संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण के लिए 20 करोड़ डॉलर की पहल
रि:वाइल्ड और जेफ बेजोस अर्थ फंड ने 4 अगस्त 2026 को फीनिक्स प्रजाति परियोजना शुरू की। इसके तहत 100 गंभीर रूप से संकटग्रस्त या जंगल में विलुप्त प्रजातियों के पुनरुद्धार के लिए 20 करोड़ डॉलर देने की प्रतिबद्धता जताई गई है। ये प्रजातियां 30 देशों में पाई जाती हैं और स्तनधारी, उभयचर, सरीसृप, पक्षी, मछली, अकशेरुकी तथा पौधों के समूहों से संबंधित हैं।
साझा वित्तपोषण और दीर्घकालीन सहयोग
परियोजना की कुल राशि में जेफ बेजोस अर्थ फंड और रि:वाइल्ड ने 10-10 करोड़ डॉलर देने का संकल्प लिया है। लियोनार्डो डिकैप्रियो, एज ऑफ यूनियन और टॉड ग्रेव्स फैमिली फाउंडेशन ने भी अतिरिक्त सहायता दी है। डिकैप्रियो रि:वाइल्ड के सह-संस्थापक हैं, जबकि जेफ बेजोस अर्थ फंड की अध्यक्षता करते हैं।
इस पहल में 100 से अधिक साझेदार शामिल हैं। इनमें मूल निवासी समुदाय, स्थानीय समुदाय, वैज्ञानिक और सरकारें शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) का प्रजाति उत्तरजीविता आयोग परियोजना के वैश्विक ज्ञान साझेदार के रूप में काम करेगा। प्रत्येक लक्षित प्रजाति के लिए पांच वर्षों तक सहायता देने की योजना है। इससे संरक्षण दलों को अल्पकालीन अनुदान से आगे की योजना बनाने का समय मिलेगा। आयोजकों के अनुसार, यह गंभीर रूप से संकटग्रस्त प्रजातियों के पुनरुद्धार के लिए समर्पित सबसे बड़ी एकल परोपकारी परियोजना है।
किन प्रजातियों पर रहेगा ध्यान
लक्षित सूची में आईयूसीएन की संकटग्रस्त प्रजातियों की लाल सूची में ‘गंभीर रूप से संकटग्रस्त’ या ‘जंगल में विलुप्त’ श्रेणी में रखी गई प्रजातियां शामिल हैं। गंभीर रूप से संकटग्रस्त श्रेणी में वे प्रजातियां आती हैं जिनके जंगली जीवन में विलुप्त होने का जोखिम अत्यंत अधिक है। ‘जंगल में विलुप्त’ का अर्थ है कि प्रजाति अब अपने प्राकृतिक आवास में नहीं बची है और केवल बंदी अवस्था, खेती या अपने मूल क्षेत्र से बाहर जीवित है।
चयनित प्रजातियों में मेडागास्कर का सुनहरे मुकुट वाला सिफाका लीमर, अमेरिका के उत्तरी कैरोलाइना का हिकरी नट गॉर्ज हरा सैलामैंडर, ऑस्ट्रेलिया का नाइट पैरट और मेक्सिको की चार्को अज़ुल पपफिश शामिल हैं। सूची में फिलीपींस का विसायन मस्सेदार सूअर और बोमाउथ गिटारफिश भी हैं। गिटारफिश दरअसल रे मछली का एक प्रकार है।
बहाली के साथ निगरानी पर जोर
परियोजना के तहत प्रजातियों की आबादी में सुधार और उनके सामने मौजूद खतरों में कमी को दर्ज किया जाएगा। इसकी प्रगति की जानकारी वेबसाइट और सामाजिक माध्यमों पर साझा की जाएगी। यह निगरानी संरक्षण प्रयासों के नतीजों को समझने और जरूरत के अनुसार कार्यनीति बदलने में मदद कर सकती है।
संरक्षण कार्रवाई के प्रभाव पर 2024 में विज्ञान पत्रिका ‘साइंस’ में प्रकाशित एक अध्ययन ने 186 अध्ययनों के 665 परीक्षणों का विश्लेषण किया। इसमें दो-तिहाई मामलों में संरक्षण उपायों से जैव विविधता को लाभ हुआ या उसकी गिरावट धीमी पड़ी। यह निष्कर्ष दिखाता है कि योजनाबद्ध प्रयास संकटग्रस्त प्रजातियों की स्थिति सुधारने में योगदान दे सकते हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- फीनिक्स प्रजाति परियोजना का कुल शुरुआती वित्तीय संकल्प 20 करोड़ डॉलर है, जिसमें रि:वाइल्ड और जेफ बेजोस अर्थ फंड का योगदान बराबर है।
- परियोजना में 30 देशों की 100 प्रजातियां और सात जैविक समूह शामिल हैं।
- आईयूसीएन का प्रजाति उत्तरजीविता आयोग इस परियोजना का वैश्विक ज्ञान साझेदार है।
- हर लक्षित प्रजाति के लिए पांच वर्षों तक सहायता और आबादी तथा खतरों की निगरानी की योजना है।
पांच वर्ष की सहायता और स्थानीय समुदायों सहित व्यापक साझेदारी इस पहल को केवल वित्तीय अनुदान तक सीमित नहीं रखती। इसकी सफलता का आकलन प्रजातियों की आबादी में वास्तविक सुधार और उनके खतरों में कमी से होगा।