग्निशन शुरू कर देता है।

ओपन-सोर्स मॉडल की अहमियत

इस मॉडल को Hugging Face प्लेटफॉर्म पर MIT लाइसेंस के तहत सार्वजनिक किया गया है। MIT लाइसेंस के तहत सॉफ्टवेयर का मुफ्त उपयोग, संशोधन और पुनर्वितरण किया जा सकता है, इसलिए शोधकर्ता, डेवलपर और संस्थान इसे अपनी जरूरत के अनुसार आगे विकसित कर सकते हैं।

ओपन-सोर्स स्पीच-रिकग्निशन मॉडल मशीन लर्निंग, नैचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग और सहायक तकनीकों में उपयोगी होते हैं। भारतीय भाषाओं के लिए ऐसे मॉडल खास तौर पर महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि कई क्षेत्रीय भाषाओं में डिजिटल डेटा और तकनीकी संसाधन सीमित हैं।

Project Vaani और प्रदर्शन के नतीजे

SraVaani को Project Vaani के डेटा पर प्रशिक्षित किया गया है। इस परियोजना ने 28 भारतीय राज्यों के 165 जिलों में 1,56,000 लोगों से 31,000 घंटे से अधिक की प्राकृतिक बातचीत की आवाज़ रिकॉर्ड की है। यह भारतीय भाषाओं और बोलियों के लिए बड़े पैमाने पर तैयार किया गया एक महत्वपूर्ण स्पीच-डेटा प्रयास है।

मॉडल के साथ जारी प्रदर्शन आंकड़ों के अनुसार, गारो भाषा में SraVaani की वर्ड एरर रेट 9.5% रही, जबकि उसी भाषा पर परीक्षण किए गए अगले सर्वश्रेष्ठ सिस्टम की वर्ड एरर रेट 69.4% दर्ज की गई। यह अंतर बताता है कि कम संसाधन वाली भाषाओं के लिए स्थानीय डेटा आधारित मॉडल कितने प्रभावी हो सकते हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • आईआईएससी का पूरा नाम Indian Institute of Science है और यह बेंगलुरु, कर्नाटक में स्थित है।
  • स्पीच रिकग्निशन कृत्रिम बुद्धिमत्ता की वह शाखा है, जो बोले गए शब्दों को मशीन-पठनीय टेक्स्ट में बदलती है।
  • अनुसूचित भाषाएँ भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में सूचीबद्ध हैं।
  • Hugging Face एआई मॉडल और डेटासेट साझा करने का प्रमुख प्लेटफॉर्म है।

भारतीय भाषाओं के लिए ऐसे मॉडल डिजिटल समावेशन को बढ़ाते हैं और आवाज़ आधारित तकनीकों को अधिक सुलभ बनाते हैं। SraVaani का सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होना शोध और अनुप्रयोग, दोनों स्तरों पर इसकी उपयोगिता को और बढ़ा सकता है।

Originally written on August 13, 2026 and last modified on August 13, 2026.

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