सेना की AASHVAST लैब से ड्रोन सुरक्षा को नई मजबूती
भारतीय सेना ने ड्रोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रक्षा प्रणालियों की सुरक्षा जांच के लिए नई सॉफ्टवेयर विश्लेषण एवं सत्यापन प्रयोगशाला AASHVAST स्थापित की है। यह सुविधा नई दिल्ली स्थित डायरेक्टरेट जनरल ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियरिंग (DG EME) मुख्यालय में बनाई गई है और इसका उद्देश्य सैन्य उपकरणों में छिपे सॉफ्टवेयर खतरे, अनधिकृत घटक और सुरक्षा कमजोरियों की पहचान करना है।
AASHVAST क्या है और यह क्यों अहम है
AASHVAST का पूरा नाम Assessment and Analysis of Electronic Systems Hardware for Vulnerabilities and Security Threats है। यह लैब खास तौर पर ड्रोन फर्मवेयर और उनसे जुड़ी इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों की जांच करती है। इसमें बैकडोर, एम्बेडेड क्रेडेंशियल, बदली हुई फ्लाइट लिमिट, छिपे हुए रिमोट-एक्सेस टूल और गुप्त कमांड पाथ जैसी खामियों को खोजा जाता है।
आधुनिक युद्ध और निगरानी में ड्रोन की भूमिका लगातार बढ़ रही है, इसलिए उनकी साइबर और इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो गई है। किसी भी अनधिकृत कोड या संदिग्ध हार्डवेयर घटक से मिशन की गोपनीयता, नियंत्रण और विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है।
लैब की तकनीकी विशेषताएं
AASHVAST को पूरी तरह air-gapped प्रणाली के रूप में विकसित किया गया है, यानी यह किसी बाहरी नेटवर्क या इंटरनेट से जुड़ी नहीं है। यह पूरी तरह ऑफलाइन काम करती है और read-only वातावरण में संचालित होती है, जिससे परीक्षण के दौरान रक्षा हार्डवेयर में बाहरी बदलाव नहीं किए जा सकते और उस पर डेटा लिखा भी नहीं जा सकता।
यह प्रयोगशाला यह भी जांचती है कि क्या रक्षा प्रणालियां केवल निर्माता द्वारा स्वीकृत अपडेट ही स्वीकार करती हैं। इसके अलावा, यह ड्रोन के GPS spoofing और jamming के प्रति व्यवहार का आकलन कर सकती है। ये दोनों इलेक्ट्रॉनिक युद्ध की ऐसी तकनीकें हैं, जिनका उपयोग नेविगेशन सिग्नल को बाधित करने के लिए किया जाता है।
DG EME और स्वदेशी रक्षा पारिस्थितिकी का महत्व
DG EME भारतीय सेना की वह तकनीकी संस्था है, जो इलेक्ट्रॉनिक्स और मैकेनिकल इंजीनियरिंग से जुड़े समर्थन, मरम्मत, रखरखाव और तकनीकी मूल्यांकन का काम करती है। AASHVAST जैसी सुविधा सेना को केवल उपकरणों की कार्यक्षमता नहीं, बल्कि उनकी डिजिटल विश्वसनीयता और आपूर्ति-श्रृंखला सुरक्षा की जांच करने में भी मदद करेगी।
यह सॉफ्टवेयर विश्लेषण और सत्यापन सूट QuickPay Tech ने Rajib Roy के निर्देशन में विकसित किया है। इसका उद्घाटन 14 अगस्त 2026 को दिल्ली कैंट में थल सेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ ने किया। ऐसी पहलें रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और स्वदेशी परीक्षण क्षमता को मजबूत करती हैं, खासकर तब जब सैन्य प्रणालियों में हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर दोनों स्तरों पर सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी हो गया है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- Air-gapped system वह प्रणाली होती है जो इंटरनेट या किसी बाहरी नेटवर्क से पूरी तरह अलग रखी जाती है।
- Firmware वह एम्बेडेड सॉफ्टवेयर है जो किसी डिवाइस के हार्डवेयर कार्यों को नियंत्रित करता है।
- GPS spoofing में झूठे सिग्नल भेजकर नेविगेशन को भ्रमित किया जाता है, जबकि jamming में सिग्नल बाधित किए जाते हैं।
- DG EME भारतीय सेना की इलेक्ट्रॉनिक्स और मैकेनिकल इंजीनियरिंग से जुड़ी तकनीकी शाखा है।
ड्रोन सुरक्षा अब केवल उड़ान क्षमता का नहीं, बल्कि सॉफ्टवेयर सत्यता, हार्डवेयर अखंडता और नेटवर्क-रहित परीक्षण व्यवस्था का भी विषय बन चुकी है। AASHVAST लैब इसी दिशा में भारतीय सेना की तकनीकी तैयारी को और मजबूत करती है।