लद्दाख में दुनिया के सबसे ऊंचे फूल खेत, पर्वतीय खेती को नई पहचान
लद्दाख के लेह जिले में 17 सितंबर 2026 को चोगलमसर और स्ताकना में जुड़वां फूल खेतों का उद्घाटन किया गया। 10,600 फीट यानी लगभग 3,265 मीटर की ऊंचाई पर विकसित ये खेत अब दुनिया के सबसे ऊंचे-altitude फूल खेतों के रूप में चर्चा में हैं। यह पहल केवल सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि उच्च पर्वतीय क्षेत्र में फ्लोरीकल्चर की संभावनाओं को भी सामने लाती है।
ऊंचाई वाले रेगिस्तान में खेती की नई मिसाल
लेह का यह इलाका एक ठंडा मरुस्थलीय क्षेत्र है, जहां बढ़ने का मौसम छोटा होता है और तापमान कम रहता है। ऐसे वातावरण में फूलों की खेती करना सामान्य कृषि की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण माना जाता है। इसके बावजूद यहां 40 एकड़ क्षेत्र में यह परियोजना विकसित की गई है, जिसमें 25 लाख से अधिक फूल लगाए गए हैं।
इस परियोजना में लगभग 24 लाख लिलीम पौधे और एक लाख ग्लैडियोलस पौधे शामिल हैं। चोगलमसर साइट पर लिलीम, ग्लैडियोलस और ट्यूलिप जैसे बल्ब से उगने वाले सजावटी फूल लगाए गए हैं। ये फूल व्यावसायिक फ्लोरीकल्चर में महत्वपूर्ण माने जाते हैं, क्योंकि इनकी मांग कट फ्लावर और सजावटी उपयोग दोनों में रहती है।
फ्लोरीकल्चर और स्थानीय आजीविका का संबंध
फ्लोरीकल्चर यानी फूलों और सजावटी पौधों की व्यावसायिक खेती, भारत में एक तेजी से विकसित होता क्षेत्र है। कर्नाटक, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में यह पहले से स्थापित है, लेकिन लद्दाख जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्र में इसका विस्तार एक अलग मॉडल प्रस्तुत करता है। यहां जल प्रबंधन, ठंड सहन करने वाली किस्में और सही रोपण समय सबसे अहम कारक होते हैं।
यह परियोजना स्वयं सहायता समूहों और सहकारी समितियों से भी जुड़ी है, ताकि स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़े। चोगलमसर को प्रशिक्षण और प्रदर्शन केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां किसान और युवा फूलों की खेती के व्यावहारिक पहलू सीख सकेंगे। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और सूक्ष्म उद्यमों की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।
समयबद्ध विकास और भविष्य की संभावनाएं
चोगलमसर में रोपण 16 जुलाई 2026 को शुरू हुआ था और सितंबर के पहले सप्ताह में पहली बार फूल खिले। दूसरी ओर, स्ताकना में अगस्त 2026 में लगभग 14 लाख लिलीम बल्ब लगाए गए थे और वहां अक्टूबर के अंत तक फूल आने की उम्मीद है। यह समयबद्ध विकास दिखाता है कि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी वैज्ञानिक योजना के साथ फूलों की खेती सफल हो सकती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- लद्दाख 31 अक्टूबर 2019 को जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के बाद केंद्र शासित प्रदेश बना।
- लिलीम, लिलिएसी परिवार का एक प्रमुख सजावटी पौधा है।
- ग्लैडियोलस इरिडेसी परिवार से संबंधित है और कट फ्लावर के रूप में व्यापक रूप से उपयोग होता है।
- स्वयं सहायता समूह ग्रामीण आजीविका और छोटे उद्यमों को बढ़ावा देने वाली सामुदायिक इकाइयां होती हैं।
लद्दाख की यह पहल दिखाती है कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भी नवाचार और स्थानीय भागीदारी के जरिए कृषि को नई दिशा दी जा सकती है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में फूलों की यह खेती भविष्य में पर्वतीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण मॉडल बन सकती है।