वडोदरा में सेमीकंडक्टर कौशल प्रशिक्षण केंद्र की शुरुआत

वडोदरा में सेमीकंडक्टर कौशल प्रशिक्षण केंद्र की शुरुआत

गुजरात के वडोदरा में सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए तकनीकी कौशल विकसित करने वाला SemiOrbit Skill Excellence Centre शुरू हुआ है। 26 अक्टूबर 2026 को इसका उद्घाटन आईटीएम एसएलएस बड़ौदा विश्वविद्यालय के पालडी परिसर में किया गया। यह केंद्र आईनॉक्स इंडिया, विश्वविद्यालय, आईनॉक्स एयर प्रोडक्ट्स और स्वैजेलॉक बॉम्बे की साझेदारी से स्थापित हुआ है।

सेमीकंडक्टर उद्योग की जरूरतों पर प्रशिक्षण

केंद्र में विद्यार्थियों, इंजीनियरों और कामकाजी पेशेवरों के लिए संरचित पाठ्यक्रम, व्यावहारिक कार्यशालाएं और प्रमाणन के अवसर उपलब्ध होंगे। प्रशिक्षण के प्रमुख क्षेत्र ऑर्बिटल वेल्डिंग, प्रोसेस पाइपिंग और अति-उच्च शुद्धता वाली गैसों की वितरण प्रणालियां हैं। इन कौशलों का उपयोग सेमीकंडक्टर निर्माण इकाइयों में गैस आपूर्ति और अन्य प्रक्रिया-संबंधी ढांचे की स्थापना, निर्माण तथा रखरखाव में होता है।

ऑर्बिटल वेल्डिंग में पाइप या ट्यूब की परिधि के चारों ओर मशीन की सहायता से वेल्डिंग की जाती है। सेमीकंडक्टर निर्माण में इस्तेमाल होने वाली गैसों को उपकरणों तक नियंत्रित और स्वच्छ तरीके से पहुंचाना जरूरी होता है। गैस में मौजूद अशुद्धियां निर्माण प्रक्रिया और उपकरणों को प्रभावित कर सकती हैं, इसलिए पाइप, जोड़ और स्थापना के तरीके भी शुद्धता बनाए रखने के अनुरूप चुने जाते हैं।

साझेदार संस्थाओं की भूमिका

आईनॉक्स इंडिया केंद्र को क्रायोजेनिक और गैस संबंधी बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराएगी तथा इंजीनियरों को प्रशिक्षण देगी। आईनॉक्स एयर प्रोडक्ट्स अति-उच्च शुद्धता वाली गैसों की आपूर्ति करेगी, जबकि स्वैजेलॉक बॉम्बे ऑर्बिटल वेल्डिंग और प्रोसेस पाइपिंग से जुड़ी तकनीक तथा विशेषज्ञता देगा। आईटीएम एसएलएस बड़ौदा विश्वविद्यालय शैक्षणिक और प्रशिक्षण गतिविधियों का नेतृत्व करेगा।

क्रायोजेनिक इंजीनियरिंग में बहुत कम तापमान पर पदार्थों और प्रणालियों के उपयोग का अध्ययन किया जाता है। इसका संबंध द्रवीकृत गैसों के भंडारण और संचालन से भी है। केंद्र में इन तकनीकी क्षेत्रों को उद्योग में इस्तेमाल होने वाली व्यावहारिक प्रक्रियाओं से जोड़ा जाएगा।

भारत के सेमीकंडक्टर मिशन से जुड़ाव

यह पहल भारत के सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले विनिर्माण तंत्र को मजबूत करने के उद्देश्य के अनुरूप है। इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत भारत सेमीकंडक्टर मिशन इस क्षेत्र के विकास के लिए काम करता है। दिसंबर 2021 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 76,000 करोड़ रुपये के परिव्यय वाला सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम मंजूर किया था। इसके दायरे में सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले फैब, कंपाउंड सेमीकंडक्टर, सिलिकॉन फोटोनिक्स, सेंसर तथा चिप डिजाइन जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • सेमीकंडक्टर की विद्युत चालकता चालक और कुचालक पदार्थों के बीच होती है; सिलिकॉन इसका व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाला उदाहरण है।
  • सिलिकॉन का परमाणु क्रमांक 14 है।
  • फोटोलिथोग्राफी में प्रकाश-संवेदी पदार्थों की मदद से सर्किट का पैटर्न वेफर पर बनाया जाता है।
  • भारत सेमीकंडक्टर मिशन, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत आता है।

वडोदरा का यह केंद्र सेमीकंडक्टर निर्माण में जरूरी गैस प्रणालियों और सटीक पाइपिंग से जुड़े कौशल पर ध्यान देगा। इससे उद्योग की तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण उपलब्ध कराने का प्रयास होगा।

Originally written on October 27, 2026 and last modified on October 27, 2026.

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