यूएन सुरक्षा परिषद की दावेदारी में भारत का जोर एआई और समुद्री सुरक्षा पर
भारत ने 2028–29 के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अस्थायी सदस्यता की अपनी दावेदारी में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और समुद्री सुरक्षा को प्रमुख प्राथमिकताएं बताया है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने 29 अक्टूबर 2026 को सुरक्षा परिषद की बहस में कहा कि तकनीक का उपयोग मानव सुरक्षा मजबूत करने और समुद्री क्षेत्रों को सुरक्षित बनाने के लिए होना चाहिए।
समुद्री निगरानी में एआई की भूमिका
पर्वतनेनी के अनुसार, उपग्रह चित्रों, रडार और जहाजों की गतिविधि से जुड़े आंकड़ों का एआई आधारित विश्लेषण समुद्री क्षेत्र की निगरानी को बेहतर कर सकता है। इससे संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाने और खोज एवं बचाव अभियानों में मदद मिल सकती है। भारत ने यह भी कहा कि विकासशील देशों को ऐसी तकनीक तक पहुंच, प्रशिक्षण और संस्थागत क्षमता मिलनी चाहिए, ताकि वे समुद्री सुरक्षा में प्रभावी भागीदारी कर सकें।
इसके साथ ही बंदरगाहों, जहाजों, संचार नेटवर्क और समुद्र के नीचे स्थित बुनियादी ढांचे पर साइबर हमलों के जोखिम की ओर ध्यान दिलाया गया। स्वायत्त प्रणालियों के उपयोग में सुरक्षा उपाय, मानवीय निगरानी और स्पष्ट जवाबदेही जरूरी बताई गई।
नौवहन की स्वतंत्रता और क्षेत्रीय सहयोग
भारत ने वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों की निंदा करते हुए नौवहन की स्वतंत्रता, वैध समुद्री व्यापार और नाविकों की सुरक्षा पर जोर दिया। इस संदर्भ में समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय और अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन को अंतरराष्ट्रीय नियम-व्यवस्था के अहम हिस्सों के रूप में रेखांकित किया गया।
भारत की क्षेत्रीय सहयोग नीति ‘सागर’ यानी क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास की अवधारणा से निर्देशित है। सूचना साझा करने का एक उदाहरण गुरुग्राम, हरियाणा में भारतीय नौसेना की मेजबानी वाला सूचना संलयन केंद्र–हिंद महासागर क्षेत्र (आईएफसी-आईओआर) है। दिसंबर 2018 में शुरू हुआ यह केंद्र हिंद महासागर में समुद्री सुरक्षा और संरक्षा से जुड़ी जानकारी के आदान-प्रदान में सहयोग करता है।
2028–29 की दावेदारी और चुनाव
एशिया-प्रशांत समूह की एक अस्थायी सीट के लिए चुनाव जून 2027 में होना निर्धारित है। इस सीट के लिए भारत और ताजिकिस्तान प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। सितंबर 2026 में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और यूनान के विदेश मंत्री जॉर्ज गेरापेट्रिटिस ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा पर संयुक्त राष्ट्र के एक कार्यक्रम की सह-अध्यक्षता की थी, जिसमें समुद्री सुरक्षा पर भी जोर रहा।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- आईएफसी-आईओआर की शुरुआत दिसंबर 2018 में हुई थी और इसका मुख्यालय गुरुग्राम, हरियाणा में है।
- यह केंद्र हिंद महासागर में समुद्री क्षेत्र की जागरूकता के लिए व्यापारिक जहाजों से जुड़ी जानकारी का संलयन, विश्लेषण और प्रसार करता है।
- ‘सागर’ का आशय क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास है; यह हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के सहयोग दृष्टिकोण का आधार है।
- समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय समुद्री गतिविधियों के लिए अंतरराष्ट्रीय कानूनी ढांचे का प्रमुख हिस्सा है।
भारत की प्राथमिकताओं में तकनीकी नवाचार को सुरक्षा, जवाबदेही और देशों के बीच सहयोग के साथ जोड़ने की कोशिश दिखाई देती है।