मंगल पर पर्सिवरेंस ने बनाया दूरी का नया रिकॉर्ड

मंगल पर पर्सिवरेंस ने बनाया दूरी का नया रिकॉर्ड

नासा के पर्सिवरेंस रोवर ने मंगल ग्रह पर किसी अन्य दुनिया में चलने वाले वाहन द्वारा तय की गई सबसे लंबी दूरी का रिकॉर्ड अपने नाम किया है। 11 अक्टूबर 2026 तक रोवर मंगल की सतह पर 45.22 किलोमीटर चल चुका था। उसने नासा के ही ऑपर्च्युनिटी रोवर का पुराना रिकॉर्ड पीछे छोड़ा, जिसने 2004 से 2018 के बीच 45.16 किलोमीटर की दूरी तय की थी।

साढ़े पांच साल में पार किया पुराना रिकॉर्ड

पर्सिवरेंस ने लगभग साढ़े पांच वर्षों में यह दूरी पूरी की, जबकि ऑपर्च्युनिटी को इससे मिलती-जुलती दूरी तय करने में करीब 15 साल लगे थे। यह तुलना मंगल की कठिन सतह पर रोवर की गति के साथ-साथ उसके लंबे समय तक काम करने की क्षमता को भी दर्शाती है। पर्सिवरेंस ने 14 जून 2026 को मंगल पर 42.195 किलोमीटर की मैराथन के बराबर दूरी भी पूरी की थी। उस समय उसका 1,890वां मंगल दिवस, यानी सोल, था।

सोल मंगल का अपने अक्ष पर एक चक्कर पूरा करने का समय है। यह पृथ्वी के दिन से थोड़ा लंबा होता है और लगभग 24 घंटे 39 मिनट का होता है। मंगल पर दूरी तय करने में रोवर को पथरीली जमीन, ढलानों और रास्ते में आने वाली बाधाओं का ध्यान रखना पड़ता है।

स्वचालित नेविगेशन से रास्ता चुनता है रोवर

पर्सिवरेंस की गति में उसकी स्वचालित नेविगेशन प्रणाली ऑटोनेव की अहम भूमिका है। यह प्रणाली रोवर को आसपास की जमीन का आकलन करने और बाधाओं से बचते हुए आगे का रास्ता चुनने में मदद करती है। रोवर की 90 प्रतिशत से अधिक ड्राइविंग में यह प्रणाली सीधे मानवीय नियंत्रण के बिना काम करती है। हालांकि, मिशन दल पृथ्वी से गतिविधियों की योजना बनाता है और रोवर को निर्देश भेजता है।

दूर स्थित मंगल पर रोवर चलाने के लिए वैज्ञानिकों को पृथ्वी से मिले चित्रों और आंकड़ों के आधार पर मार्ग तय करना पड़ता है। स्वचालित व्यवस्था पर्सिवरेंस को रास्ते में मौजूद जोखिमों से बचने और खोज के लिए निर्धारित क्षेत्रों तक पहुंचने में अधिक सक्षम बनाती है। नासा की जेट प्रोपल्शन प्रयोगशाला इस मिशन का प्रबंधन करती है।

जेज़ेरो क्रेटर में प्राचीन पर्यावरण की पड़ताल

पर्सिवरेंस 18 फरवरी 2021 को मंगल के जेज़ेरो क्रेटर में उतरा था। इस क्षेत्र में प्राचीन नदी डेल्टा और झील के बेसिन से जुड़ी भू-आकृतियां मौजूद हैं। फिलहाल रोवर क्रेटर के पश्चिमी किनारे की खोज कर रहा है। वैज्ञानिक वहां प्राचीन जलतापीय प्रणालियों के प्रमाण तलाश रहे हैं, जिनका वातावरण सूक्ष्मजीवी जीवन के अनुकूल रहा हो सकता है।

मिशन को लगभग 2028 के अंत तक बढ़ाया गया है। परियोजना प्रबंधक स्टीवन ली के अनुसार, रोवर की प्रणालियां अच्छी स्थिति में हैं और इसके 2030 के दशक तक काम करने की क्षमता बनी हुई है। पर्सिवरेंस चट्टानों और मिट्टी के नमूने एकत्र कर उन्हें सुरक्षित रखता है, ताकि भविष्य के मिशनों के जरिए उन्हें पृथ्वी पर लाने की संभावना पर काम किया जा सके।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • मंगल सूर्य से चौथा ग्रह है और इसे स्थलीय ग्रहों की श्रेणी में रखा जाता है।
  • जेज़ेरो क्रेटर नासा के पर्सिवरेंस रोवर का उतरने का स्थान है।
  • ऑपर्च्युनिटी नासा का मंगल अन्वेषण रोवर था, जिसने 2004 से 2018 तक मंगल पर काम किया।
  • पर्सिवरेंस नासा के मंगल 2020 मिशन का हिस्सा है, जिसे 30 जुलाई 2020 को प्रक्षेपित किया गया था।

पर्सिवरेंस का नया दूरी रिकॉर्ड मंगल पर रोबोटिक खोज की बढ़ती क्षमता को दिखाता है। उसकी यात्राएं और नमूना-संग्रह लाल ग्रह के प्राचीन पर्यावरण को समझने में वैज्ञानिकों की मदद कर रहे हैं।

Originally written on October 13, 2026 and last modified on October 13, 2026.

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