अरुणाचल में भारत-चीन सैन्य वार्ता से सीमा तनाव घटाने की कोशिश
भारत और चीन के बीच अरुणाचल प्रदेश में हुई पहली कोर कमांडर स्तर की बैठक ने पूर्वी लद्दाख से आगे पूर्वी सेक्टर में भी सीमा प्रबंधन को लेकर संवाद की नई शुरुआत दिखाई है। 6 सितंबर 2026 को अनजॉ जिले के किबिथू सेक्टर में स्थित वाचा-दामाई बॉर्डर पर्सनल मीटिंग (BPM) प्वाइंट पर हुई इस बातचीत में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के आसपास तनाव कम करने और स्थानीय स्तर पर टकराव रोकने के उपायों पर चर्चा हुई।
क्यों अहम है यह बैठक
यह बैठक इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि अब तक कोर कमांडर स्तर की चर्चाएं मुख्य रूप से पूर्वी लद्दाख के चुशुल-मोल्डो बॉर्डर मीटिंग प्वाइंट पर होती रही थीं। अरुणाचल प्रदेश में पहली बार इस स्तर की वार्ता होना यह संकेत देता है कि सीमा प्रबंधन को केवल एक सेक्टर तक सीमित नहीं रखा जा रहा, बल्कि पूर्वी हिमालयी क्षेत्र में भी संवाद को मजबूत करने की कोशिश हो रही है।
वाचा-दामाई BPM प्वाइंट 2014 से सक्रिय है और भारत-चीन सीमा पर सैन्य संपर्क के लिए निर्धारित स्थानों में शामिल है। ऐसे प्वाइंटों का उपयोग फ्लैग मीटिंग, स्थानीय संवाद और किसी भी उभरते विवाद को शुरुआती स्तर पर संभालने के लिए किया जाता है।
कोर कमांडर स्तर की बातचीत का मतलब
कोर कमांडर स्तर की वार्ता दोनों सेनाओं के वरिष्ठ फील्ड कमांडरों के बीच होती है। भारतीय सेना में एक कोर एक बड़ी परिचालन इकाई होती है, जिसके तहत कई डिवीजन और सहायक इकाइयां काम करती हैं। इसलिए इस स्तर की बैठकें केवल औपचारिक संवाद नहीं होतीं, बल्कि सीमा पर तैनाती, गश्त, संचार और स्थानीय तनाव को नियंत्रित करने के व्यावहारिक उपायों पर केंद्रित होती हैं।
ऐसी बैठकों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि किसी भी स्थानीय घटना को बड़े सैन्य टकराव में बदलने से पहले बातचीत के जरिए संभाला जा सके।
पूर्वी सेक्टर में हालिया तनाव और कूटनीतिक पृष्ठभूमि
यह सैन्य संवाद अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले के ताक्सिंग क्षेत्र में कथित सैनिक जमावड़े और स्थानीय तनाव की रिपोर्टों के बाद हुआ। इससे पहले 25 अगस्त 2026 को बीजिंग में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच सीमा प्रबंधन प्रोटोकॉल पर बातचीत हुई थी।
अरुणाचल प्रदेश भारत, भूटान और म्यांमार की सीमाओं से जुड़ा राज्य है और चीन के साथ इसकी लंबी सीमा पूर्वी हिमालय में स्थित है। इसी वजह से यहां होने वाली हर सैन्य या कूटनीतिक पहल को रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) भारत-चीन के बीच de facto सीमा है, लेकिन यह औपचारिक रूप से सीमांकित अंतरराष्ट्रीय सीमा नहीं है।
- अरुणाचल प्रदेश की सीमा चीन, भूटान और म्यांमार से लगती है।
- भारतीय सेना की 3 कोर को Spear Corps भी कहा जाता है और इसका मुख्यालय रंगापहार में है।
- बॉर्डर पर्सनल मीटिंग प्वाइंट भारत-चीन सीमा पर फ्लैग मीटिंग और सैन्य संचार के लिए उपयोग किए जाते हैं।
यह बैठक ऐसे समय हुई है जब नई दिल्ली में 12 से 13 सितंबर 2026 के बीच प्रस्तावित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले क्षेत्रीय कूटनीति पर भी नजरें टिकी थीं। फिलहाल किसी संयुक्त प्रेस बयान की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन बातचीत का फोकस स्थानीय सीमा तनाव घटाने और संचार को बेहतर बनाने पर रहा।