लैंगिक समावेशन और कौशल विकास

लैंगिक समावेशन और कौशल विकास

पुणे स्थित सिम्बायोसिस स्किल्स एंड प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी ने एशिया की पहली यूनेस्को चेयर ऑन जेंडर इन्क्लूजन एंड स्किल डेवलपमेंट शुरू कर भारत को वैश्विक कौशल विकास और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में नई पहचान दी है। यह पहल शिक्षा, कौशल, रोजगार और लैंगिक समानता को एक साथ जोड़ने का महत्वपूर्ण प्रयास है। इसका उद्देश्य विशेष रूप से वंचित वर्गों की लड़कियों और महिलाओं को उभरते उद्योगों के लिए तैयार करना है।

एशिया में अपनी तरह की पहली पहल

यह यूनेस्को चेयर एशिया में पहली ऐसी अकादमिक पहल है, जो विशेष रूप से लैंगिक समावेशन और कौशल विकास पर केंद्रित है। इसका उद्घाटन कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार तथा शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने किया। यह पहल भारत की उस सोच को मजबूत करती है, जिसमें महिलाओं को केवल भागीदार नहीं, बल्कि भविष्य की कार्यशक्ति और नेतृत्व का प्रमुख आधार माना जा रहा है।

यूनेस्को चेयर का उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों, उद्योगों, सरकार और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के बीच सहयोग को बढ़ाना है। इसके माध्यम से शोध, प्रशिक्षण, नीति सुझाव और संस्थागत विकास को बढ़ावा दिया जाएगा।

भविष्य की नौकरियों के लिए कौशल प्रशिक्षण

इस पहल के तहत विश्वविद्यालय ने अब तक 10,000 लड़कियों को रोबोटिक्स, ऑटोमेशन, सेमीकंडक्टर तकनीक, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और रक्षा तकनीक जैसे भविष्य-केंद्रित क्षेत्रों में प्रशिक्षित किया है। ये क्षेत्र तेजी से बढ़ते उद्योगों में शामिल हैं, जहां आने वाले वर्षों में कुशल कार्यबल की मांग तेजी से बढ़ने की संभावना है।

विशेष बात यह है कि प्रशिक्षण पूरा करने वाली सभी लड़कियों और महिलाओं को रोजगार प्रस्ताव मिले। इससे यह स्पष्ट होता है कि उद्योग से जुड़े व्यावहारिक प्रशिक्षण मॉडल महिलाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाने में प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं।

महिला सशक्तिकरण में नेतृत्व की भूमिका

इस पहल का नेतृत्व एसएसपीयू की प्रो-चांसलर डॉ. स्वाती मुजुमदार कर रही हैं। उन्होंने महिलाओं के लिए उद्योग-समन्वित कौशल विकास मॉडल तैयार किया है, जिसमें व्यावहारिक शिक्षा, रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण और सीधे उद्योग से जुड़ाव पर जोर दिया गया है।

तकनीकी शिक्षा और उभरते उद्योगों में महिलाओं की भागीदारी अब भी अपेक्षाकृत कम है। ऐसे में यह पहल लैंगिक अंतर को कम करने और महिलाओं को उच्च-विकास क्षेत्रों में अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

भारत की वैश्विक भूमिका को मजबूती

यह पहल भारत को समावेशी कौशल विकास के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद कर सकती है। यह भारत के महिला-नेतृत्व वाले विकास के दृष्टिकोण से भी जुड़ी है। शिक्षा, सरकार और उद्योग के संयुक्त प्रयासों से महिलाओं के लिए दीर्घकालिक रोजगार और नेतृत्व के नए रास्ते खुल सकते हैं।

तेजी से बदलती तकनीकी दुनिया में केवल शिक्षा पर्याप्त नहीं है, बल्कि रोजगार से जुड़ा कौशल भी आवश्यक है। इस दृष्टि से यह यूनेस्को चेयर भविष्य की कार्यशक्ति को अधिक समावेशी, सक्षम और संतुलित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • यूनेस्को का पूरा नाम संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन है।
  • यूनेस्को की स्थापना वर्ष 1945 में हुई थी और इसका मुख्यालय पेरिस में है।
  • यूनेस्को चेयर कार्यक्रम शोध, प्रशिक्षण और संस्थागत सहयोग को बढ़ावा देने के लिए चलाया जाता है।
  • भारत में स्किल इंडिया मिशन वर्ष 2015 में शुरू किया गया था।

सिम्बायोसिस स्किल्स एंड प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी की यह पहल महिला सशक्तिकरण, कौशल विकास और रोजगार के बीच मजबूत संबंध स्थापित करती है। इससे न केवल महिलाओं को भविष्य के उद्योगों में अवसर मिलेंगे, बल्कि भारत की वैश्विक कौशल अर्थव्यवस्था में भूमिका भी और मजबूत होगी।

Originally written on April 28, 2026 and last modified on April 28, 2026.

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