LHS 1140b पर हीलियम की खोज से रहने योग्य ग्रहों की समझ बढ़ी
खगोलविदों ने पृथ्वी से लगभग 48 से 49 प्रकाश-वर्ष दूर स्थित एक चट्टानी एक्सोप्लैनेट LHS 1140b के वायुमंडल में हीलियम के संकेत दर्ज किए हैं। यह खोज इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह ग्रह अपने तारे के रहने योग्य क्षेत्र में आता है और उन कुछ चट्टानी, अपेक्षाकृत ठंडे एक्सोप्लैनेट्स में शामिल हो गया है, जिनके वायुमंडल के बारे में प्रत्यक्ष वैज्ञानिक साक्ष्य मिले हैं।LHS 1140b को सुपर-अर्थ श्रेणी में रखा जाता है। इसका द्रव्यमान पृथ्वी से लगभग 5.6 गुना और त्रिज्या लगभग 1.73 गुना है। यह ग्रह Cetus तारामंडल में स्थित एक लाल बौने तारे की परिक्रमा करता है। रहने योग्य क्षेत्र का अर्थ है वह कक्षीय दायरा, जहां उपयुक्त वायुमंडलीय परिस्थितियों में सतह पर तरल पानी मौजूद रह सकता है।
हीलियम का संकेत क्यों अहम है
हीलियम की पहचान चिली स्थित Las Campanas Observatory में Magellan Clay Telescope पर लगे Warm Infrared Echelle Spectrograph की मदद से की गई। खगोल विज्ञान में हीलियम का “भागकर बाहर निकलना” वायुमंडलीय क्षरण का एक उपयोगी संकेतक माना जाता है, क्योंकि यह ऊपरी वायुमंडल तक फैलकर अवरक्त प्रकाश की खास तरंगदैर्घ्य पर अवशोषण दिखा सकता है।2024 के अवलोकनों में LHS 1140b से स्पष्ट हीलियम सिग्नल मिला, जबकि 2025 के अवलोकनों में ऐसा संकेत नहीं दिखा। इससे यह समझ बनती है कि चट्टानी ग्रहों पर वायुमंडलीय क्षरण समय के साथ बदल सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह संकेत एक हीलियम-समृद्ध ऊपरी वायुमंडल की ओर इशारा करता है, हालांकि निचली परतों में पानी जैसे भारी वाष्पशील पदार्थों की मौजूदगी की संभावना भी मॉडल में बनी हुई है।
रहने योग्य क्षेत्र और खगोलजीवविज्ञान के लिए महत्व
LHS 1140b को खगोलजीवविज्ञान के लिए एक दिलचस्प लक्ष्य माना जा रहा है, क्योंकि यह न केवल रहने योग्य क्षेत्र में है, बल्कि कम से कम 3.1 अरब वर्षों से अपना वायुमंडल बनाए हुए है। यह अवधि पृथ्वी की आयु का लगभग तीन-चौथाई है। किसी ग्रह के लंबे समय तक वायुमंडल को बनाए रखने की क्षमता उसके विकास, सतही परिस्थितियों और संभावित जैविक अनुकूलता को समझने में मदद करती है।इसी प्रणाली का एक अन्य ग्रह LHS 1140c तारे के अधिक करीब है और उसे LHS 1140b की तुलना में लगभग पांच गुना अधिक विकिरण मिलता है। अब तक LHS 1140c पर किसी वायुमंडल का पता नहीं चला है। यह तुलना बताती है कि एक ही ग्रह-तंत्र में भी ग्रहों की परिस्थितियां कितनी अलग हो सकती हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- LHS 1140b एक सुपर-अर्थ है, यानी पृथ्वी से बड़ा लेकिन नेपच्यून जैसे बर्फीले दिग्गजों से छोटा ग्रह।
- रहने योग्य क्षेत्र को खगोल विज्ञान में Goldilocks zone भी कहा जाता है।
- एक्सोप्लैनेट वायुमंडल के अध्ययन में James Webb Space Telescope और Hubble Space Telescope जैसे उपकरणों का उपयोग होता है।
- Science एक peer-reviewed पत्रिका है, जो प्राकृतिक विज्ञानों पर मूल शोध प्रकाशित करती है।
कुल मिलाकर, LHS 1140b पर हीलियम की यह खोज चट्टानी एक्सोप्लैनेट्स के वायुमंडल, उनके क्षरण और रहने योग्य परिस्थितियों की वैज्ञानिक समझ को आगे बढ़ाती है। यह अध्ययन दिखाता है कि पृथ्वी से बाहर जीवन-समर्थ परिस्थितियों की तलाश अब केवल ग्रहों की पहचान तक सीमित नहीं रही, बल्कि उनके वायुमंडल की सूक्ष्म जांच तक पहुंच चुकी है।