अमेरिका की ट्रांसशिपमेंट जांच में भारत का नाम, व्यापारिक दबाव बढ़ा
अमेरिका ने चीन से जुड़े सामानों के तीसरे देशों के जरिए अपने बाजार में पहुंचने की जांच के दायरे में भारत का नाम भी शामिल किया है। व्हाइट हाउस के व्यापार और औद्योगिक नीति कार्यालय की रिपोर्ट ‘द ग्रेट ट्रांसशिपमेंट स्कैम’ में भारत को टियर-1 श्रेणी में रखा गया है, जिसे रिपोर्ट में “डाइवर्सिफाइड स्केल लीडर्स” कहा गया है। यह कदम ऐसे समय आया है जब वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं, टैरिफ और नियमों के उल्लंघन को लेकर अमेरिका की निगरानी और कड़ी हो रही है।
ट्रांसशिपमेंट क्या है और विवाद क्यों बढ़ा
ट्रांसशिपमेंट का अर्थ है किसी वस्तु का अंतिम निर्यात से पहले एक मध्यवर्ती देश से होकर गुजरना। व्यापार नीति में यह व्यवस्था कई बार वैध लॉजिस्टिक्स का हिस्सा होती है, लेकिन जब इसका उपयोग कस्टम ड्यूटी, नियमों के मूल देश संबंधी प्रावधानों या आयात प्रतिबंधों से बचने के लिए किया जाए, तो इसे टैरिफ-चोरी या नियमों के उल्लंघन के रूप में देखा जाता है। अमेरिकी रिपोर्ट का दावा है कि चीनी निर्यातकों ने उच्च आयात शुल्क से बचने के लिए तीसरे देशों का उपयोग किया।
भारत सहित कई देशों को एक ही श्रेणी में रखा गया
रिपोर्ट में भारत के साथ कनाडा, यूरोपीय संघ, इजराइल, जापान, मैक्सिको, दक्षिण कोरिया और ताइवान को भी टियर-1 में रखा गया है। अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, समीक्षा के दायरे में 40 से अधिक देश आए हैं। हालांकि यह वर्गीकरण सीधे किसी एक देश पर आरोप नहीं है, बल्कि उन व्यापार प्रवाहों की पहचान से जुड़ा है जिनके जरिए चीनी वस्तुएं अमेरिकी शुल्क बाधाओं से बच सकती हैं।
औद्योगिक गलियारे और एआई आधारित निगरानी
रिपोर्ट में पुणे-गुजरात-चेन्नई औद्योगिक उत्पादन बेल्ट का उल्लेख एक संभावित मार्ग के रूप में किया गया है, जहां से चीन से जुड़े पंप और कंप्रेसर अमेरिकी बाजार तक पहुंच सकते हैं। यह बेल्ट भारत के पश्चिमी और दक्षिणी हिस्सों के प्रमुख विनिर्माण केंद्रों को जोड़ती है। साथ ही, अमेरिकी प्रशासन ने ऐसे शिपमेंट की पहचान, ट्रैकिंग और दंडात्मक कार्रवाई के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित प्रणालियों के उपयोग की बात कही है। कस्टम्स प्रवर्तन में एआई का उपयोग पैटर्न पहचान, जोखिम आकलन और माल की ट्रेसिंग के लिए किया जाता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ट्रांसशिपमेंट वह प्रक्रिया है जिसमें माल को अंतिम गंतव्य से पहले किसी मध्यवर्ती देश से भेजा जाता है।
- रूल्स ऑफ ओरिजिन यह तय करते हैं कि कोई उत्पाद किस देश में निर्मित माना जाएगा।
- व्हाइट हाउस का Office of Trade and Manufacturing Policy अमेरिकी व्यापार और औद्योगिक रणनीति से जुड़ा नीति कार्यालय है।
- कस्टम्स प्रवर्तन में एआई का उपयोग अब जोखिम-आधारित जांच और शिपमेंट ट्रैकिंग के लिए बढ़ रहा है।
यह मामला भारत-अमेरिका व्यापार वार्ताओं के बीच सामने आया है, इसलिए इसका असर द्विपक्षीय व्यापार माहौल पर भी पड़ सकता है। आने वाले समय में निगरानी, दस्तावेजी जांच और नियमों के पालन को लेकर अमेरिकी रुख और सख्त हो सकता है।