रात की बिजली कटौती रोकने को राज्यों ने केंद्र से अतिरिक्त आपूर्ति मांगी
देश के कई राज्यों ने अक्टूबर 2026 में रात के समय बिजली कटौती से बचने के लिए केंद्र सरकार से अतिरिक्त बिजली आवंटन की मांग की है। राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और दिल्ली उन राज्यों में शामिल हैं, जिन्होंने तंग बिजली संतुलन के बीच अतिरिक्त आपूर्ति की जरूरत जताई है।
क्यों बढ़ी अतिरिक्त बिजली की मांग
इस समय बिजली व्यवस्था पर दबाव इसलिए बढ़ा है क्योंकि कई स्रोतों से उपलब्धता सीमित हुई है। सितंबर 2026 में जलविद्युत उत्पादन सालाना आधार पर 20 प्रतिशत घट गया, जिसका कारण अल नीनो से जुड़ी कम बारिश बताई गई है। इसके अलावा कुछ कोयला संयंत्रों में रखरखाव कार्य और बैटरी भंडारण क्षमता की सीमाओं ने दिन में बनी सौर ऊर्जा को शाम और रात तक ले जाने की क्षमता कम कर दी।
कोयला संयंत्रों में जबरन बंदी के कारण भी बड़ी मात्रा में क्षमता उपलब्ध नहीं रही। अप्रैल 2026 में लगभग 21 गीगावाट क्षमता अनुपलब्ध रही। इसी दौरान 25 अप्रैल 2026 को पीक मांग 256 गीगावाट तक पहुंच गई थी और रात के समय लगभग 4.2 गीगावाट की कमी दर्ज की गई थी।
केंद्र से बिजली आवंटन कैसे होता है
भारत में बिजली उत्पादन कोयला, जलविद्युत, गैस, परमाणु और नवीकरणीय स्रोतों से होता है। केंद्र सरकार के पास केंद्रीय उत्पादन क्षमता का एक हिस्सा राज्यों को आवंटित करने का अधिकार होता है। सामान्यतः उच्च मांग के समय कोयला और जलविद्युत संयंत्रों से लगभग 14 से 15 गीगावाट बिजली आवंटन के लिए उपलब्ध रहती है।
यह व्यवस्था खास तौर पर तब महत्वपूर्ण हो जाती है जब राज्यों में शाम और रात के समय मांग बढ़ती है, लेकिन सौर उत्पादन शून्य हो जाता है। ऐसे में कोयला आधारित उत्पादन और भंडारण क्षमता ग्रिड संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।
सितंबर में मांग और कमी की स्थिति
सितंबर 2026 में देश की पीक बिजली मांग 269 गीगावाट तक पहुंच गई, जो मई 2026 में दर्ज 271 गीगावाट के अब तक के उच्चतम स्तर के करीब है। ग्रिड-इंडिया के आंकड़ों के अनुसार सितंबर में बिजली की कमी 544 मिलियन यूनिट रही, जबकि अगस्त में यह 98 मिलियन यूनिट थी। एक अन्य आकलन में सितंबर 2026 की कमी 560 मिलियन किलोवाट-घंटे बताई गई, जो अगस्त 2023 के बाद सबसे ऊंचा स्तर था।
पंजाब को भी सितंबर 2026 में केंद्र से अतिरिक्त बिजली मिली थी, जब कुछ इलाकों में 14 घंटे तक की कटौती की स्थिति बनी थी। यह संकेत है कि मांग और आपूर्ति के बीच असंतुलन कई राज्यों में एक साथ चुनौती बन सकता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ग्रिड-इंडिया देश का राष्ट्रीय पावर सिस्टम ऑपरेटर है, जो बिजली मांग, आपूर्ति और ग्रिड स्थिरता पर नजर रखता है।
- पीक पावर डिमांड का अर्थ है किसी दिन, महीने या वर्ष में दर्ज की गई सबसे अधिक बिजली मांग।
- जलविद्युत उत्पादन वर्षा, जलाशयों के स्तर और नदी प्रवाह पर निर्भर करता है; कमजोर मानसून में यह घट सकता है।
- बैटरी स्टोरेज दिन में अतिरिक्त सौर बिजली को संचित कर शाम और रात की मांग में उपयोग करने में मदद करता है।
कुल मिलाकर, यह स्थिति बताती है कि नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ने के बावजूद भंडारण और थर्मल बैकअप की मजबूती अभी भी बिजली सुरक्षा के लिए निर्णायक बनी हुई है।