हैदराबाद स्टार्टअप का ‘आहूति Mk II’ बना भारत का सबसे तेज मल्टीरोटर ड्रोन

हैदराबाद स्टार्टअप का ‘आहूति Mk II’ बना भारत का सबसे तेज मल्टीरोटर ड्रोन

हैदराबाद स्थित बीआईटीएस पिलानी कैंपस से इनक्यूबेटेड डिफेंस टेक स्टार्टअप अपोलियन डायनेमिक्स ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कंपनी के इलेक्ट्रिक इंटरसेप्टर ड्रोन आहूति Mk II ने 498 किमी प्रति घंटे की प्रमाणित शीर्ष गति दर्ज कर भारत के सबसे तेज मल्टीरोटर यूएवी का रिकॉर्ड अपने नाम किया है। इस प्रदर्शन के साथ उसने देश में पहले दर्ज 325 किमी प्रति घंटे के मानक को काफी पीछे छोड़ दिया।

क्या है आहूति Mk II और क्यों खास है

आहूति Mk II को सामान्य सर्विलांस या फोटोग्राफी ड्रोन की तरह नहीं, बल्कि एक हाई-स्पीड इंटरसेप्टर प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया गया है। ऐसे ड्रोन का उपयोग दुश्मन ड्रोन और लोइटरिंग म्यूनिशन को पीछा करके निष्क्रिय करने के लिए किया जाता है। रक्षा क्षेत्र में इन्हें तेजी से प्रतिक्रिया देने वाली तकनीक के रूप में देखा जाता है, क्योंकि आधुनिक युद्ध और सीमा सुरक्षा में हवाई खतरों की गति लगातार बढ़ रही है।

कंपनी के अनुसार, मूल आहूति मॉडल 2025 में विकसित किया गया था और उसकी गति लगभग 300 किमी प्रति घंटे थी। Mk II संस्करण को एक वर्ष से भी कम समय में पूरी तरह नए सिरे से तैयार किया गया और इसने पहले मॉडल की तुलना में करीब 66 प्रतिशत अधिक गति हासिल की।

स्टार्टअप, टीम और विकास यात्रा

अपोलियन डायनेमिक्स की स्थापना जयंत खत्री और सौर्य चौधरी ने की थी। खत्री के स्नातक स्तर के कार्य को बीआईटीएस पिलानी के SOLVE कार्यक्रम से सहायता मिली, जिसके तहत 2 लाख रुपये का प्रोटोटाइप अनुदान दिया गया। यह दिखाता है कि शैक्षणिक संस्थानों की इनक्यूबेशन और फंडिंग व्यवस्था किस तरह रक्षा नवाचारों को शुरुआती सहारा दे सकती है।

रिकॉर्ड बनाने वाले इस यूएवी के तकनीकी दल में हाई-स्पीड ड्रोन पायलट अमन विरानी, जिन्हें शैडी के नाम से भी जाना जाता है, के साथ मानस विचारे और ईशान सूरी शामिल थे। कंपनी ने अपने कुछ मानवरहित सिस्टम भारतीय सेना की इकाइयों के साथ भी तैनात किए हैं, जिससे इसकी रक्षा-उन्मुख क्षमताओं का संकेत मिलता है।

रक्षा तकनीक और मल्टीरोटर यूएवी का महत्व

मल्टीरोटर यूएवी वे मानवरहित विमान होते हैं जिनमें लिफ्ट और नियंत्रण के लिए एक से अधिक रोटर लगे होते हैं। क्वाडकॉप्टर, हेक्साकॉप्टर और ऑक्टोकॉप्टर इसके सामान्य रूप हैं। इनका उपयोग निगरानी, मैपिंग, फोटोग्राफी और पेलोड डिलीवरी जैसे कार्यों में होता है, लेकिन इंटरसेप्टर ड्रोन का उपयोग इससे अलग और अधिक रणनीतिक होता है।

लोइटरिंग म्यूनिशन ऐसे मानवरहित सिस्टम होते हैं जो लक्ष्य पर हमला करने से पहले कुछ समय तक हवा में मंडरा सकते हैं। रक्षा शब्दावली में इन्हें कई बार कामिकेज़ ड्रोन भी कहा जाता है। ऐसे में तेज, हल्के और सटीक इंटरसेप्टर प्लेटफॉर्म भविष्य की सुरक्षा जरूरतों में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स भारत में सत्यापित राष्ट्रीय उपलब्धियों का रिकॉर्ड रखती है।
  • आहूति Mk II एक इलेक्ट्रिक इंटरसेप्टर ड्रोन है, जिसकी प्रमाणित शीर्ष गति 498 किमी प्रति घंटे दर्ज की गई।
  • मल्टीरोटर यूएवी में एक से अधिक रोटर होते हैं; क्वाडकॉप्टर, हेक्साकॉप्टर और ऑक्टोकॉप्टर इसके प्रमुख प्रकार हैं।
  • बीआईटीएस पिलानी हैदराबाद कैंपस, बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस, पिलानी का एक परिसर है।

इस उपलब्धि ने भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में रक्षा-तकनीक नवाचार की क्षमता को फिर से रेखांकित किया है। तेज गति, स्वदेशी विकास और सैन्य उपयोगिता के मेल से आहूति Mk II जैसी प्रणालियाँ भविष्य की सुरक्षा तकनीक का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती हैं।

Originally written on September 3, 2026 and last modified on September 3, 2026.

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