समुद्री बचाव में नौसेना की स्वदेशी दो-ड्रोन पहल
भारतीय नौसेना अकादमी ने 27 अक्टूबर 2026 को समुद्र में संकटग्रस्त लोगों की तलाश और सहायता के लिए स्वदेशी दो-ड्रोन प्रणाली का अनावरण किया। इसमें एक ड्रोन संभावित लोगों की पहचान करता है, जबकि दूसरा उनके पास जीवनरक्षक घेरा पहुंचाता है। यह व्यवस्था समुद्री खोज एवं बचाव अभियानों में हवाई निगरानी और त्वरित सहायता को एक साथ जोड़ती है।
तलाशी और सहायता के लिए अलग-अलग ड्रोन
इस प्रणाली में दो तरह के मानवरहित विमान शामिल हैं। क्वाडकॉप्टर पानी में मौजूद लोगों की तलाश करता है। इसमें 2के दृश्य कैमरा और तापीय कैमरा लगे हैं, जिनसे वह क्षेत्र का सीधा वीडियो देख सकता है। वीडियो में संभावित व्यक्ति की पहचान के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर आधारित ‘योलो’ मॉडल का उपयोग होता है। योलो का पूरा नाम ‘यू ओनली लुक वन्स’ है और यह तस्वीरों या वीडियो में वस्तुओं की वास्तविक समय में पहचान करने वाले मॉडल परिवार का हिस्सा है।
दूसरा ड्रोन हेक्साकॉप्टर है। पहचान के बाद वह उपग्रह आधारित जीपीएस दिशा-निर्देशन की मदद से संबंधित स्थान तक उड़ता है और वहां जीवनरक्षक घेरा छोड़ता है। दोनों ड्रोन लंबी दूरी के रेडियो संचार से एक-दूसरे से संपर्क करते हैं। प्रणाली संभावित व्यक्ति की पहचान कर सहायता पहुंचाने की प्रक्रिया में मदद करती है, लेकिन आगे कार्रवाई करने का अंतिम निर्णय मानव संचालक के नियंत्रण में रहता है।
उड़ान क्षमता और संचालन का दायरा
तलाशी करने वाले क्वाडकॉप्टर की उड़ान अवधि 45 मिनट, अधिकतम गति 50 किलोमीटर प्रति घंटा और भार वहन क्षमता 0.5 किलोग्राम है। सहायता पहुंचाने वाले हेक्साकॉप्टर की उड़ान अवधि 25 मिनट, अधिकतम गति 40 किलोमीटर प्रति घंटा और भार वहन क्षमता 2.5 किलोग्राम बताई गई है। दोनों विमानों का संचालन दायरा 10 किलोमीटर है। भारतीय नौसेना अकादमी की विकास टीम में मिडशिपमैन सुधांशु तंवर भी शामिल थे।
समुद्री खोज एवं बचाव में उपयोगिता
समुद्र में संकट की स्थिति में व्यक्ति का स्थान पता करना बचाव अभियान का अहम हिस्सा होता है। ड्रोन कैमरों की मदद से ऐसे क्षेत्रों की निगरानी कर सकते हैं, जहां बचाव दल के लिए सीधे पहुंचकर तलाश करना कठिन हो। इस प्रणाली में एक विमान पहचान का काम करता है और दूसरा जीवनरक्षक घेरा पहुंचाता है। इससे खोज और शुरुआती सहायता के बीच समन्वय का एक स्वदेशी तरीका सामने आता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- अंतरराष्ट्रीय समुद्री खोज एवं बचाव अभिसमय 1979 में अपनाया गया और 1985 में लागू हुआ।
- अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन, संयुक्त राष्ट्र की समुद्री सुरक्षा और संरक्षा से जुड़ी विशिष्ट एजेंसी है।
- ‘योलो’ तस्वीरों और वीडियो में वस्तुओं की पहचान करने वाले वास्तविक समय के कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडल का नाम है।
- जीपीएस उपग्रह आधारित दिशा-निर्धारण प्रणाली है, जिसका संचालन संयुक्त राज्य अमेरिका की अंतरिक्ष सेना करती है।
अकादमी की यह स्वदेशी प्रणाली समुद्री बचाव में मानवरहित विमानों की व्यावहारिक भूमिका को दर्शाती है। तलाशी, स्थान निर्धारण और जीवनरक्षक उपकरण पहुंचाने को जोड़कर यह संकट के समय बचाव दलों को अतिरिक्त सहायता दे सकती है।