ईरान के नए रक्षा मंत्री के सामने सैन्य उत्पादन बढ़ाने की चुनौती
ईरान की इस्लामी परामर्श सभा ने 18 अक्टूबर 2026 को मेहरदाद अखलाघी को रक्षा एवं सशस्त्र बल रसद मंत्री के रूप में मंजूरी दी। वह अज़ीज़ नासिरज़ादेह का स्थान लेंगे, जिनकी 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इज़राइल के शुरुआती हमलों के दौरान मृत्यु हो गई थी।
संसद की मंजूरी और नए मंत्री की नियुक्ति
खुले संसदीय सत्र में अखलाघी के पक्ष में 237 और विरोध में 15 मत पड़े। नासिरज़ादेह की मृत्यु के बाद माजिद इब्न अल-रेज़ा ने कार्यवाहक रक्षा मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली थी। अखलाघी की मंजूरी के साथ रक्षा मंत्रालय का नेतृत्व अब स्थायी मंत्री के हाथ में आ गया है।
ईरान की संसद का औपचारिक नाम इस्लामी परामर्श सभा है, जिसे आम तौर पर मजलिस कहा जाता है। ईरान के संविधान का अनुच्छेद 133 मंत्रियों की नियुक्ति और संसदीय विश्वास मत की व्यवस्था से जुड़ा है। इसके तहत राष्ट्रपति मंत्रियों को नियुक्त करते हैं और उन्हें संसद का विश्वास प्राप्त करना होता है।
रक्षा क्षेत्र में लंबा अनुभव और प्रतिबंध
अखलाघी ने ईरान के रक्षा मंत्रालय में 42 वर्ष तक काम किया है। वर्ष 2013 से वह रक्षा उद्योग संगठन का नेतृत्व कर रहे थे। यह संगठन ईरान में घरेलू रक्षा उत्पादन से जुड़ा है। उनके अनुभव के कारण उनसे रक्षा उत्पादन बढ़ाने और मंत्रालय की कार्यप्रणाली को मौजूदा सुरक्षा चुनौतियों के अनुरूप बनाने की अपेक्षा की जा रही है।
अखलाघी पर 2007 से संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध लागू हैं। ये प्रतिबंध कथित परमाणु या बैलिस्टिक मिसाइल गतिविधियों में उनकी भूमिका से जुड़े हैं। अमेरिका ने भी ईरान के मिसाइल कार्यक्रम से संबंधित अलग प्रतिबंध लगाए हैं। दोनों प्रतिबंध अलग-अलग प्राधिकरणों के फैसले हैं।
रक्षा नीति और क्षेत्रीय सुरक्षा का संदेश
मंजूरी मिलने के बाद अखलाघी ने ‘प्रतिरोध मोर्चे’ को मजबूत करने और रक्षा उत्पादन का विस्तार करने की बात कही। उन्होंने मंत्रालय की संरचना को मौजूदा सुरक्षा खतरों के अनुसार ढालने की जरूरत भी बताई। उनके बयान में अमेरिका और इज़राइल की ओर से दोबारा हमला होने पर व्यापक और अप्रत्याशित जवाब देने की चेतावनी शामिल थी।
यह नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब ईरान की रक्षा नीति पर क्षेत्रीय संघर्ष और सैन्य दबाव का प्रभाव है। रक्षा मंत्रालय का दायित्व केवल सैन्य व्यवस्था तक सीमित नहीं है; इसके पूरे नाम में सशस्त्र बलों की रसद भी शामिल है। इसलिए नए मंत्री के सामने रक्षा उत्पादन के साथ सैन्य जरूरतों के लिए संसाधन और आपूर्ति व्यवस्था को दिशा देने की जिम्मेदारी भी होगी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ईरान की राष्ट्रीय विधायिका का औपचारिक नाम इस्लामी परामर्श सभा है; इसे मजलिस भी कहा जाता है।
- ईरान के संविधान का अनुच्छेद 133 मंत्रियों के लिए संसदीय विश्वास मत की व्यवस्था करता है।
- मेहरदाद अखलाघी ने 2013 से रक्षा उद्योग संगठन का नेतृत्व किया था।
- ईरान के रक्षा मंत्रालय का पूरा नाम रक्षा एवं सशस्त्र बल रसद मंत्रालय है।
अखलाघी की नियुक्ति से ईरान की रक्षा व्यवस्था में नया नेतृत्व आया है। उनकी प्राथमिकताओं का केंद्र घरेलू रक्षा उत्पादन, मंत्रालय का पुनर्गठन और सुरक्षा चुनौतियों के प्रति प्रतिक्रिया रहेगा।