गोयला डेयरी में बायोगैस संयंत्र से दिल्ली के कचरा प्रबंधन को बल

गोयला डेयरी में बायोगैस संयंत्र से दिल्ली के कचरा प्रबंधन को बल

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 19 अक्टूबर 2026 को सेवा संकल्प अभियान के तहत गोयला डेयरी में प्रतिदिन 200 टन कचरा संसाधित करने की क्षमता वाले बायोगैस संयंत्र का उद्घाटन किया। इस परियोजना को 2018 में मंजूरी मिली थी। संयंत्र का उद्देश्य डेयरी क्षेत्रों में जमा गोबर और अन्य जैविक कचरे को उपयोगी ऊर्जा तथा जैविक खाद में बदलना है।

डेयरी कचरे के निस्तारण पर जोर

दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) डेयरी कॉलोनियों में उत्पन्न गोबर और जैव-अवक्रमणशील कचरे के प्रबंधन के लिए बायोगैस संयंत्र विकसित कर रहा है। शहर में प्रतिदिन करीब 1,500 टन गोबर उत्पन्न होने का अनुमान है। इसका एक हिस्सा खुले में पड़ा रह सकता है या नालों के जरिए यमुना तक पहुंच सकता है। संयंत्रों के माध्यम से इस कचरे का स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण कर प्रदूषण का दबाव घटाने और संसाधनों का दोबारा उपयोग करने की कोशिश है।

नांगली संयंत्र का अनुभव

दिल्ली का पहला बड़े स्तर का 200 टन प्रतिदिन क्षमता वाला बायोगैस संयंत्र सितंबर 2025 में पश्चिमी दिल्ली के नजफगढ़ स्थित नांगली डेयरी में शुरू हुआ था। यह 2.72 एकड़ में बना है और इसकी लागत लगभग 16 करोड़ रुपये बताई गई। परियोजना को आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के शहरी विकास कोष से आंशिक वित्तपोषण मिला। यह नांगली और ककरोला डेयरियों से आने वाले गोबर तथा जैविक कचरे को संसाधित करने के लिए बनाया गया है। इन दोनों डेयरियों से प्रतिदिन लगभग 200 टन गोबर निकलता है।

नांगली संयंत्र से रोज करीब 14,000 घन मीटर कच्ची बायोगैस और 5.6 टन शुद्ध संपीड़ित जैव-गैस बनने की अपेक्षा है। शुद्ध गैस इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड को दी जानी है। प्रसंस्करण के बाद बचा जैविक पदार्थ खाद के रूप में उपयोग किया जा सकता है। इससे कचरे को केवल हटाने के बजाय ऊर्जा और कृषि उपयोग के उत्पादों में बदलने का अवसर मिलता है।

बायोगैस कैसे बनती है और आगे की योजना

बायोगैस तब बनती है जब सूक्ष्मजीव ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में गोबर जैसे जैविक पदार्थों को विघटित करते हैं। इस प्रक्रिया को अवायवीय पाचन कहते हैं। कच्ची बायोगैस में मुख्यतः मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड होती हैं। शुद्धिकरण से कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य अशुद्धियां हटाई जाती हैं, जिसके बाद गैस को संपीड़ित कर वाहन ईंधन या गैस वितरण व्यवस्था में उपयोग किया जा सकता है।

एमसीडी ने पिछले 18 महीनों में 200 टन प्रतिदिन क्षमता वाले तीन बायोगैस संयंत्र स्थापित किए हैं और छह अन्य बनाने की योजना है। निगम की व्यापक योजना में 10 बायोगैस संयंत्र तथा नौ अपशिष्ट जल शोधन सुविधाएं शामिल हैं। डेयरी कॉलोनियों की जल निकासी व्यवस्था में सुधार भी प्रस्तावित है, ताकि अपशिष्ट यमुना में न पहुंचे।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • अवायवीय पाचन में जैविक पदार्थ ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में विघटित होते हैं।
  • बायोगैस में मीथेन होती है, जिसे शुद्ध और संपीड़ित करके ईंधन के रूप में उपयोग किया जा सकता है।
  • नांगली डेयरी का संयंत्र प्रतिदिन 200 टन कच्चा पदार्थ संसाधित करने की क्षमता रखता है।
  • शहरी विकास कोष का प्रशासन आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय करता है।

गोयला डेयरी संयंत्र दिल्ली में डेयरी कचरे को नियंत्रित करने और उससे ऊर्जा बनाने की पहल का हिस्सा है। इसकी प्रभावशीलता नियमित संचालन, कचरे के उचित संग्रह और तैयार गैस के उपयोग पर निर्भर करेगी।

Originally written on October 19, 2026 and last modified on October 19, 2026.

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