सी.के. कोकाटे का निधन: औषधि शिक्षा और सुरक्षित दवा नीति में योगदान

सी.के. कोकाटे का निधन: औषधि शिक्षा और सुरक्षित दवा नीति में योगदान

प्रख्यात औषधि वैज्ञानिक और शिक्षाविद् प्रोफेसर चंद्रकांत किशनराव कोकाटे का 2 नवंबर 2026 को 79 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे भारत में विश्वविद्यालय के कुलपति बनने वाले पहले फार्मासिस्ट थे। औषधि शिक्षा, शोध और अविवेकपूर्ण निश्चित-मात्रा संयोजन दवाओं की समीक्षा में उनका विशेष योगदान रहा।

शिक्षा और शैक्षणिक जीवन

कोकाटे ने 1967 में नागपुर विश्वविद्यालय से औषधि विज्ञान में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। 1969 में सागर विश्वविद्यालय से स्वर्ण पदक के साथ स्नातकोत्तर उपाधि हासिल करने के बाद उन्होंने 1972 में पीएचडी पूरी की। आगे उन्होंने जर्मनी में शोधोत्तर अनुसंधान किया और अतिथि वैज्ञानिक के रूप में भी काम किया।

उन्होंने काकतीय विश्वविद्यालय के कुलपति और केएलई विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति के रूप में सेवाएँ दीं। आचार्य नागार्जुन विश्वविद्यालय में भी उन्होंने अतिरिक्त प्रभार संभाला। वे भारतीय फार्मेसी परिषद के अध्यक्ष रहे। पाठ्यपुस्तकों के लेखन, शोध-पत्रों के प्रकाशन और स्नातकोत्तर तथा शोधार्थी विद्यार्थियों के मार्गदर्शन के जरिए उन्होंने औषधि विज्ञान के अकादमिक विकास में योगदान दिया।

निश्चित-मात्रा संयोजन दवाओं पर काम

कोकाटे ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति की अध्यक्षता की। समिति ने निश्चित-मात्रा संयोजन दवाओं के लिए दिशा-निर्देश तैयार किए। इन दवाओं में दो या अधिक सक्रिय औषधीय घटक पहले से तय अनुपात में एक ही उत्पाद में मिलाए जाते हैं। कोकाटे अविवेकपूर्ण संयोजनों पर रोक लगाने की सिफारिशों से जुड़े रहे।

ऐसे संयोजन मरीज के लिए उपयोगी हो सकते हैं, लेकिन हर मिश्रण का औचित्य और सुरक्षा महत्त्वपूर्ण है। अलग-अलग घटकों की मात्रा पहले से तय होने के कारण चिकित्सक मरीज की जरूरत या किसी विशेष दुष्प्रभाव के अनुसार एक घटक की खुराक स्वतंत्र रूप से बदलने में कम सक्षम होते हैं। इसलिए दवाओं के संयोजन का वैज्ञानिक आधार और उचित उपयोग जाँचना जरूरी है।

औषधि संयोजनों से जुड़े जरूरी भेद

निश्चित-मात्रा संयोजन और एक साथ ली जाने वाली अलग-अलग गोलियों के बीच अंतर समझना उपयोगी है। अलग-अलग दवाओं को मरीज की जरूरत के अनुसार चुना और समायोजित किया जा सकता है, जबकि निश्चित-मात्रा उत्पाद में घटकों का अनुपात तय रहता है। चार या उससे अधिक सक्रिय घटकों वाला विशेष निश्चित-मात्रा संयोजन पॉलीपिल कहलाता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • निश्चित-मात्रा संयोजन दवा में सक्रिय घटक एक तय अनुपात में शामिल होते हैं।
  • पॉलीपिल में चार या उससे अधिक अलग सक्रिय औषधीय घटक होते हैं।
  • निश्चित-मात्रा संयोजन में किसी एक घटक की खुराक को अलग से बदलने की गुंजाइश सीमित रहती है।
  • भारतीय फार्मेसी परिषद देश में फार्मेसी शिक्षा और पेशे से जुड़ी प्रमुख वैधानिक संस्था है।

कोकाटे का कार्य औषधि शिक्षा और दवाओं के विवेकपूर्ण उपयोग, दोनों क्षेत्रों में याद किया जाएगा। विशेष रूप से, सुरक्षित दवा नीति पर उनकी विशेषज्ञ भूमिका सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए महत्त्वपूर्ण रही।

Originally written on November 3, 2026 and last modified on November 3, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *