वायनाड में गिद्धों की गिनती से संरक्षण की नई तस्वीर
केरल के वायनाड वन्यजीव अभयारण्य में 26 और 27 सितंबर 2026 को किए गए दो दिवसीय समन्वित गिद्ध सर्वेक्षण में 65 गिद्ध दर्ज किए गए। इनमें 54 सफेद-पीठ वाले गिद्ध और 11 लाल सिर वाले गिद्ध शामिल थे। यह सर्वेक्षण पश्चिमी घाट के इस महत्वपूर्ण संरक्षण क्षेत्र में गिद्धों की मौजूदगी और उनकी स्थिति को समझने के लिए किया गया।
वायनाड अभयारण्य क्यों अहम है
वायनाड वन्यजीव अभयारण्य केरल में स्थित एक संरक्षित क्षेत्र है और नीलगिरि बायोस्फीयर रिजर्व का हिस्सा है। यह क्षेत्र शवभक्षी पक्षियों के लिए जाना जाता है, जिनमें संकटग्रस्त गिद्ध प्रजातियाँ भी शामिल हैं। ऐसे क्षेत्रों में नियमित निगरानी से यह पता चलता है कि गिद्ध किस तरह के आवास का उपयोग कर रहे हैं, उनकी आवाजाही कैसी है और किन खतरों का सामना कर रहे हैं।
सर्वेक्षण में कौन-कौन शामिल रहा
इस सर्वेक्षण का संयुक्त आयोजन केरल वन विभाग, वायनाड वन्यजीव प्रभाग, WWF-India और ह्यूम सेंटर फॉर इकोलॉजी एंड वाइल्डलाइफ बायोलॉजी ने किया। इसमें 42 पक्षी-प्रेक्षकों, शोधकर्ताओं, छात्रों और वन्यजीव प्रेमियों ने भाग लिया। प्रतिभागियों को नौ टीमों में बाँटकर सात अवलोकन बिंदुओं से गिद्धों की गिनती की गई।
इस तरह का समन्वित सर्वेक्षण इसलिए उपयोगी माना जाता है क्योंकि एक ही समय पर अलग-अलग स्थानों से की गई गणना से दोहराव की संभावना कम होती है और अधिक विश्वसनीय आंकड़े मिलते हैं।
गिद्धों की घटती संख्या और संरक्षण की चुनौती
भारत में गिद्धों की कई प्रजातियाँ गंभीर दबाव में हैं। सफेद-पीठ वाला गिद्ध और लाल सिर वाला गिद्ध, दोनों को IUCN रेड लिस्ट में Critically Endangered श्रेणी में रखा गया है। गिद्ध शवभक्षी पक्षी होते हैं, जो मृत जानवरों के अवशेष खाकर प्राकृतिक सफाई में मदद करते हैं। इसलिए पारिस्थितिकी तंत्र में उनकी भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है।
भारत में गिद्धों की संख्या में गिरावट के पीछे डाइक्लोफेनाक जैसी पशु-चिकित्सकीय दवाओं का प्रभाव, विषाक्तता और बिजली के तारों से टकराने जैसी वजहें प्रमुख मानी जाती हैं। इसी कारण संरक्षण एजेंसियाँ समय-समय पर सर्वेक्षण कर उनकी स्थिति पर नजर रखती हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारत में गिद्धों की कुल 9 प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
- सफेद-पीठ वाला गिद्ध और लाल सिर वाला गिद्ध, दोनों IUCN की Critically Endangered श्रेणी में हैं।
- गिद्ध शवभक्षी पक्षी होते हैं और प्राकृतिक रूप से मृत जीवों के अवशेष हटाने में मदद करते हैं।
- पश्चिमी घाट के संरक्षित क्षेत्र, खासकर वायनाड जैसे इलाके, गिद्ध संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
वायनाड सर्वेक्षण से यह संकेत मिलता है कि संरक्षित क्षेत्रों में गिद्धों की नियमित निगरानी संरक्षण रणनीति का अहम हिस्सा है। ऐसे आंकड़े भविष्य में उनकी आबादी, वितरण और जोखिमों को समझने में मदद करते हैं।