वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का समुद्री उत्पाद निर्यात 8.46 अरब डॉलर पर पहुंचा
भारत के समुद्री उत्पाद निर्यात क्षेत्र ने वित्त वर्ष 2025-26 (एफवाई26) में उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए 8.46 अरब अमेरिकी डॉलर अर्थात ₹73,890.46 करोड़ का निर्यात दर्ज किया। इस अवधि में कुल 19,72,018 मीट्रिक टन समुद्री उत्पादों का निर्यात किया गया। समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एमपीईडीए) ने 1 जून 2026 को अंतिम आंकड़ों की पुष्टि की। इससे पहले अप्रैल 2026 में जारी प्रारंभिक आंकड़ों में निर्यात मूल्य 8.28 अरब डॉलर बताया गया था। यह उपलब्धि वैश्विक व्यापारिक चुनौतियों के बावजूद भारत की समुद्री निर्यात क्षमता को दर्शाती है।
समुद्री निर्यात में जमे हुए झींगे का दबदबा
वित्त वर्ष 2025-26 में जमे हुए झींगे (फ्रोजन श्रिम्प) भारत के समुद्री उत्पाद निर्यात का सबसे बड़ा घटक बने रहे। इस श्रेणी से 5,624.48 मिलियन अमेरिकी डॉलर अर्थात ₹49,037.93 करोड़ की आय प्राप्त हुई। कुल समुद्री निर्यात से होने वाली डॉलर आय में फ्रोजन श्रिम्प का योगदान 66.52 प्रतिशत रहा। यह दर्शाता है कि भारतीय झींगा उद्योग अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी मजबूत स्थिति बनाए हुए है और विदेशी मुद्रा अर्जित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
प्रमुख निर्यात बाजारों का प्रदर्शन
संयुक्त राज्य अमेरिका वित्त वर्ष 2025-26 में भी भारतीय समुद्री उत्पादों का सबसे बड़ा आयातक बना रहा। हालांकि इस बाजार में कुछ गिरावट दर्ज की गई। अमेरिका को होने वाले निर्यात में रुपये के आधार पर 10.82 प्रतिशत तथा डॉलर के आधार पर 14.22 प्रतिशत की कमी आई। दूसरी ओर चीन में भारतीय समुद्री उत्पादों की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई। चीन को निर्यात मूल्य में 22.7 प्रतिशत और निर्यात मात्रा में 20.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह संकेत देता है कि भारतीय निर्यातक नए और उभरते बाजारों में अपनी पहुंच बढ़ाने में सफल हो रहे हैं।
यूरोपीय संघ और अन्य उत्पादों का योगदान
यूरोपीय संघ भी भारत के समुद्री निर्यात के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार बनकर उभरा। वित्त वर्ष 2025-26 में इस क्षेत्र में निर्यात मूल्य में 37.9 प्रतिशत और मात्रा में 35.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। उत्पाद श्रेणियों की बात करें तो फ्रोजन फिश, स्क्विड, कटलफिश, सूखे समुद्री उत्पाद और जीवित समुद्री उत्पादों के निर्यात में सकारात्मक वृद्धि हुई। हालांकि शीतित (चिल्ड) उत्पादों के निर्यात में गिरावट दर्ज की गई।
प्रमुख बंदरगाहों की भूमिका
भारत के समुद्री उत्पाद निर्यात में कुछ प्रमुख बंदरगाहों का विशेष योगदान रहा। विशाखापत्तनम, जवाहरलाल नेहरू पोर्ट, कोच्चि, कोलकाता और चेन्नई बंदरगाहों ने मिलकर कुल निर्यात मूल्य का लगभग 64 प्रतिशत हिस्सा संभाला। इन बंदरगाहों की आधुनिक सुविधाएं और निर्यात अवसंरचना समुद्री उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक तेजी से पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- एमपीईडीए (Marine Products Export Development Authority) भारत सरकार के अधीन समुद्री उत्पाद निर्यात को बढ़ावा देने वाली प्रमुख संस्था है।
- वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल समुद्री उत्पाद निर्यात 19,72,018 मीट्रिक टन रहा।
- फ्रोजन श्रिम्प भारत के समुद्री निर्यात का सबसे बड़ा उत्पाद है और कुल डॉलर आय में इसका योगदान 66 प्रतिशत से अधिक है।
- विशाखापत्तनम, जवाहरलाल नेहरू पोर्ट, कोच्चि, कोलकाता और चेन्नई प्रमुख समुद्री निर्यात बंदरगाह हैं।
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत के समुद्री उत्पाद निर्यात का रिकॉर्ड प्रदर्शन देश के मत्स्य उद्योग और निर्यात क्षेत्र की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है। वैश्विक व्यापारिक अनिश्चितताओं, पश्चिम एशिया की परिस्थितियों और बदलते शुल्क ढांचे के बावजूद भारतीय समुद्री उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय मांग मजबूत बनी हुई है। आने वाले वर्षों में बाजार विविधीकरण, गुणवत्ता सुधार और निर्यात अवसंरचना के विकास से यह क्षेत्र और अधिक प्रगति कर सकता है।