सिक्किम का याक महोत्सव: संरक्षण और पर्वतीय आजीविका पर जोर

सिक्किम का याक महोत्सव: संरक्षण और पर्वतीय आजीविका पर जोर

सिक्किम के भारत-चीन सीमा के निकट स्थित ग्नाथांग घाटी में 28 अक्टूबर 2026 से राज्य का पहला हिमालयी याक महोत्सव आयोजित हुआ। पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवा विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य याक संरक्षण को बढ़ावा देना, पशुपालकों की आजीविका को सहारा देना और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पर्यटन को प्रोत्साहित करना था।

याक महोत्सव में संरक्षण और तकनीक पर चर्चा

महोत्सव में लगभग 400 से 500 याक शामिल हुए। प्रदर्शनी स्टॉलों पर याक से बने उत्पादों के साथ इनके प्रजनन से जुड़ी तकनीकों की जानकारी भी दी गई। इनमें कृत्रिम गर्भाधान की प्रगति प्रमुख रही। इस विधि में प्राकृतिक संयोग के बिना मादा पशु में वीर्य प्रविष्ट कराया जाता है। पशुधन प्रबंधन में इसका उपयोग प्रजनन कार्यक्रमों के तहत किया जा सकता है।

कार्यक्रम में याकों की घटती संख्या, चरागाहों का सिकुड़ना और मौसम की अनिश्चितता जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। युवा पीढ़ी में याक पालन के प्रति घटती रुचि भी इस पारंपरिक पेशे के सामने चुनौती है। ऐसे में महोत्सव का महत्व केवल पर्यटन तक सीमित नहीं है; यह पशुपालकों की समस्याओं और संरक्षण की जरूरतों को सामने लाने का मंच भी बना।

सिक्किमी याक की नस्लीय पहचान

सिक्किमी याक को राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो ने एक विशिष्ट नस्ल के रूप में मान्यता दी है। यह ब्यूरो भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का संस्थान है और हरियाणा के करनाल में स्थित है। भारत में पशुधन और कुक्कुट की आनुवंशिक संसाधन विविधता का दस्तावेजीकरण तथा विशेषताओं का अध्ययन इसके प्रमुख कार्यों में शामिल है। किसी नस्ल की अलग पहचान उसके विशिष्ट गुणों और आबादी से जुड़े अभिलेखों के आधार पर की जाती है। सिक्किम में याकों की अनुमानित संख्या 5,312 है।

घने बालों वाला घरेलू याक बोविडी कुल का सदस्य है और ठंडे, ऊंचाई वाले वातावरण के अनुकूल होता है। उसकी शारीरिक बनावट ठंड से बचाव में मदद करती है, जबकि अल्पाइन वनस्पति पर चरने की क्षमता उसे हिमालयी चरवाहा अर्थव्यवस्था के लिए उपयोगी बनाती है। याक से दूध, मांस और रेशा मिलता है; दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में इसका उपयोग परिवहन के लिए भी होता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • घरेलू याक बोविडी पशु परिवार का सदस्य है।
  • राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो हरियाणा के करनाल में स्थित है और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद से जुड़ा है।
  • सिक्किमी याक को राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो ने विशिष्ट नस्ल के रूप में मान्यता दी है।
  • कृत्रिम गर्भाधान में प्राकृतिक संयोग के बिना मादा पशु में वीर्य प्रविष्ट कराया जाता है।

महोत्सव के आयोजकों को उम्मीद है कि यह आयोजन वार्षिक रूप लेगा। याक को क्षेत्रीय पहचान देने के लिए ‘हिमालयी स्तंभ’ या ‘याक स्तंभ’ स्थापित करने का सुझाव भी सामने आया।

Originally written on October 29, 2026 and last modified on October 29, 2026.

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