नागरिक सुरक्षा का नया ढांचा: 12 राज्यों में 60 हजार स्वयंसेवकों का प्रशिक्षण

नागरिक सुरक्षा का नया ढांचा: 12 राज्यों में 60 हजार स्वयंसेवकों का प्रशिक्षण

केंद्रीय गृह मंत्रालय और भारतीय सेना मिलकर देशव्यापी नागरिक सुरक्षा नेटवर्क तैयार करने के लिए एक पायलट पहल शुरू कर रहे हैं। इसके पहले चरण में 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 60,000 स्वयंसेवकों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य है। पायलट के परिणामों की समीक्षा के बाद इसे अन्य क्षेत्रों तक बढ़ाने की योजना है।

नागरिक सुरक्षा नेटवर्क की जरूरत

नागरिक सुरक्षा का उद्देश्य शत्रुतापूर्ण हमलों और आपात स्थितियों के प्रभाव से लोगों तथा संपत्ति की रक्षा करना और संकट के समय प्रभावी प्रबंधन करना है। भारत में इसके लिए वैधानिक आधार नागरिक सुरक्षा अधिनियम, 1968 प्रदान करता है। गृह मंत्रालय के अधीन अग्निशमन सेवा, नागरिक सुरक्षा और गृह रक्षक महानिदेशालय भारतीय सेना के समन्वय से इस पायलट को संचालित करेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस संबोधन में मजबूत, तत्पर और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार नागरिक सुरक्षा नेटवर्क की परिकल्पना रखी थी। नई पहल इसी दृष्टि को आगे बढ़ाते हुए आधुनिक सुरक्षा खतरों, शत्रुतापूर्ण परिस्थितियों और आपातकालीन घटनाओं से निपटने की स्थानीय क्षमता विकसित करने पर केंद्रित है। इसमें जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान, गुजरात, दिल्ली, मेघालय, सिक्किम, असम, उत्तर प्रदेश, केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु शामिल हैं।

प्रशिक्षण का चरणबद्ध मॉडल

पहले चरण में प्रत्येक भागीदार राज्य या केंद्रशासित प्रदेश से 50 नागरिक सुरक्षा प्रशिक्षक चुने जाएंगे। इस तरह कुल 600 प्रशिक्षकों को भारतीय सेना के निर्धारित प्रशिक्षण केंद्रों में तीन दिन का विशेष पाठ्यक्रम दिया जाएगा। यह प्रशिक्षण नवंबर 2026 के दूसरे सप्ताह तक पूरा करने की योजना है।

इसके बाद प्रत्येक प्रशिक्षक अपने क्षेत्र में 100 स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित करेगा। इस क्रमिक प्रशिक्षण व्यवस्था से कुल 60,000 स्वयंसेवकों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित लोगों का समूह तैयार होगा, जो संकट के समय सुरक्षा और राहत संबंधी गतिविधियों में सहयोग कर सकेगा। अन्य राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में विस्तार का निर्णय पायलट के आकलन के आधार पर होगा।

खतरों से निपटने से लेकर समन्वय तक

पाठ्यक्रम में खतरे की पहचान, सुरक्षा एवं आपात प्रतिक्रिया तथा संचार और समन्वय से जुड़े विषय शामिल हैं। प्रशिक्षुओं को आधुनिक और हाइब्रिड युद्ध, ड्रोन से उत्पन्न खतरे तथा हवाई हमलों के बारे में जागरूक किया जाएगा। सुरक्षा और प्रतिक्रिया के हिस्से में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा, अग्नि सुरक्षा, आपदा के दौरान घायलों का प्रबंधन तथा खोज और बचाव जैसे विषय रखे गए हैं।

प्रशिक्षण में रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु खतरों की जानकारी भी दी जाएगी। इसके साथ आपातकालीन संचार, साइबर स्वच्छता, डिजिटल प्रणालियों की मजबूती, नागरिक-सैन्य समन्वय और घटनास्थल पर नेतृत्व व्यवस्था पर जोर रहेगा। इस व्यापक पाठ्यक्रम का उद्देश्य स्वयंसेवकों को केवल खतरे की जानकारी देना नहीं, बल्कि संकट के दौरान समन्वित प्रतिक्रिया के लिए तैयार करना है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

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  • भारत में नागरिक सुरक्षा उपायों का प्रमुख वैधानिक आधार नागरिक सुरक्षा अधिनियम, 1968 है।
  • सीबीआरएन का अर्थ रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु खतरे है।
  • पायलट में 12 राज्य और केंद्रशासित प्रदेश शामिल हैं तथा 60,000 स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य है।
  • पहले चरण में 600 प्रशिक्षक तैयार होंगे; प्रत्येक भागीदार क्षेत्र से 50 प्रशिक्षक चुने जाएंगे।

इस पहल की सफलता प्रशिक्षण की गुणवत्ता और स्थानीय स्तर पर तैयार स्वयंसेवकों के समन्वय पर निर्भर करेगी। पायलट का आकलन यह तय करने में मदद करेगा कि इस नागरिक सुरक्षा मॉडल को देश के अन्य हिस्सों में किस तरह विस्तार दिया जाए।

Originally written on October 24, 2026 and last modified on October 24, 2026.

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