सुमात्राई ओरंगुटान की वापसी से भारत-इंडोनेशिया वन्यजीव सहयोग मजबूत
भारत ने 19 अक्टूबर 2026 को बचाए गए एक सुमात्राई शिशु ओरंगुटान को इंडोनेशिया वापस भेज दिया। नवंबर 2024 में भारत में बचाए जाने के बाद उसे गुजरात में पशु-चिकित्सा देखभाल और उपयुक्त आवास उपलब्ध कराया गया। वापसी की प्रक्रिया में दोनों देशों की वन्यजीव संरक्षण एजेंसियों और सीआईटीईएस प्रबंधन प्राधिकरणों ने सहयोग किया।
बचाव से स्वदेश वापसी तक
ओरंगुटान को इंडोनेशिया के मेदान स्थित कुआलानामु हवाई अड्डे पर पहुंचाया गया। वहां इंडोनेशिया के वानिकी मंत्रालय ने स्वागत कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें भारत के महावाणिज्य दूतावास के अधिकारी भी शामिल हुए। भारत सरकार ने उसकी देखभाल और रखरखाव पर हुए पुराने खर्च की वसूली नहीं करने का निर्णय लिया। इससे वन्यजीवों की सुरक्षित वापसी के लिए द्विपक्षीय सहयोग और मानवीय दृष्टिकोण का महत्व सामने आता है।
वन्यजीवों को उनके मूल देश लौटाने की प्रक्रिया में केवल परिवहन ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य जांच, सुरक्षित आवास, प्रजाति की पहचान और आवश्यक अनुमति जैसी बातें भी शामिल होती हैं। इस मामले में भारत में बचाव के बाद जानवर को देखभाल दी गई और फिर संबंधित अधिकारियों के समन्वय से उसकी वापसी पूरी हुई।
सीआईटीईएस और वन्यजीव व्यापार नियंत्रण
वन्य जीवों और वनस्पतियों की संकटग्रस्त प्रजातियों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर अभिसमय को सीआईटीईएस कहा जाता है। इसे 1973 में अपनाया गया और यह 1975 से लागू है। इसका उद्देश्य सूचीबद्ध वन्य प्रजातियों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार को नियंत्रित करना है। इसके लिए प्रजातियों को अलग-अलग परिशिष्टों में रखा जाता है और व्यापार के लिए अनुमति-पत्रों की व्यवस्था की गई है।
सीआईटीईएस के परिशिष्ट एक में वे प्रजातियां शामिल होती हैं जिन पर विलुप्ति का खतरा है। इनके अंतरराष्ट्रीय व्यावसायिक व्यापार पर सामान्यतः रोक रहती है, हालांकि कुछ सीमित अपवाद लागू हो सकते हैं। भारत और इंडोनेशिया के प्रबंधन प्राधिकरणों की भागीदारी इस बात को रेखांकित करती है कि सीमा-पार वन्यजीव मामलों में अंतरराष्ट्रीय नियमों और सरकारी समन्वय की अहम भूमिका है।
ओडिशा में पांच अन्य शिशु ओरंगुटान
सितंबर 2026 में ओडिशा के बालासोर जिले में मां से बिछड़े पांच शिशु ओरंगुटान मिले थे। उनकी उम्र लगभग डेढ़ वर्ष बताई गई है और फिलहाल भुवनेश्वर के नंदनकानन प्राणी उद्यान में उनकी देखभाल की जा रही है। प्रारंभिक आकलन में उनका मूल सुमात्रा का माना गया है, लेकिन प्रजाति की पुष्टि और वापसी से जुड़ी औपचारिकताएं अभी पूरी होनी हैं।
इंडोनेशिया के वानिकी मंत्रालय ने जकार्ता स्थित भारतीय दूतावास के माध्यम से भारत सरकार से संपर्क किया है। इन पांच जानवरों की वापसी में मदद के लिए इंडोनेशियाई वन्यजीव विशेषज्ञों के नवंबर 2026 में भारत आने का कार्यक्रम है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- सीआईटीईएस को 1973 में अपनाया गया और यह 1975 में लागू हुआ।
- सीआईटीईएस का परिशिष्ट एक विलुप्ति के खतरे वाली प्रजातियों से संबंधित है।
- सुमात्राई ओरंगुटान का वैज्ञानिक नाम Pongo abelii है।
- नंदनकानन प्राणी उद्यान भुवनेश्वर, ओडिशा में स्थित है।
सुमात्राई ओरंगुटान की वापसी और ओडिशा में मिले पांच शिशुओं की देखभाल, दोनों मामले संकटग्रस्त वन्यजीवों के संरक्षण में अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत को दर्शाते हैं।