रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी सैन्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता की तैयारी

रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी सैन्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता की तैयारी

भारत सैन्य अभियानों में निर्णय लेने और विभिन्न स्रोतों से मिली जानकारी के विश्लेषण के लिए सशस्त्र बलों हेतु एक सुरक्षित, स्वदेशी कृत्रिम बुद्धिमत्ता परत विकसित करने की तैयारी कर रहा है। रक्षा मंत्रालय और भारतएआई मिशन इस पहल पर मिलकर काम कर रहे हैं। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने 23 अक्टूबर 2026 को बताया कि इसका उद्देश्य महत्वपूर्ण सैन्य प्रणालियों के लिए घरेलू संगणना क्षमता तैयार करना है।

सेंसर से सैन्य कार्रवाई तक सूचना का उपयोग

प्रस्तावित परत निर्णय-सहायता, लक्ष्य पहचान और सूचना-संयोजन जैसे कार्यों में मदद करेगी। इसका एक प्रमुख उपयोग ‘सेंसर से निशाने तक’ की प्रक्रिया को समर्थन देना है। इस प्रक्रिया में सेंसरों से मिली जानकारी को परिचालन निर्णयों और हथियारों के उपयोग से जोड़ा जाता है। लक्ष्य पहचान का अर्थ संभावित सैन्य लक्ष्य की पहचान और उसका स्थान निर्धारित करना है।

सूचना-संयोजन में अलग-अलग स्रोतों से प्राप्त आंकड़ों को एक साथ रखकर साझा परिचालन चित्र तैयार किया जाता है। इससे कमांडरों को उपलब्ध जानकारी का समेकित आकलन करने में सहायता मिल सकती है। यह व्यवस्था अपने आप में सैन्य निर्णय का विकल्प नहीं, बल्कि निर्णय लेने में सहायक तकनीकी क्षमता के रूप में प्रस्तावित है। इसके लिए आवश्यक संगणना संसाधन जुटाए जा चुके हैं।

स्वदेशी क्षमता और भरोसेमंद प्रणालियों पर जोर

रक्षा मंत्रालय भारतएआई मिशन के तहत चुनी गई निजी क्षेत्र की कंपनियों के साथ काम करने की योजना बना रहा है। पहल का घोषित लक्ष्य रक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण तकनीकों में घरेलू क्षमता विकसित करना है। साथ ही, मित्र देशों के साथ साझेदारी की संभावना भी खुली रखी गई है।

सिंह ने विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर अत्यधिक निर्भरता से जुड़े जोखिमों की ओर ध्यान दिलाया। किसी आपूर्तिकर्ता द्वारा तकनीक उपलब्ध कराने से इनकार करना या महत्वपूर्ण प्रणालियों में छिपे प्रवेश-द्वार और दूर से निष्क्रिय करने वाले तंत्र जैसी कमजोरियां राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चिंता का विषय हो सकती हैं। इसलिए स्वदेशी विकास का उद्देश्य केवल तकनीकी उपलब्धता नहीं, बल्कि संवेदनशील रक्षा प्रणालियों पर भरोसे और नियंत्रण को मजबूत करना भी है।

भारतएआई मिशन को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 7 मार्च 2024 को 10,371.92 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ मंजूरी दी थी। यह मिशन कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए संगणना संसाधनों तक पहुंच बढ़ाने और स्वदेशी मॉडल विकसित करने का राष्ट्रीय ढांचा प्रदान करता है। 22 अक्टूबर 2026 को सांसद कमलजीत सहरावत ने रक्षा क्षेत्र में उपयोग होने वाली कृत्रिम बुद्धिमत्ता की विश्वसनीयता जांचने के घरेलू ढांचे का उल्लेख किया। इसमें विश्वसनीयता, सुरक्षा और पारदर्शिता को प्रमुख सिद्धांत बताया गया।

बहु-क्षेत्रीय युद्ध और संयुक्त अभियानों का संदर्भ

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 24 अक्टूबर 2026 को भविष्य के युद्धों के लिए एकीकृत दृष्टिकोण, बहु-क्षेत्रीय क्षमता और संयुक्त अभियानों के बीच समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया। बहु-क्षेत्रीय युद्ध में भूमि, समुद्र, वायु, अंतरिक्ष और साइबर क्षेत्र में अभियान शामिल हो सकते हैं। ऐसे वातावरण में अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाली सूचनाओं का तेज और सुरक्षित विश्लेषण सैन्य योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • भारतएआई मिशन को 7 मार्च 2024 को 10,371.92 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ मंजूरी मिली थी।
  • सूचना-संयोजन का अर्थ कई स्रोतों से मिली जानकारी को जोड़कर परिचालन उपयोग के लिए साझा चित्र तैयार करना है।
  • रक्षा कृत्रिम बुद्धिमत्ता की विश्वसनीयता के लिए बताए गए सिद्धांतों में विश्वसनीयता, सुरक्षा और पारदर्शिता शामिल हैं।
  • बहु-क्षेत्रीय युद्ध में भूमि, समुद्र, वायु, अंतरिक्ष और साइबर क्षेत्र शामिल हो सकते हैं।

प्रस्तावित सैन्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता परत भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीक और सुरक्षित निर्णय-सहायता क्षमता को आगे बढ़ाने की पहल है। इसका प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि तकनीक को भरोसेमंद ढंग से विकसित कर सैन्य जरूरतों के अनुरूप कैसे जोड़ा जाता है।

Originally written on October 24, 2026 and last modified on October 24, 2026.

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