लीबिया की मंजूरी से तुर्की के साथ समुद्री समझौते को नया समर्थन

लीबिया की मंजूरी से तुर्की के साथ समुद्री समझौते को नया समर्थन

लीबिया की पूर्वी संसद ने 20 अक्टूबर 2026 को तुर्की के साथ 2019 के समुद्री समझौते को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी। इस फैसले से संसद ने अपना पुराना विरोध वापस लेते हुए 2020 में पारित उन प्रस्तावों को रद्द कर दिया, जिनमें समझौते को खारिज करने और अंकारा के साथ राजनीतिक संबंध निलंबित करने की बात थी। अब लीबिया की प्रतिद्वंद्वी सरकारों का समर्थन इस समझौते के पक्ष में है, हालांकि इससे पूर्वी भूमध्यसागर में विवाद खत्म नहीं हुआ है।

पूर्वी संसद के रुख में बदलाव

लीबिया लंबे समय से अलग-अलग राजनीतिक सत्ता केंद्रों में बंटा रहा है। त्रिपोली स्थित राष्ट्रीय एकता सरकार और पूर्वी लीबिया की सत्ता के बीच मतभेदों का असर विदेश नीति पर भी पड़ा है। तुर्की के साथ समझौते पर पूर्वी संसद का पुराना विरोध इसी राजनीतिक विभाजन का हिस्सा था।

मतदान से पहले 6 अक्टूबर को संसद के नेतृत्व में बदलाव हुआ था। लीबिया-तुर्की मैत्री समिति के अध्यक्ष रहे अल-सालिहिन अब्देलनबी अल-ओबैदी नए अध्यक्ष बने। उन्होंने अकीला सालेह का स्थान लिया, जो पहले समझौते की पुष्टि का विरोध कर चुके थे। नेतृत्व परिवर्तन के बाद आया यह फैसला लीबिया की नीति में महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देता है।

समुद्री समझौते का रणनीतिक महत्व

तुर्की और त्रिपोली की तत्कालीन अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय सहमति सरकार ने नवंबर 2019 में समुद्री सीमा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसका उद्देश्य भूमध्य सागर में दोनों देशों के बीच एक विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र निर्धारित करना था। ऐसे क्षेत्र में तटीय देश को समुद्र तल के संसाधनों की खोज और उपयोग से जुड़े अधिकार मिलते हैं। समझौते में समुद्री सीमा क्रेट और साइप्रस के बीच के क्षेत्र से गुजरती है।

पूर्वी संसद की नई मंजूरी से समझौते को लीबिया के भीतर व्यापक राजनीतिक समर्थन मिला है। फिर भी मंजूरी अपने आप में क्षेत्रीय विवाद का समाधान नहीं है। ग्रीस का कहना है कि समझौता उसके द्वीपों की अनदेखी करता है और पूर्वी भूमध्यसागर के भूगोल से मेल नहीं खाता। इस क्षेत्र में समुद्री सीमाओं और संभावित संसाधनों को लेकर देशों के दावे एक-दूसरे से टकराते रहे हैं।

ग्रीस और अन्य देशों की आपत्ति

29 अक्टूबर को ग्रीस के प्रधानमंत्री क्यारीआकोस मित्सोताकिस ने समझौते को “स्पष्ट रूप से अवैध, शून्य और अमान्य” बताया। ग्रीस के अलावा मिस्र, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात, साइप्रस और यूरोपीय संघ ने भी अंतरराष्ट्रीय कानून तथा क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं जताते हुए इसकी निंदा की है।

तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोआन ने आलोचनाओं को खारिज करते हुए कहा कि उनका देश अपने समुद्री अधिकारों और हितों की रक्षा कर रहा है। समझौते को लेकर एक कानूनी आपत्ति यह भी रही है कि स्किरात समझौते के अनुच्छेद 8 के तहत लीबिया के प्रधानमंत्री मंत्रिमंडल की सर्वसम्मति के बिना अंतरराष्ट्रीय समझौता नहीं कर सकते। इस मुद्दे पर अलग-अलग पक्षों के दावे विवाद को कानूनी और कूटनीतिक दोनों स्तरों पर बनाए रखते हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

:

  • तुर्की और लीबिया की तत्कालीन राष्ट्रीय सहमति सरकार ने समुद्री सीमा समझौते पर नवंबर 2019 में हस्ताक्षर किए थे।
  • विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र में तटीय देश को समुद्र तल के संसाधनों के उपयोग से जुड़े अधिकार मिलते हैं।
  • स्किरात समझौते के अनुच्छेद 8 को लीबिया में अंतरराष्ट्रीय समझौतों की मंजूरी से जुड़ी कानूनी आपत्ति के आधार के रूप में उद्धृत किया गया है।
  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने लीबियाई राजनीतिक समझौते का सर्वसम्मति से समर्थन किया था और राष्ट्रीय सहमति सरकार को लीबिया की एकमात्र वैध कार्यकारी सत्ता के रूप में मान्यता दी थी।

पूर्वी संसद का फैसला तुर्की-लीबिया संबंधों को नया आधार देता है, लेकिन ग्रीस और अन्य क्षेत्रीय पक्षों की आपत्तियों के कारण इस समुद्री समझौते पर कूटनीतिक बहस जारी रहने की संभावना है।

Originally written on October 30, 2026 and last modified on October 30, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *