पाकिस्तान सेना के साथ अमेरिकी ड्रोन कंपनी का समझौता, रक्षा तकनीक सहयोग पर नजर
अमेरिकी ड्रोन कंपनी पावरस ने 17 सितंबर 2026 को पाकिस्तान सेना के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत पाकिस्तान सेना के लिए मानवरहित हवाई प्रणालियों की शुरुआती आपूर्ति शामिल है। साथ ही, पाकिस्तान में तकनीक उत्पादन और संयुक्त प्रौद्योगिकी सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई है।
समझौते में क्या है खास
पावरस एक अमेरिकी कंपनी है, जो सैन्य और औद्योगिक उपयोग के लिए हवाई और समुद्री ड्रोन बनाती है। इस MoU का सबसे अहम पहलू केवल खरीद तक सीमित न रहकर उत्पादन, तकनीकी हस्तांतरण और क्षमता निर्माण की दिशा में आगे बढ़ना है। रक्षा क्षेत्र में ऐसे समझौते अक्सर किसी देश की स्थानीय निर्माण क्षमता और दीर्घकालिक आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने के लिए किए जाते हैं।
मानवरहित हवाई प्रणाली या UAS केवल ड्रोन प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं होती, बल्कि इसमें नियंत्रण स्टेशन, संचार लिंक और संबंधित सहायक उपकरण भी शामिल होते हैं। इसलिए यह समझौता सिर्फ एक उपकरण खरीद नहीं, बल्कि एक पूरी तकनीकी व्यवस्था से जुड़ा कदम माना जा रहा है।
रावलपिंडी बैठक और सैन्य नेतृत्व की भूमिका
समझौते से एक दिन पहले, 16 सितंबर 2026 को पावरस के सह-संस्थापक ब्रेट वेलिकोविच के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने रावलपिंडी स्थित जनरल हेडक्वार्टर में पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल सैयद असीम मुनीर से मुलाकात की थी। पाकिस्तान सेना की मीडिया शाखा इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) ने इस बैठक में रक्षा खरीद, उत्पादन और दीर्घकालिक क्षमता निर्माण पर चर्चा का उल्लेख किया।
जनरल हेडक्वार्टर पाकिस्तान सेना का मुख्य सैन्य मुख्यालय है, जबकि ISPR सेना की आधिकारिक संचार और जनसंपर्क इकाई है। इस तरह की बैठकों से यह संकेत मिलता है कि रक्षा सहयोग को केवल तत्काल जरूरतों के बजाय भविष्य की सैन्य तैयारी और तकनीकी साझेदारी के नजरिए से देखा जा रहा है।
रक्षा उद्योग और रणनीतिक संदर्भ
पावरस की योजना के अनुसार, कंपनी का सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध ऑरियस ग्रीनवे होल्डिंग्स के साथ विलय अक्टूबर 2026 की शुरुआत में होने की उम्मीद है। इसके अलावा, ऑरियस ग्रीनवे होल्डिंग्स में डोनाल्ड ट्रंप जूनियर और एरिक ट्रंप की हिस्सेदारी एक निवेश फंड के माध्यम से बताई गई है।
ऐसे समय में जब कई देश ड्रोन तकनीक को निगरानी, सीमा सुरक्षा और सैन्य संचालन के लिए तेजी से अपना रहे हैं, पाकिस्तान सेना के साथ यह समझौता क्षेत्रीय रक्षा सहयोग की नई दिशा के रूप में देखा जा रहा है। मानवरहित प्रणालियों की बढ़ती भूमिका ने रक्षा खरीद को पारंपरिक हथियारों से आगे बढ़ाकर तकनीक-आधारित साझेदारी का विषय बना दिया है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- UAS का पूरा नाम Unmanned Aerial Systems है, जिसमें ड्रोन के साथ नियंत्रण और संचार प्रणाली भी शामिल होती है।
- जनरल हेडक्वार्टर, रावलपिंडी पाकिस्तान सेना का मुख्य सैन्य मुख्यालय है।
- ISPR पाकिस्तान सशस्त्र बलों की मीडिया और जनसंपर्क शाखा है।
- फील्ड मार्शल पाकिस्तान सहित कुछ देशों की सेनाओं में उपयोग होने वाला एक उच्च सैन्य रैंक है।
यह समझौता रक्षा खरीद, तकनीकी हस्तांतरण और स्थानीय उत्पादन की संभावनाओं के कारण चर्चा में है। आने वाले समय में इसके व्यावहारिक असर पर अंतरराष्ट्रीय रक्षा हलकों की नजर बनी रहेगी।