‘सोशियो’ वासु का निधन: आजादी और समाजवादी आंदोलन के समर्पित सेनानी

‘सोशियो’ वासु का निधन: आजादी और समाजवादी आंदोलन के समर्पित सेनानी

स्वतंत्रता सेनानी और समाजवादी कार्यकर्ता पी. वासु, जिन्हें ‘सोशियो’ वासु के नाम से जाना जाता था, का 8 अक्तूबर 2026 को केरल के कोझिकोड स्थित चेरुवन्नूर में निधन हो गया। वह 103 वर्ष के थे। स्कूली जीवन में राष्ट्रीय आंदोलन से जुड़े वासु ने आजादी के बाद समाजवादी आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई।

गांधीजी के भाषण से राष्ट्रीय आंदोलन की ओर

जनवरी 1923 में जन्मे वासु की राष्ट्रीय आंदोलन में रुचि 1934 में और मजबूत हुई, जब उन्होंने कोझिकोड में महात्मा गांधी का भाषण सुना। उस समय वह स्कूली विद्यार्थी थे। भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उन्होंने कुंडैथोडु से चेरुवन्नूर तक विरोध मार्च का नेतृत्व किया। ब्रिटिश पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर पीटा और वह तीन महीने से अधिक समय जेल में रहे।

भारत छोड़ो आंदोलन अगस्त 1942 में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान शुरू हुआ था। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने इस आंदोलन के जरिए ब्रिटिश शासन से भारत छोड़ने की मांग की। वासु की भागीदारी इसी व्यापक जन आंदोलन का हिस्सा थी, जिसमें देश के विभिन्न क्षेत्रों में लोगों ने औपनिवेशिक शासन का विरोध किया।

समाजवादी विचारों और सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता

1947 के बाद वासु समाजवादी आंदोलन से जुड़े। कोझिकोड में जयप्रकाश नारायण ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दी। समाजवादी विचारधारा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के कारण उन्हें ‘सोशियो’ वासु कहा जाने लगा।

1951 में मद्रास प्रेसीडेंसी की ओर से स्वतंत्रता सेनानियों को दी जा रही 10 एकड़ जमीन और 2,000 रुपये की पेशकश उन्होंने अस्वीकार कर दी। उनका कहना था कि स्वतंत्रता संघर्ष में भाग लेने का उद्देश्य भौतिक लाभ पाना नहीं था। यह निर्णय उनके सार्वजनिक जीवन में आदर्शों को प्राथमिकता देने का उल्लेखनीय उदाहरण बना।

आपातकाल में विरोध और सार्वजनिक सम्मान

1975 से 1977 के आपातकाल के दौरान वासु ने डाकघरों के सामने धरना देने वाले विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। इस प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई में वह घायल हुए और करीब एक महीने तक अस्पताल में भर्ती रहे।

भारत की स्वतंत्रता के 50 वर्ष पूरे होने के अवसर पर 1997 में राष्ट्रपति के. आर. नारायणन ने नई दिल्ली में उनका सम्मान किया। वासु का अंतिम संस्कार 9 अक्तूबर 2026 को कोझिकोड के गोठेश्वरम शवदाह गृह में राजकीय सम्मान के साथ किया जाना निर्धारित था।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • भारत छोड़ो आंदोलन अगस्त 1942 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेतृत्व में शुरू हुआ था।
  • जयप्रकाश नारायण स्वतंत्रता सेनानी और समाजवादी नेता थे।
  • भारत में आपातकाल 1975 से 1977 तक लागू रहा।
  • के. आर. नारायणन ने 1997 से 2002 तक भारत के राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया।

पी. वासु का जीवन स्वतंत्रता आंदोलन की भागीदारी, समाजवादी राजनीति और व्यक्तिगत लाभ से ऊपर सिद्धांतों को रखने की मिसाल के रूप में याद किया जाएगा।

Originally written on October 9, 2026 and last modified on October 9, 2026.

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