वेद राही: डोगरी साहित्य और भारतीय सिनेमा की एक विशिष्ट आवाज
डोगरी और हिंदी के लेखक, पटकथा-लेखक तथा फिल्मकार वेद राही का 1 नवंबर 2026 को महाराष्ट्र के ठाणे जिले स्थित उनके आवास पर 93 वर्ष की आयु में निधन हो गया। जम्मू में जन्मे राही ने साहित्य और सिनेमा, दोनों माध्यमों में उल्लेखनीय योगदान दिया।
डोगरी साहित्य को राष्ट्रीय पहचान
वेद राही का जन्म 22 मई 1933 को जम्मू में हुआ था। उनके पिता लाला मुल्क राज सराफ ने 1924 में तत्कालीन जम्मू-कश्मीर रियासत का पहला समाचारपत्र स्थापित किया था। राही की डोगरी लघुकथा-संग्रह आले को 1983 में साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। यह सम्मान डोगरी साहित्य को व्यापक पहचान दिलाने में उनके योगदान का महत्वपूर्ण पड़ाव था।
राही को महाराष्ट्र गौरव पुरस्कार, महापंडित राहुल सांकृत्यायन पुरस्कार और कुसुमाग्रज राष्ट्रीय साहित्य पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। उनकी रचनाओं का भाषाई दायरा डोगरी तक सीमित नहीं रहा। उनकी कृति लाल देद के सिंधी में दो अनुवाद हुए, जबकि आले का कश्मीरी रूप लखाकर यिन वापस नाम से प्रकाशित हुआ। इन अनुवादों को भी पुरस्कार मिले।
टेलीविजन और फिल्मों में योगदान
लेखन के साथ राही ने फिल्म और टेलीविजन की दुनिया में भी सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने दूरदर्शन धारावाहिक गुल गुलशन गुलफाम का निर्देशन किया। कश्मीर की पृष्ठभूमि पर बना यह धारावाहिक एक कश्मीरी परिवार के जीवन को दिखाने वाले शुरुआती धारावाहिकों में शामिल था और इसके 45 एपिसोड प्रसारित हुए।
राही ने क्रांतिकारी विनायक दामोदर सावरकर पर आधारित 2001 की हिंदी फिल्म वीर सावरकर का निर्देशन किया। उनके फिल्मी काम में करीब 25 हिंदी फीचर फिल्मों की कहानियां, पटकथाएं और संवाद शामिल थे। उन्होंने पांच फिल्मों का निर्देशन भी किया। साहित्य अकादमी ने उनके निधन पर शोक जताते हुए भारतीय साहित्य और आधुनिक डोगरी साहित्य में उनके योगदान को याद किया।
डोगरी भाषा का महत्व
वेद राही का काम डोगरी भाषा को साहित्य, अनुवाद और दृश्य माध्यमों से व्यापक पाठक-दर्शक वर्ग तक ले गया। डोगरी की संवैधानिक मान्यता और उसकी लिपि से जुड़ी जानकारी भी इस भाषा की सांस्कृतिक विरासत को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- डोगरी को 92वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 के माध्यम से संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया।
- इसी संशोधन से बोडो, मैथिली और संताली को भी आठवीं अनुसूची में स्थान मिला।
- डोगरी ऐतिहासिक रूप से टाकरी, विशेषकर डोगरा रूप, में लिखी जाती थी; वर्तमान में देवनागरी इसकी प्रमुख मानक लिपि है।
- वेद राही के धारावाहिक गुल गुलशन गुलफाम के 45 एपिसोड प्रसारित हुए थे।
वेद राही की साहित्यिक रचनाएं और फिल्मी काम डोगरी भाषा तथा जम्मू-कश्मीर की सांस्कृतिक पहचान को व्यापक मंच देने वाली उनकी बहुआयामी विरासत के रूप में याद किए जाएंगे।