114 राफेल प्रस्ताव से वायुसेना की ताकत बढ़ाने की तैयारी

114 राफेल प्रस्ताव से वायुसेना की ताकत बढ़ाने की तैयारी

फ्रांस ने भारत को 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए तकनीकी-व्यावसायिक प्रस्ताव सौंपा है। यह प्रस्ताव भारत की मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट खरीद योजना से जुड़ा है और यदि आगे बढ़ता है, तो यह देश के रक्षा आधुनिकीकरण की सबसे बड़ी परियोजनाओं में से एक होगा।

क्यों अहम है यह प्रस्ताव

यह संभावित सौदा सरकार-से-सरकार मॉडल पर आधारित है और इसकी अनुमानित कीमत करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये, यानी लगभग 39 अरब डॉलर बताई जा रही है। भारतीय वायुसेना के पास इस समय स्वीकृत 42 स्क्वाड्रनों की तुलना में कम संख्या में सक्रिय लड़ाकू स्क्वाड्रन हैं, इसलिए यह खरीद उसकी क्षमता बढ़ाने और पुराने बेड़े की कमी पूरी करने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

राफेल एक ट्विन-इंजन, मल्टीरोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट है, जिसे फ्रांस की दासो एविएशन ने विकसित किया है। यह वायु रक्षा, गहरे हमले, टोही और परमाणु प्रतिरोध जैसी भूमिकाओं में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसका नौसैनिक संस्करण विमानवाहक पोतों से भी संचालन के लिए सक्षम है।

खरीद प्रक्रिया किस चरण में है

इस परियोजना को फरवरी 2026 में रक्षा अधिग्रहण परिषद से Acceptance of Necessity यानी आवश्यकता की स्वीकृति मिल चुकी थी। इसके बाद भारत ने मई 2026 में फ्रांस को औपचारिक Letter of Request भेजा। अगस्त 2026 में रक्षा मंत्रालय की Acquisition Wing ने प्रस्ताव की जांच शुरू की।

यह प्रक्रिया बताती है कि मामला अभी शुरुआती लेकिन निर्णायक चरण में है। भारत में रक्षा खरीद के लिए Acceptance of Necessity पहला औपचारिक अनुमोदन चरण माना जाता है, जिसके बाद विस्तृत मूल्यांकन, बातचीत और अंतिम मंजूरी की प्रक्रिया आगे बढ़ती है।

तकनीक, उत्पादन और भारतीय उद्योग की भूमिका

प्रस्ताव में एयरफ्रेम, इंजन और एवियोनिक्स के लिए व्यापक तकनीक हस्तांतरण शामिल बताया गया है। इंजन से जुड़े हस्तांतरण में सफ्रान, एवियोनिक्स में थेल्स और हैदराबाद स्थित टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड को राफेल फ्यूजलेज के वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में जोड़ा गया है।

मीडिया रिपोर्टों में स्थानीय असेंबली के अलग-अलग विकल्पों का उल्लेख किया गया है, जिनमें कुछ विमान फ्रांस से सीधे आने और शेष भारत में बनाने या असेंबल करने की बात शामिल है। प्रस्ताव में भारतीय हथियारों, जैसे अस्त्रा बियॉन्ड-विजुअल-रेंज मिसाइल और ब्रह्मोस-एनजी के एकीकरण की भी बात कही गई है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • राफेल 4.5-जनरेशन का लड़ाकू विमान है, जिसे दासो एविएशन ने विकसित किया है।
  • रक्षा अधिग्रहण परिषद, रक्षा मंत्रालय की पूंजीगत खरीद प्रस्तावों के लिए सर्वोच्च निकाय है।
  • Acceptance of Necessity भारत की रक्षा खरीद प्रक्रिया का पहला औपचारिक चरण होता है।
  • भारतीय वायुसेना की स्वीकृत स्क्वाड्रन क्षमता 42 है, जबकि सक्रिय संख्या इससे कम बताई जा रही है।

114 राफेल का यह प्रस्ताव केवल विमान खरीद का मामला नहीं है, बल्कि इसमें तकनीक हस्तांतरण, घरेलू उत्पादन और वायुसेना की दीर्घकालिक क्षमता बढ़ाने की रणनीति भी जुड़ी है। आगे की बातचीत और मंजूरी पर इस सौदे की दिशा तय होगी।

Originally written on August 7, 2026 and last modified on August 7, 2026.

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