ग्रामीण तकनीकी शिक्षा के लिए प्रशांत चौधरी को रोहिणी नैयर पुरस्कार

ग्रामीण तकनीकी शिक्षा के लिए प्रशांत चौधरी को रोहिणी नैयर पुरस्कार

देहरादून के तकनीकी शिक्षा उद्यमी प्रशांत चौधरी को ग्रामीण विकास में उल्लेखनीय योगदान के लिए पाँचवाँ रोहिणी नैयर पुरस्कार दिया गया है। नीति आयोग के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कांत ने 31 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में उन्हें यह सम्मान प्रदान किया। पुरस्कार में 10 लाख रुपये, प्रशस्ति-पत्र और ट्रॉफी शामिल हैं।

ग्रामीण विकास में योगदान का सम्मान

यह पुरस्कार 2022 में नैयर फाउंडेशन ने विद्वान और प्रशासक डॉ. रोहिणी नैयर की स्मृति में शुरू किया था। इसके माध्यम से 40 वर्ष से कम आयु के ऐसे लोगों को सम्मानित किया जाता है, जिनका काम ग्रामीण विकास में उल्लेखनीय योगदान देता है। नागरिक समाज, शिक्षा जगत और सरकार से जुड़े सदस्यों वाली निर्णायक समिति ने इस वर्ष चौधरी का चयन किया।

चौधरी का काम इस बात पर केंद्रित है कि ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों तक तकनीकी सीखने के अवसर पहुँचाने के लिए महंगे उपकरण और बड़े संस्थागत ढाँचे हमेशा जरूरी नहीं होते। स्थानीय भाषा और परिवार के पास उपलब्ध साधनों के सहारे भी विद्यार्थियों को उपयोगी तकनीकी कौशल सिखाया जा सकता है।

गाँव के विद्यार्थियों से शुरू हुई पहल

मेरठ के पास एक गाँव में पले-बढ़े चौधरी उस गाँव से भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान में प्रवेश पाने वाले पहले व्यक्ति बने। उन्होंने 2010 में आईआईटी दिल्ली से पढ़ाई पूरी की और इसके बाद गाँवों के विद्यार्थियों को तकनीक सिखाना शुरू किया। इस काम को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने कोडयोगी फाउंडेशन की स्थापना की। वर्ष 2020 में उन्होंने इस पहल का विस्तार शुरू किया।

चौधरी का अनुभव ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा तक पहुँच के सवाल को भी रेखांकित करता है। कई जगह कंप्यूटर, प्रयोगशाला, अंग्रेजी में पढ़ाई या प्रशिक्षित शिक्षकों की उपलब्धता सीमित हो सकती है। ऐसे में सीखने के साधनों को स्थानीय जरूरतों के अनुरूप बनाना विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ाने में मददगार हो सकता है।

परिवार के स्मार्टफोन से कृत्रिम बुद्धिमत्ता की सीख

कोडयोगी का 30 दिन का व्यावहारिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता कार्यक्रम विद्यार्थियों को एआई उपकरणों का उपयोग करना सिखाता है। वे इनका इस्तेमाल पढ़ाई और परिवार से जुड़े कामों में करना सीखते हैं। कार्यक्रम परिवार के स्मार्टफोन पर और भारतीय भाषाओं में चलता है। इसके लिए कंप्यूटर, प्रयोगशाला, अंग्रेजी या प्रशिक्षित शिक्षक अनिवार्य नहीं हैं।

पिछले तीन वर्षों में यह मॉडल नौ राज्यों के 120 जिलों में 3.5 लाख से अधिक विद्यार्थियों तक पहुँचा है। इसका विस्तार बताता है कि तकनीकी शिक्षा को व्यापक बनाने में सरल पहुँच और स्थानीय भाषा की भूमिका महत्वपूर्ण है। ग्रामीण विकास की पहलें एक जैसी नहीं हो सकतीं, क्योंकि अलग-अलग क्षेत्रों की जरूरतें, भाषाएँ और सामाजिक परिस्थितियाँ भिन्न होती हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • रोहिणी नैयर पुरस्कार की शुरुआत 2022 में नैयर फाउंडेशन ने की थी।
  • यह पुरस्कार 40 वर्ष से कम आयु के ग्रामीण विकास योगदानकर्ताओं को दिया जाता है।
  • प्रशांत चौधरी ने 2010 में आईआईटी दिल्ली से पढ़ाई पूरी की और 2020 में अपनी पहल का विस्तार शुरू किया।
  • कोडयोगी का कार्यक्रम नौ राज्यों के 120 जिलों में 3.5 लाख से अधिक विद्यार्थियों तक पहुँचा है।

प्रशांत चौधरी को मिला यह सम्मान ग्रामीण विद्यार्थियों के लिए तकनीकी शिक्षा को अधिक सुलभ बनाने के प्रयासों की पहचान है।

Originally written on November 2, 2026 and last modified on November 2, 2026.

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