एम.आर. राघव वारियर को 2026 का एम.जी.एस. नारायणन स्मृति सम्मान
इतिहासकार एम.आर. राघव वारियर को 2026 के प्रोफेसर एम.जी.एस. नारायणन स्मृति पुरस्कार के लिए चुना गया है। यह सम्मान भाषा-विज्ञान, पुरालेख-विज्ञान और साहित्यिक आलोचना के क्षेत्र में उनके योगदान को मान्यता देता है। पुरस्कार के तहत 50,000 रुपये की राशि और प्रशस्ति-पत्र दिया जाएगा।
भाषा और ऐतिहासिक लेखन में योगदान
वारियर कालीकट विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग में पूर्व प्राध्यापक रहे हैं। उनके अकादमिक कार्य का दायरा भाषा, प्राचीन लेखन और साहित्य के अध्ययन तक फैला है। भाषा-विज्ञान में भाषा की संरचना और उसके इस्तेमाल का व्यवस्थित अध्ययन किया जाता है। पुरालेख-विज्ञान में पुराने लेखों और पांडुलिपियों के साथ-साथ लिपियों के स्वरूप और विकास का अध्ययन शामिल है। साहित्यिक आलोचना के माध्यम से साहित्यिक रचनाओं का विश्लेषण और व्याख्या की जाती है।
वारियर को इससे पहले केरल साहित्य अकादमी पुरस्कार और केरलम सरकार द्वारा स्थापित कैरली पुरस्कार भी मिल चुके हैं। ये सम्मान मलयालम भाषा और साहित्य से जुड़े उनके काम की व्यापक पहचान को दर्शाते हैं। इस बार का पुरस्कार उनके अध्ययन के विभिन्न क्षेत्रों में योगदान को एक साथ रेखांकित करता है।
पुरस्कार और इसे स्थापित करने वाली संस्थाएं
प्रोफेसर एम.जी.एस. नारायणन स्मृति पुरस्कार केरल हिस्ट्री कांग्रेस और कालीकट हेरिटेज फोरम ने संयुक्त रूप से स्थापित किया है। इसका नाम इतिहासकार एम.जी.एस. नारायणन के सम्मान में रखा गया है। पुरस्कार में नकद राशि के साथ प्रशस्ति-पत्र भी शामिल है, जो सम्मानित व्यक्ति के योगदान की औपचारिक लिखित सराहना है।
इतिहास से जुड़े ऐसे पुरस्कार शोध, लेखन और अकादमिक कार्यों को सार्वजनिक पहचान देते हैं। वारियर का चयन विशेष रूप से इसलिए उल्लेखनीय है कि उनका काम इतिहास के अध्ययन को भाषा, लिपि और साहित्य जैसे विषयों से जोड़ता है।
सम्मेलन में होगा सम्मान समारोह
पुरस्कार 10वें अंतरराष्ट्रीय केरल इतिहास सम्मेलन के दौरान प्रदान किया जाएगा। यह सम्मेलन 27 से 29 नवंबर 2026 तक केरल के मलप्पुरम स्थित गवर्नमेंट कॉलेज में आयोजित होना निर्धारित है। सम्मेलन का आयोजन इतिहास पर विचार-विमर्श के लिए अकादमिक अवसर उपलब्ध कराएगा और पुरस्कार समारोह इसी कार्यक्रम का हिस्सा होगा।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- एम.आर. राघव वारियर कालीकट विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के पूर्व प्राध्यापक हैं।
- एम.जी.एस. नारायणन स्मृति पुरस्कार में 50,000 रुपये और प्रशस्ति-पत्र दिया जाता है।
- केरल हिस्ट्री कांग्रेस और कालीकट हेरिटेज फोरम ने इस पुरस्कार की संयुक्त स्थापना की है।
- पुरालेख-विज्ञान में प्राचीन लेखन, पांडुलिपियों और लिपियों का अध्ययन किया जाता है।
वारियर का चयन केरल के इतिहास, भाषा और साहित्य संबंधी अकादमिक अध्ययन में उनके योगदान को सम्मानित करता है। पुरस्कार समारोह नवंबर 2026 में मलप्पुरम में आयोजित सम्मेलन के दौरान होगा।