हल्के कवच से भारतीय सेना के युद्धक वाहनों को मिलेगी नई क्षमता

हल्के कवच से भारतीय सेना के युद्धक वाहनों को मिलेगी नई क्षमता

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने भारतीय सेना के भविष्य के युद्धक वाहनों के लिए स्वदेशी कवच पैनल विकसित किए हैं। ये पैनल मौजूदा कवच प्रणालियों की तुलना में 20 प्रतिशत हल्के हैं। पुणे स्थित अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (इंजीनियर्स) ने इन्हें तैयार किया है। अक्टूबर 2026 तक पैनल डीआरडीओ के आंतरिक परीक्षण पूरे कर चुके थे और संगठन की आंतरिक परिचालन आवश्यकताओं पर खरे उतरे थे।

कवच सुरक्षा और हल्केपन का महत्व

नए पैनल नाटो के STANAG 4569 स्तर 6 सुरक्षा मानक के अनुरूप हैं और 30 मिमी के कवच-भेदी गोले का सामना करने के लिए बनाए गए हैं। STANAG 4569 सैन्य वाहनों में बैठे कर्मियों को बैलिस्टिक हमलों और अन्य खतरों से मिलने वाली सुरक्षा के स्तर तय करता है। कवच पैनल वाहन पर लगाए जाने वाले सुरक्षा घटक हैं, जो गोलियों और अन्य प्रक्षेपास्त्रों से होने वाले जोखिम को कम करते हैं।

वजन में 20 प्रतिशत की कमी का आकलन मौजूदा कवच प्रणालियों की तुलना में किया गया है। हल्का कवच वाहन की गतिशीलता और ईंधन दक्षता को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है। इससे वाहनों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाना भी आसान हो सकता है। ये पहलू पर्वतीय और अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों सहित अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों में सैन्य उपयोग के लिए महत्वपूर्ण हैं।

उद्योग के लिए तकनीक हस्तांतरण

डीआरडीओ ने लगभग 1 अक्टूबर 2026 को इस तकनीक को उद्योग हस्तांतरण के लिए सूचीबद्ध किया। यह हस्तांतरण संगठन की श्रेणी ए तकनीक हस्तांतरण योजना के तहत किया जा रहा है। उत्पादन के लिए तीन विनिर्माण लाइसेंस उपलब्ध कराए गए हैं और अक्टूबर 2026 तक कई बड़ी कंपनियों ने इसमें रुचि दिखाई थी।

तकनीक हस्तांतरण के माध्यम से सार्वजनिक अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित तकनीक को उद्योग तक पहुंचाया जाता है, ताकि उसका उत्पादन किया जा सके। उपलब्ध जानकारी में इच्छुक कंपनियों के नाम या लाइसेंस की शर्तें नहीं बताई गई हैं। साथ ही, पैनलों के परीक्षण की स्थिति डीआरडीओ के आंतरिक मूल्यांकन को दर्शाती है; इसे सेना में तैनाती या किसी अलग परीक्षण की पुष्टि नहीं माना जाना चाहिए।

सेना के किन वाहनों में हो सकता है उपयोग

यह कवच तकनीक भारतीय सेना के भविष्य के मुख्य युद्धक टैंकों, हल्के टैंकों और भविष्य के पैदल सेना युद्धक वाहनों के लिए बनाई गई है। इन प्लेटफॉर्मों पर हल्के सुरक्षा पैनल लगाने से सुरक्षा बनाए रखते हुए वाहन का कुल वजन घटाने में मदद मिल सकती है। इससे गतिशीलता और रणनीतिक परिवहन क्षमता को लाभ पहुंचाने का उद्देश्य है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • डीआरडीओ का पूरा नाम रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन है।
  • अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (इंजीनियर्स) पुणे में स्थित है।
  • STANAG 4569 सैन्य वाहन में सवार कर्मियों की सुरक्षा के स्तर से संबंधित नाटो मानक है।
  • नए पैनल 30 मिमी के कवच-भेदी गोले का सामना करने और मौजूदा प्रणालियों से 20 प्रतिशत हल्के होने के लिए विकसित किए गए हैं।

स्वदेशी कवच और उद्योग के साथ उसका उत्पादन-आधारित हस्तांतरण रक्षा निर्माण क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसका वास्तविक सैन्य उपयोग आगे के उत्पादन और मूल्यांकन पर निर्भर करेगा।

Originally written on October 19, 2026 and last modified on October 19, 2026.

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