गूगल के नए एआई मॉडल से कृषि निगरानी और डिजिटल खेती को बढ़ावा

गूगल के नए एआई मॉडल से कृषि निगरानी और डिजिटल खेती को बढ़ावा

गूगल ने कृषि क्षेत्र के लिए भारत-केंद्रित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल पेश किए हैं, जिनका उद्देश्य खेत-स्तर पर अधिक सटीक और उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराना है। Google DeepMind की AnthroKrishi टीम द्वारा विकसित ये मॉडल कृषि मानचित्रण, फसल निगरानी, भूमि विश्लेषण और डिजिटल कृषि सेवाओं में नई क्षमता जोड़ते हैं।

क्या हैं ALU और AMED मॉडल

इनमें पहला मॉडल Agricultural Landscape Understanding (ALU) है, जो स्थानिक और कृषि-सम्बंधित डेटा को प्रोसेस करके खेतों के पैटर्न पहचानता है। इसका उपयोग खेत-स्तरीय मैपिंग, भूमि विश्लेषण और डिजिटल कृषि अनुप्रयोगों में किया जा सकता है। यह मॉडल API के जरिए सूक्ष्म स्तर का डेटा उपलब्ध कराता है, जिससे अलग-अलग सॉफ्टवेयर और प्लेटफॉर्म इसे सीधे इस्तेमाल कर सकते हैं।

दूसरा मॉडल Agricultural Monitoring and Event Detection (AMED) है, जो कृषि क्षेत्र में होने वाले बदलावों और घटना-आधारित संकेतों पर नजर रखता है। ALU के साथ मिलकर यह फसल की स्थिति, भूमि उपयोग में बदलाव और कृषि घटनाओं की बड़े पैमाने पर निगरानी में मदद करता है।

Google Earth और साझेदारों के साथ उपयोग

गूगल ने ALU और AMED से तैयार डेटा को Google Earth में एक विजुअल डेटा लेयर के रूप में जोड़ा है। इससे उपग्रह-आधारित दृश्य के साथ कृषि संबंधी जानकारी को समझना आसान हो जाता है। कंपनी ने इन मॉडलों का परीक्षण एशिया-प्रशांत क्षेत्र के साझेदारों के साथ करने के बाद इन्हें केन्या, युगांडा, घाना, रवांडा, नाइजीरिया और जाम्बिया तक भी विस्तार दिया है।

इन मॉडलों का व्यावहारिक उपयोग पहले से दिखने लगा है। CarbonFarm ने ALU API और Gemini की मदद से कम-कार्बन धान खेती पर काम किया है, जिसका लक्ष्य 2030 तक 20 लाख हेक्टेयर क्षेत्र तक पहुंचना है। IIT बॉम्बे से इनक्यूबेटेड स्टार्टअप TerraStack ने इन APIs का उपयोग 14 करोड़ हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि के मानचित्रण में किया है। कर्नाटक के जल संसाधन विभाग ने 26 लाख हेक्टेयर सिंचित भूमि के जल प्रबंधन में इस डेटा का इस्तेमाल किया है, जबकि तेलंगाना के Agricultural Data Exchange (ADeX) ने डिजिटल कृषि सेवाओं के लिए इन मॉडलों को अपनाया है।

कृषि तकनीक में इसका महत्व

ALU और AMED जैसे मॉडल सटीक कृषि, भूमि रिकॉर्ड के आधुनिकीकरण, सिंचाई योजना और फसल निगरानी के लिए उपयोगी माने जा रहे हैं। ये सिस्टम जियोस्पेशियल डेटा, रिमोट सेंसिंग इनपुट और ऑटोमेटेड इवेंट डिटेक्शन के जरिए निर्णय लेने में मदद करते हैं। भारत जैसे बड़े और विविध कृषि ढांचे वाले देश में ऐसी तकनीकें संसाधन प्रबंधन और खेत-स्तरीय योजना को अधिक प्रभावी बना सकती हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • Google DeepMind गूगल की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रिसर्च इकाई है।
  • Google Earth एक जियोस्पेशियल प्लेटफॉर्म है, जिसमें मैप और सैटेलाइट-आधारित लेयर देखी जा सकती हैं।
  • API यानी Application Programming Interface, अलग-अलग सॉफ्टवेयर सिस्टम को डेटा साझा करने में मदद करता है।
  • Gemini गूगल का जनरेटिव एआई मॉडल परिवार है।

कुल मिलाकर, गूगल के ये नए कृषि एआई मॉडल खेती को डेटा-आधारित, तेज और अधिक सटीक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। इनके जरिए भूमि, फसल और जल प्रबंधन से जुड़ी योजनाओं को बेहतर तकनीकी आधार मिल सकता है।

Originally written on September 7, 2026 and last modified on September 7, 2026.

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