मेथिल राधाकृष्णन को केरल का सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान

मेथिल राधाकृष्णन को केरल का सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान

लेखक मेथिल राधाकृष्णन को केरल के सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान 34वें एझुथाचन पुरस्कार के लिए चुना गया है। सांस्कृतिक मामलों के मंत्री पी.सी. विष्णुनाध ने 1 नवंबर 2026 को तिरुवनंतपुरम में इसकी घोषणा की। यह दिन केरल राज्य के गठन की 70वीं वर्षगांठ भी था।

साहित्यिक योगदान के लिए मिला सम्मान

पुरस्कार में पांच लाख रुपये, प्रशस्ति-पत्र और स्मृति-फलक दिया जाएगा। कवि के.जी. शंकर पिल्लई की अध्यक्षता वाली निर्णायक समिति ने सर्वसम्मति से राधाकृष्णन का चयन किया। समिति में कल्पट्टा नारायणन, के. सच्चिदानंदन और सारा जोसेफ सदस्य थे, जबकि एम.पी. सुरेंद्रन ने सदस्य-सचिव की भूमिका निभाई। समिति ने उनके सौंदर्यबोध और मलयालम साहित्य में नई संवेदना विकसित करने में बौद्धिक योगदान को चयन का आधार बताया।

राधाकृष्णन की रचनाओं में विज्ञान, दर्शन और मनोविज्ञान के विचार साहित्यिक रूप में सामने आते हैं। उन्होंने उपन्यास, कहानी, कविता और विज्ञान-विषयक लेख लिखे हैं। उनके उपन्यासों में ‘सूर्यवंशम’, ‘हिचकॉकिंते इटापेटल’ और ‘लैंगिकतायेक्कुरिचु ओरु उपन्यासम’ शामिल हैं। कहानी-संग्रहों में ‘संगीतम ओरु समयकलायानु’ और ‘कयारिंते अट्टम’ उल्लेखनीय हैं। उनके निबंधों में पारिस्थितिकी, मानव-विज्ञान, इतिहास और कीट-विज्ञान जैसे विषयों पर विचार मिलता है।

लेखन में विज्ञान और विचार का मेल

राधाकृष्णन का साहित्यिक संसार केवल कथा-विन्यास तक सीमित नहीं है। उनकी रचनाओं में अलग-अलग ज्ञान-क्षेत्रों के विचारों को साहित्यिक दृष्टि से जोड़ने का प्रयास दिखाई देता है। निर्णायक समिति ने इसी व्यापक दृष्टि को मलयालम साहित्य में नई संवेदना के निर्माण से जोड़ा। लेखन पर मुख्य रूप से ध्यान देने से पहले उन्होंने स्वतंत्र पत्रकार के रूप में काम करते हुए आठ वर्ष तक कीटों के व्यवहार पर शोध किया था।

समारोह कोझिकोड में होगा

पुरस्कार प्रदान करने का समारोह नवंबर के उत्तरार्ध में कोझिकोड में आयोजित किया जाना है। इसकी अंतिम तारीख मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन और पुरस्कार प्राप्तकर्ता की उपलब्धता के अनुसार तय की जाएगी। इस सम्मान के माध्यम से केरल की साहित्यिक परंपरा और समकालीन मलयालम लेखन में योगदान को मान्यता दी जाती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • एझुथाचन पुरस्कार का नाम मलयालम भाषा के जनक माने जाने वाले थुंचत्तु एझुथाचन के नाम पर रखा गया है।
  • एझुथाचन पुरस्कार केरल का सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान है।
  • यह पुरस्कार केरल सरकार की संस्था केरल साहित्य अकादमी प्रदान करती है।
  • मेथिल राधाकृष्णन ने लेखन पर मुख्य रूप से ध्यान देने से पहले आठ वर्ष तक कीटों के व्यवहार पर शोध किया था।

राधाकृष्णन का चयन मलयालम साहित्य में उनकी बहुविषयक दृष्टि और लंबे लेखकीय योगदान को रेखांकित करता है। पुरस्कार समारोह नवंबर में कोझिकोड में होगा।

Originally written on November 2, 2026 and last modified on November 2, 2026.

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