रंगीत नदी में चॉकलेट महाशीर छोड़कर सिक्किम ने बढ़ाया संरक्षण का संदेश
सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने 11 अक्टूबर 2026 को जोरथांग के पास रंगीत नदी में चॉकलेट महाशीर मछलियां छोड़ीं। यह पहल चिरबिरेय नदी उत्सव के दौरान सिक्किम एंगलर्स एसोसिएशन के सहयोग से आयोजित की गई। इसका उद्देश्य स्थानीय मछली प्रजातियों के संरक्षण और नदी पारिस्थितिकी के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।
देशी मछलियों और नदी तंत्र का संरक्षण
चॉकलेट महाशीर का वैज्ञानिक नाम Neolissochilus hexagonolepis है। यह मीठे पानी की मछली हिमालयी क्षेत्र के साथ दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ हिस्सों में पाई जाती है। इसे नदी में छोड़ने की पहल मछली संवर्धन यानी फिश रैंचिंग का उदाहरण है। इस प्रक्रिया में मछलियों की संख्या को सहारा देने के लिए उन्हें प्राकृतिक जलस्रोतों में छोड़ा जाता है।
चिरबिरेय नदी उत्सव में नदी पारिस्थितिकी और मीठे पानी के संसाधनों के संरक्षण से जुड़ी गतिविधियां भी शामिल थीं। सिक्किम एंगलर्स एसोसिएशन ने इस पहल के आयोजन में सहयोग दिया और नदी संरक्षण को बढ़ावा दिया। कार्यक्रम में मंत्रियों, विधायकों और अधिकारियों ने हिस्सा लिया। उत्सव के माध्यम से सिक्किम के प्राकृतिक व सांस्कृतिक आकर्षणों तथा कम चर्चित पर्यटन स्थलों को भी सामने रखा गया।
मत्स्यपालन से आजीविका की संभावनाएं
मुख्यमंत्री ने सिक्किम के मीठे पानी के संसाधनों में मत्स्यपालन और जलीय कृषि की संभावनाओं का उल्लेख किया। उनके अनुसार, उपयुक्त संकर मछली किस्मों का इस्तेमाल मछली पालन, स्थानीय आजीविका और खाद्य सुरक्षा को सहारा दे सकता है। हालांकि, ऐसी गतिविधियों को बढ़ाते समय स्थानीय प्रजातियों और नदी पर्यावरण के संरक्षण पर ध्यान देना भी जरूरी है।
सिक्किम में मत्स्यपालन ग्रामीण परिवारों की आजीविका से जुड़ा क्षेत्र है। 10 जुलाई 2025 को राष्ट्रीय मत्स्य किसान दिवस के अवसर पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, राज्य में 2,000 से अधिक परिवार मछली पालन से जुड़े थे। युवाओं ने इसमें जल पुनर्चक्रण प्रणाली और जैव-फ्लॉक जैसी तकनीकों को भी अपनाया है। जल पुनर्चक्रण प्रणाली में टैंकों का पानी छानकर दोबारा उपयोग किया जाता है, जबकि जैव-फ्लॉक में लाभकारी सूक्ष्मजीव जैविक अपशिष्ट को ऐसे जैव-द्रव्य में बदलते हैं, जो मछलियों के पूरक आहार के रूप में काम आ सकता है।
मत्स्यपालन और संरक्षण से जुड़े तथ्य
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारत में राष्ट्रीय मत्स्य किसान दिवस हर वर्ष 10 जुलाई को मनाया जाता है।
- मत्स्यपालन में मछलियों का प्रजनन, पालन और उत्पादन शामिल है।
- मछली संवर्धन में प्राकृतिक जलस्रोतों में मछलियां छोड़कर उनकी आबादी को सहारा दिया जाता है।
- जल पुनर्चक्रण प्रणाली में मछली पालन के टैंकों का पानी साफ करके फिर से उपयोग किया जाता है।
रंगीत नदी में चॉकलेट महाशीर छोड़ने की पहल संरक्षण और आजीविका के बीच संतुलन की जरूरत रेखांकित करती है। सिक्किम के लिए नदी संसाधनों का सतत उपयोग स्थानीय मत्स्यपालन और जैव विविधता, दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण है।