अमरावती क्वांटम वैली ने हासिल की 4 केल्विन क्रायोजेनिक कूलिंग

अमरावती क्वांटम वैली ने हासिल की 4 केल्विन क्रायोजेनिक कूलिंग

भारत के क्वांटम प्रौद्योगिकी क्षेत्र को 19 जून 2026 को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मिली, जब अमरावती क्वांटम वैली (AQV) ने स्वदेशी डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर की सहायता से 4 केल्विन अर्थात् -269 डिग्री सेल्सियस तापमान प्राप्त करने में सफलता हासिल की। यह उपलब्धि अमरावती स्थित मेधा टावर्स के क्वांटम रेफरेंस फैसिलिटी में दर्ज की गई। इसे भारत के उभरते हुए क्वांटम हार्डवेयर और क्रायोजेनिक तकनीक विकास के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो देश की आत्मनिर्भर तकनीकी क्षमता को मजबूत करता है।

4 केल्विन तापमान का महत्व

4 केल्विन अत्यंत निम्न तापमान है, जो परम शून्य (Absolute Zero) के काफी निकट होता है। वैज्ञानिक अनुसंधान में इस तापमान का उपयोग सुपरकंडक्टिंग उपकरणों, क्वांटम सेंसरों, क्रायोजेनिक इलेक्ट्रॉनिक्स, सिंगल-फोटॉन डिटेक्टरों तथा अन्य उन्नत क्वांटम हार्डवेयर के परीक्षण और मूल्यांकन के लिए किया जाता है। क्वांटम कंप्यूटिंग और संबंधित तकनीकों में अत्यधिक निम्न तापमान की आवश्यकता होती है, क्योंकि ऐसे वातावरण में पदार्थों के विद्युत गुणों में विशेष परिवर्तन होते हैं। सुपरकंडक्टिंग पदार्थों में विद्युत प्रतिरोध लगभग समाप्त हो जाता है, जिससे क्वांटम प्रणालियां अधिक स्थिर और प्रभावी ढंग से कार्य कर पाती हैं।

डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर की भूमिका

इस उपलब्धि के पीछे डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर की महत्वपूर्ण भूमिका रही। यह एक विशेष क्रायोजेनिक प्रणाली है, जो हीलियम-3 और हीलियम-4 के मिश्रण का उपयोग करके अत्यंत निम्न तापमान उत्पन्न करती है। उन्नत अनुसंधान प्रयोगशालाओं में इसी तकनीक की सहायता से तापमान को 1 केल्विन से भी नीचे और कई बार मिलीकेल्विन स्तर तक पहुंचाया जाता है। डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर आधुनिक क्वांटम कंप्यूटिंग अनुसंधान का एक अनिवार्य उपकरण माना जाता है, क्योंकि सुपरकंडक्टिंग क्यूबिट्स और अन्य संवेदनशील क्वांटम घटकों के संचालन के लिए अत्यधिक ठंडे वातावरण की आवश्यकता होती है।

भारत के क्वांटम रेफरेंस फैसिलिटी नेटवर्क का विस्तार

अप्रैल 2026 में भारत ने अपने पहले क्वांटम रेफरेंस फैसिलिटी केंद्रों की स्थापना मेधा टावर्स, अमरावती और एसआरएम यूनिवर्सिटी एपी में की थी। इन केंद्रों को राष्ट्रीय स्तर के परीक्षण मंच के रूप में विकसित किया गया है, जहां क्वांटम हार्डवेयर का विकास, परीक्षण और विशेषताओं का विश्लेषण किया जाता है। अमरावती क्वांटम वैली की शुरुआत सितंबर 2025 में वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप कंपनियों, उद्योग विशेषज्ञों तथा आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और आईटी मंत्री नारा लोकेश के साथ हुई चर्चाओं के बाद हुई थी। इस पहल को “मेड इन अमरावती फॉर द वर्ल्ड” दृष्टिकोण के तहत वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी क्वांटम हार्डवेयर पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।

स्वदेशी क्वांटम हार्डवेयर निर्माण को बढ़ावा

AQV ने क्यूबिट फोर्स और क्यूबिटेक जैसी संस्थाओं के साथ मिलकर भारत की क्वांटम हार्डवेयर आपूर्ति श्रृंखला का मानचित्रण किया है। इस साझेदारी का उद्देश्य क्रायोजेनिक प्रणालियों, सुपरकंडक्टिंग क्वांटम कंप्यूटिंग उपकरणों और संबंधित वैज्ञानिक यंत्रों के क्षेत्र में स्वदेशी क्षमता विकसित करना है। यह पहल आत्मनिर्भर भारत अभियान के व्यापक उद्देश्यों के अनुरूप है, जिसके तहत भारत रणनीतिक और उन्नत प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में विदेशी निर्भरता कम करने का प्रयास कर रहा है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • 4 केल्विन का तापमान लगभग -269 डिग्री सेल्सियस के बराबर होता है।
  • परम शून्य तापमान 0 केल्विन या -273.15 डिग्री सेल्सियस माना जाता है।
  • डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर हीलियम-3 और हीलियम-4 के मिश्रण से अत्यंत निम्न तापमान उत्पन्न करता है।
  • सिंगल-फोटॉन डिटेक्टरों का उपयोग क्वांटम संचार, क्वांटम ऑप्टिक्स और फोटोनिक्स अनुसंधान में किया जाता है।

अमरावती क्वांटम वैली की यह उपलब्धि भारत के क्वांटम प्रौद्योगिकी कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। स्वदेशी क्रायोजेनिक प्रणालियों के सफल विकास से न केवल देश की वैज्ञानिक क्षमता बढ़ेगी, बल्कि क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम संचार और उन्नत अनुसंधान उपकरणों के क्षेत्र में भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति भी मजबूत होगी।

Originally written on June 20, 2026 and last modified on June 20, 2026.

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