अंडमान-निकोबार में सबसे कम प्रजनन दर
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह ने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 में भारत की सबसे कम कुल प्रजनन दर दर्ज की है। यहां टीएफआर घटकर 0.9 रह गई है, जो प्रतिस्थापन स्तर 2.1 से काफी कम है। यह आंकड़ा केवल जनसंख्या वृद्धि में कमी नहीं, बल्कि भविष्य में बदलती सामाजिक और आयु संरचना का भी संकेत देता है।
कुल प्रजनन दर का अर्थ
कुल प्रजनन दर यानी टीएफआर यह बताती है कि कोई महिला अपने प्रजनन काल, आमतौर पर 15 से 49 वर्ष की आयु के दौरान औसतन कितने बच्चों को जन्म दे सकती है। जनसंख्या अध्ययन में 2.1 की टीएफआर को प्रतिस्थापन स्तर माना जाता है। इससे कम दर लंबे समय में जनसंख्या स्थिरता या कमी की ओर इशारा कर सकती है।
अंडमान-निकोबार की जनसांख्यिकीय स्थिति
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में टीएफआर एनएफएचएस-5 के 1.3 से घटकर एनएफएचएस-6 में 0.9 हो गई। एनएफएचएस-4 में यह दर 1.4 थी। बच्चों की हिस्सेदारी भी घटी है। पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों का अनुपात 5.3 प्रतिशत से घटकर 3.7 प्रतिशत हो गया है। इसके साथ ही 60 वर्ष और उससे अधिक आयु की आबादी बढ़ी है, जो जनसंख्या वृद्धावस्था की ओर संकेत करती है।
शिक्षा और परिवार नियोजन की भूमिका
कम प्रजनन दर के पीछे छोटे परिवार की प्राथमिकता, महिलाओं की शिक्षा, आर्थिक स्वतंत्रता और परिवार नियोजन सेवाओं की उपलब्धता जैसे कारण माने जा सकते हैं। जब समाज में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ती है, तो परिवार आकार को लेकर सोच भी बदलती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- अंडमान और निकोबार द्वीप समूह भारत का एक केंद्रशासित प्रदेश है।
- एनएफएचएस-6 में भारत की कुल प्रजनन दर 1.9 दर्ज की गई है।
- 2.1 की टीएफआर को जनसंख्या का प्रतिस्थापन स्तर माना जाता है।
- एनएफएचएस स्वास्थ्य, पोषण, प्रजनन और जनसांख्यिकीय संकेतकों पर आधारित बड़ा घरेलू सर्वेक्षण है।
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की घटती प्रजनन दर भारत में बदलते जनसांख्यिकीय रुझानों का महत्वपूर्ण उदाहरण है। कम जन्म दर और बुजुर्ग आबादी में वृद्धि भविष्य की नीतियों, स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लिए नए संकेत देती है।