सेशेल्स में इंसानों से अधिक एल्डाब्रा कछुए, संरक्षण की बड़ी उपलब्धि

सेशेल्स में इंसानों से अधिक एल्डाब्रा कछुए, संरक्षण की बड़ी उपलब्धि

हिंद महासागर के सेशेल्स स्थित एल्डाब्रा एटोल पर विशालकाय कछुओं की अनुमानित संख्या देश की मानव आबादी से अधिक हो गई है। अक्टूबर 2026 में ‘इकोलॉजी एंड इवोल्यूशन’ पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, इस एटोल पर 1,80,000 से 1,83,000 एल्डाब्रा विशालकाय कछुए रह सकते हैं। इसके मुकाबले सेशेल्स की आबादी 2025 के अंत में लगभग 1,23,000 थी और 2026 के मध्य के लिए इसका अनुमान 1,34,959 लगाया गया था।

पांच वर्षों के आंकड़ों से तैयार हुआ नया अनुमान

यह अध्ययन सेशेल्स आइलैंड्स फाउंडेशन और ब्रिटेन के एक्सेटर विश्वविद्यालय ने संयुक्त रूप से किया। शोधकर्ताओं ने 2018 से 2022 के बीच जुटाए गए आंकड़ों का विश्लेषण किया। 1990 के दशक के उत्तरार्ध के बाद यह पहला व्यापक और व्यवस्थित आकलन था, जिसमें पूरे एटोल को शामिल किया गया। इससे पहले यहां कछुओं की संख्या करीब एक लाख मानी जाती थी।

घनी वनस्पति के कारण कई कछुए सीधे दिखाई नहीं देते। इस चुनौती से निपटने के लिए शोध में उन्नत सांख्यिकीय मॉडलिंग का इस्तेमाल किया गया, ताकि छिपे हुए कछुओं को भी अनुमान में शामिल किया जा सके। इसलिए 1,80,000 से 1,83,000 की संख्या हर कछुए की प्रत्यक्ष गिनती नहीं, बल्कि उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित अनुमान है। सर्वेक्षण की पहुंच और अपनाई गई विधियों के कारण ऐसे अनुमानों में अंतर हो सकता है।

संरक्षण से जुड़ा है प्रजाति का पुनरुत्थान

एल्डाब्रा विशालकाय कछुए का वैज्ञानिक नाम Aldabrachelys gigantea है। यह प्रजाति पश्चिमी हिंद महासागर में स्थित एल्डाब्रा एटोल की मूल निवासी है। उन्नीसवीं सदी में शोषण के कारण इसकी आबादी घटकर एक हजार से भी कम रह गई थी। बाद में संरक्षण के कदमों ने इसके अस्तित्व को सहारा दिया।

एल्डाब्रा एटोल को 1981 में सख्त प्रकृति आरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया और 1982 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के रूप में सूचीबद्ध किया गया। इस क्षेत्र का प्रबंधन सेशेल्स आइलैंड्स फाउंडेशन करता है। नई गणना संरक्षण प्रयासों से जुड़ी सकारात्मक तस्वीर दिखाती है, लेकिन इसे प्रजाति और उसके आवास की सुरक्षा का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता।

आवास पर जलवायु और बाहरी प्रजातियों का दबाव

इन कछुओं का जीवन एटोल के स्थलीय आवास पर निर्भर करता है। जलवायु परिवर्तन से सूखे और समुद्र-स्तर में वृद्धि का खतरा बढ़ सकता है। आवारा बिल्लियां और काले चूहे जैसी आक्रामक प्रजातियां भी आवास तथा कछुओं के अस्तित्व के लिए जोखिम पैदा करती हैं। इसलिए आबादी के साथ-साथ उसके प्राकृतिक परिवेश की नियमित निगरानी भी जरूरी है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • एल्डाब्रा एटोल सेशेल्स का हिस्सा है और पश्चिमी हिंद महासागर में स्थित है।
  • कछुओं का सर्वेक्षण सेशेल्स आइलैंड्स फाउंडेशन और एक्सेटर विश्वविद्यालय ने किया।
  • एल्डाब्रा एटोल 1981 में सख्त प्रकृति आरक्षित क्षेत्र बना और 1982 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल में शामिल हुआ।
  • अध्ययन में 2018 से 2022 तक के आंकड़ों के आधार पर 1,80,000 से 1,83,000 कछुओं का अनुमान लगाया गया।

यह अनुमान एल्डाब्रा में लंबे समय से चल रहे संरक्षण प्रयासों के महत्व को रेखांकित करता है। भविष्य में कछुओं और उनके आवास की निरंतर निगरानी ही इस उपलब्धि को टिकाऊ बनाए रखने में मदद करेगी।

Originally written on October 13, 2026 and last modified on October 13, 2026.

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