मसाई पठार पर प्रवासी पक्षियों की आमद, संरक्षण का महत्व फिर चर्चा में

मसाई पठार पर प्रवासी पक्षियों की आमद, संरक्षण का महत्व फिर चर्चा में

महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले में सर्दियों की शुरुआत के साथ प्रवासी पक्षियों का आगमन शुरू हो गया है। अक्टूबर 2026 के अंतिम सप्ताह में मसाई पठार पर हल्का शिकरा और यूरोपीय रोलर सहित कई प्रजातियां देखी गईं। पक्षियों की यह मौसमी आवाजाही क्षेत्र के घासस्थलों और आर्द्रभूमियों के महत्व को रेखांकित करती है।

कई हजार किलोमीटर की यात्रा के बाद पहुंचे पक्षी

यूरोपीय रोलर को 26 अक्टूबर को कोल्हापुर जिले की करवीर तहसील के माहे क्षेत्र की पहाड़ियों में देखा गया। स्थानीय पक्षीप्रेमी संग्राम पाटील ने इसकी पहचान की। इस इलाके में इस प्रजाति का यह पहला दर्ज अवलोकन था। इसके लगभग दो दिन बाद मसाई पठार पर हल्का शिकरा, मोंटागू का शिकरा और कमतर खेरमूत भी दिखाई दिए।

ये पक्षी मध्य एशिया, रूस और कजाखस्तान जैसे क्षेत्रों से हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर भारत आते हैं। कुछ प्रजातियां यूरोप और अफ्रीका के बीच भी प्रवास करती हैं। कोल्हापुर में अक्टूबर और नवंबर के दौरान अनेक प्रवासी पक्षियों के दिखने की संभावना रहती है। हल्का शिकरा और मोंटागू का शिकरा शिकारी पक्षी हैं, जबकि यूरोपीय रोलर मुख्य रूप से कीट खाता है।

आवास और मौसम का पक्षियों की संख्या पर असर

मसाई पठार के घासस्थल और आसपास की आर्द्रभूमियां पक्षियों को भोजन और आवास उपलब्ध कराती हैं। जलस्रोत, वनस्पति और कीटों की उपलब्धता इन प्रवासी प्रजातियों के लिए अहम है। इस वर्ष पक्षीप्रेमियों ने पिछले वर्षों की तुलना में कम प्रवासी पक्षी देखे हैं। इस कमी को एल नीनो से जुड़े बदलते मौसम के प्रभावों से जोड़ा गया है।

कम वर्षा से वनस्पति और कीटों की संख्या प्रभावित हो सकती है, जबकि सिकुड़ते जलस्रोत पक्षियों के लिए पानी और भोजन की उपलब्धता घटा सकते हैं। हालांकि, देखे गए पक्षियों की कम संख्या का कारण किसी एक कारक को निश्चित रूप से नहीं माना जा सकता।

मसाई पठार का संरक्षण दर्जा

मसाई पठार को 2 दिसंबर 2022 को संरक्षण रिजर्व घोषित किया गया था। वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 36ए के तहत राज्य सरकारें स्थानीय समुदायों से परामर्श के बाद सरकारी स्वामित्व वाले क्षेत्रों को संरक्षण रिजर्व घोषित कर सकती हैं। इस दर्जे का उद्देश्य क्षेत्र की पारिस्थितिकी की रक्षा करना और नुकसानदेह मानवीय गतिविधियों पर नियंत्रण रखना है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • मसाई पठार महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले में स्थित है और इसे 2022 में संरक्षण रिजर्व का दर्जा मिला।
  • वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 36ए संरक्षण रिजर्व घोषित करने का प्रावधान करती है।
  • हल्का शिकरा शिकारी पक्षियों के ऐक्सिपिट्रिडी कुल से संबंधित है।
  • यूरोपीय रोलर कोरासिडी कुल और कोरासिफॉर्मीज गण का पक्षी है।

प्रवासी पक्षियों की नियमित निगरानी से उनके मौसमी आवागमन और स्थानीय आवासों की स्थिति को समझने में मदद मिलती है। मसाई पठार का संरक्षण इन पक्षियों के लिए जरूरी प्राकृतिक संसाधनों को बचाए रखने में महत्वपूर्ण है।

Originally written on October 29, 2026 and last modified on October 29, 2026.

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