अडानी पावर–भूटान साझेदारी से 770 मेगावाट जलविद्युत परियोजना को गति

अडानी पावर–भूटान साझेदारी से 770 मेगावाट जलविद्युत परियोजना को गति

अडानी पावर और भूटान की सरकारी कंपनी ड्रुक ग्रीन पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (DGPC) ने 770 मेगावाट की चमखरछू-I जलविद्युत परियोजना के लिए शेयरधारक समझौता किया है। यह परियोजना भूटान के मध्य हिस्से में जेमगांग जिले की चमखरछू नदी पर विकसित की जाएगी और इसे रन-ऑफ-रिवर तथा पीकिंग क्षमता वाली योजना के रूप में तैयार किया जाएगा।

परियोजना की संरचना और निवेश मॉडल

इस परियोजना में 49:51 की इक्विटी भागीदारी होगी, जिसमें अडानी पावर की हिस्सेदारी 49 प्रतिशत और DGPC की 51 प्रतिशत होगी। इसे बिल्ड, ओन, ऑपरेट एंड ट्रांसफर यानी BOOT मॉडल के तहत लागू किया जाएगा। इस मॉडल में निजी और सार्वजनिक भागीदार मिलकर परियोजना विकसित करते हैं और तय अवधि के बाद इसे हस्तांतरित किया जाता है। चमखरछू-I के लिए रियायत अवधि वाणिज्यिक संचालन शुरू होने की तारीख से 30 वर्ष की होगी।

भूटान की ऊर्जा रणनीति में महत्व

भूटान की ऊर्जा व्यवस्था में जलविद्युत की भूमिका बेहद अहम है। देश अपनी बिजली जरूरतों के साथ-साथ अधिशेष हरित बिजली के निर्यात पर भी निर्भर रहता है। चमखरछू-I परियोजना को भूटान की सर्दियों की बिजली मांग और गर्मियों में भारत को अतिरिक्त बिजली आपूर्ति की जरूरतों से जोड़ा जा रहा है। भारत और भूटान के बीच बिजली सहयोग लंबे समय से द्विपक्षीय संबंधों का मजबूत आधार रहा है, और यह परियोजना उसी साझेदारी को और आगे बढ़ाती है।

अडानी पावर और DGPC की बढ़ती साझेदारी

यह समझौता अडानी पावर और DGPC के बीच दूसरी बड़ी जलविद्युत साझेदारी है। इससे पहले सितंबर 2025 में दोनों पक्षों ने 570 मेगावाट की वांगछू जलविद्युत परियोजना के लिए समझौता किया था। इसके अलावा, मई 2025 में अडानी समूह और DGPC के बीच 5,000 मेगावाट जलविद्युत विकास को लेकर एक व्यापक समझौता ज्ञापन भी हुआ था। इससे संकेत मिलता है कि दोनों पक्ष भूटान में बड़े पैमाने पर ऊर्जा अवसंरचना विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

निर्माण और समयसीमा

परियोजना का निर्माण 2027 की पहली छमाही में शुरू होने की उम्मीद है। ग्राउंडब्रेकिंग के छह वर्ष के भीतर इसके चालू होने का लक्ष्य रखा गया है। रन-ऑफ-रिवर परियोजनाओं में नदी के प्रवाह का उपयोग बिजली उत्पादन के लिए किया जाता है, जबकि पीकिंग क्षमता वाली परियोजनाएं अधिक मांग के समय पानी को रोककर और छोड़कर उत्पादन बढ़ा सकती हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • DGPC भूटान की राज्य-स्वामित्व वाली बिजली उत्पादन कंपनी है और ड्रुक होल्डिंग एंड इन्वेस्टमेंट्स की सहायक इकाई है।
  • BOOT का पूरा नाम Build, Own, Operate and Transfer है।
  • रन-ऑफ-रिवर जलविद्युत परियोजनाएं नदी के प्राकृतिक प्रवाह पर आधारित होती हैं और इनमें सीमित जल भंडारण होता है।
  • भूटान हिमालयी देश है और जलविद्युत उसके ऊर्जा क्षेत्र की रीढ़ मानी जाती है।

यह समझौता भारत-भूटान ऊर्जा सहयोग को नई दिशा देता है और क्षेत्रीय हरित ऊर्जा व्यापार को भी मजबूत करता है। आने वाले वर्षों में ऐसी परियोजनाएं दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को और गहरा कर सकती हैं।

Originally written on October 6, 2026 and last modified on October 6, 2026.

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