नवीकरणीय बिजली उत्पादन पहली बार 100 अरब यूनिट के पार

नवीकरणीय बिजली उत्पादन पहली बार 100 अरब यूनिट के पार

भारत में जुलाई से सितंबर 2026 के दौरान नवीकरणीय स्रोतों से 101 अरब यूनिट बिजली पैदा हुई। बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं को इसमें शामिल नहीं किया गया। किसी एक तिमाही में नवीकरणीय बिजली उत्पादन का 100 अरब यूनिट से अधिक होना पहली बार दर्ज किया गया। इस अवधि में देश का कुल बिजली उत्पादन 536 अरब यूनिट रहा।

सौर और पवन ऊर्जा में तेज बढ़त

दूसरी तिमाही में सौर बिजली उत्पादन सालाना आधार पर 39 प्रतिशत बढ़कर 51 अरब यूनिट पहुंचा। पवन ऊर्जा से 45 अरब यूनिट बिजली बनी, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही से 29 प्रतिशत अधिक थी। पहली बार सौर ऊर्जा का हिस्सा देश के कुल बिजली उत्पादन में 10 प्रतिशत रहा। 30 सितंबर को सौर बिजली उत्पादन 70.5 करोड़ यूनिट के दैनिक रिकॉर्ड पर पहुंचा।

नवीकरणीय ऊर्जा के साथ जलविद्युत और परमाणु ऊर्जा को जोड़ने पर गैर-जीवाश्म स्रोतों से कुल 177 अरब यूनिट बिजली बनी। यह कुल उत्पादन का लगभग 33 प्रतिशत था। पिछली वित्त वर्ष की इसी तिमाही में इन स्रोतों का संयुक्त उत्पादन 163 अरब यूनिट था। बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं से उत्पादन 60 अरब यूनिट रहा, जबकि 2026-27 की पहली तिमाही में यह 39 अरब यूनिट था।

मांग बढ़ी, ग्रिड की चुनौतियां भी बनी रहीं

16 जुलाई 2026 को बिजली की अधिकतम मांग 270 गीगावाट तक पहुंची, जो पिछली वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के शिखर से 18 प्रतिशत अधिक थी। बिजली उत्पादन क्षमता में भी बदलाव दिखा: तिमाही के दौरान नवीकरणीय ऊर्जा की क्षमता लगभग 7 गीगावाट बढ़ी, जबकि ताप विद्युत क्षमता में 0.8 गीगावाट की वृद्धि हुई।

हालांकि, ग्रिड और परिचालन संबंधी बाधाओं के कारण जुलाई और अगस्त में 1.8 अरब यूनिट सौर बिजली का उत्पादन घटाना पड़ा। यह उस अवधि में कुल सौर उत्पादन का लगभग 4.2 प्रतिशत था। यह आंकड़ा बताता है कि नई उत्पादन क्षमता के साथ बिजली को ग्रिड में समायोजित करने और आपूर्ति का प्रबंधन करने की जरूरत भी बढ़ रही है।

कोयले की बड़ी भूमिका कायम

तेजी से बढ़ते स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के बावजूद कोयला और लिग्नाइट बिजली व्यवस्था के प्रमुख स्रोत बने रहे। इनसे तिमाही में 351 अरब यूनिट बिजली बनी, जो कुल उत्पादन का लगभग 66 प्रतिशत थी। कोयला बिजली संयंत्रों की उपयोग दर 68 प्रतिशत रही। 30 सितंबर को बिजली संयंत्रों में कोयले का भंडार 2.1 करोड़ टन था, जो मानक आवश्यकता का 36 प्रतिशत था।

ऊर्जा उत्पादन और क्षमता में अंतर

बिजली की एक इकाई एक किलोवाट-घंटा के बराबर होती है। एक अरब यूनिट में 100 करोड़ किलोवाट-घंटे होते हैं। इसके विपरीत, गीगावाट बिजली उत्पादन क्षमता या मांग मापने की इकाई है; यह किसी अवधि में बनी बिजली की मात्रा नहीं बताता। ये आंकड़े सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर के 12 अक्टूबर 2026 को जारी तिमाही ऊर्जा आकलन में दिए गए।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • सौर और पवन ऊर्जा नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत हैं, क्योंकि इनके प्राकृतिक स्रोत लगातार फिर से उपलब्ध होते हैं।
  • कोयला जीवाश्म ईंधन है, जबकि यहां दिए गए गैर-जीवाश्म उत्पादन में जलविद्युत और परमाणु ऊर्जा भी शामिल हैं।
  • एक किलोवाट-घंटा बिजली की आम तौर पर इस्तेमाल की जाने वाली एक इकाई है।
  • गीगावाट क्षमता या मांग की इकाई है, जबकि अरब यूनिट किसी अवधि में उत्पादित बिजली की मात्रा बताती है।

तिमाही के आंकड़े भारत के बिजली मिश्रण में नवीकरणीय ऊर्जा की बढ़ती हिस्सेदारी दिखाते हैं, लेकिन कोयले पर निर्भरता और ग्रिड संबंधी बाधाएं भी ऊर्जा बदलाव की चुनौतियों को रेखांकित करती हैं।

Originally written on October 13, 2026 and last modified on October 13, 2026.

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