यूनेस्को की संभावित सूची में भारत की नई विरासत पहचान
भारत ने यूनेस्को की विश्व धरोहर संभावित सूची में पांच नई संपत्तियां जोड़ी हैं, जिससे इस सूची में देश की कुल संख्या बढ़कर 78 हो गई है। यह कदम इसलिए अहम है क्योंकि किसी भी स्थल को विश्व धरोहर का दर्जा दिलाने की प्रक्रिया की शुरुआत इसी सूची से होती है।
संभावित सूची क्यों महत्वपूर्ण है
यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट उन स्थलों, स्मारकों और सांस्कृतिक परिदृश्यों का आधिकारिक रिकॉर्ड होती है, जिन्हें भविष्य में विश्व धरोहर नामांकन के लिए प्रस्तावित किया जा सकता है। किसी स्थल को पहले इस सूची में शामिल होना जरूरी होता है, तभी आगे उसका औपचारिक नामांकन डोजियर यूनेस्को को भेजा जा सकता है। इसका अर्थ है कि यह सूची विश्व धरोहर दर्जे की दिशा में पहला और अनिवार्य चरण है।
मध्य प्रदेश को मिली सबसे बड़ी हिस्सेदारी
नई जोड़ी गई पांच संपत्तियों में से चार मध्य प्रदेश से हैं। इनमें बाघ गुफा चित्रों के बौद्ध भित्तिचित्र, चंबल घाटी के मंदिर समूह, गुप्तकालीन उदयगिरि गुफाएं और गिन्नोरगढ़ की जनजातीय विरासत शामिल हैं। इन स्थलों के जुड़ने से मध्य प्रदेश की पुरातात्त्विक, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय पहचान की दिशा में नई मजबूती मिली है।
बाघ गुफा चित्रकला भारतीय बौद्ध कला परंपरा का महत्वपूर्ण उदाहरण मानी जाती है, जबकि उदयगिरि गुफाएं गुप्तकालीन शिल्प और ऐतिहासिक महत्व के लिए जानी जाती हैं। चंबल घाटी के मंदिर समूह और गिन्नोरगढ़ की जनजातीय विरासत भी क्षेत्रीय इतिहास और सांस्कृतिक विविधता को दर्शाते हैं।
सत्याग्रह से जुड़ा अंतरराष्ट्रीय प्रस्ताव
पांचवीं नई प्रविष्टि एक क्रमिक अंतरराष्ट्रीय प्रस्ताव Sites of Satyagraha है, जो भारत और दक्षिण अफ्रीका को जोड़ता है। इसमें कुल नौ घटक शामिल हैं। भारत की ओर से इसमें महात्मा गांधी सत्याग्रह स्मारक, साबरमती आश्रम, मणिभवन परिसर, हरिजन सेवक संघ परिसर, सेवाग्राम आश्रम, आगा खान पैलेस और गांधी स्मृति निवास शामिल हैं। दक्षिण अफ्रीका की ओर से पीटरमैरिट्सबर्ग स्टेशन और फीनिक्स सेटलमेंट को जोड़ा गया है।
यह प्रस्ताव गांधीवादी विचार, सत्याग्रह आंदोलन और भारत-दक्षिण अफ्रीका के ऐतिहासिक संबंधों को एक साझा विरासत के रूप में प्रस्तुत करता है। ऐसे क्रमिक प्रस्तावों में अलग-अलग देशों के जुड़े हुए स्थल एक ही थीम के तहत नामित किए जाते हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट को भविष्य के विश्व धरोहर नामांकन की सूची भी कहा जाता है।
- किसी स्थल को विश्व धरोहर घोषित कराने से पहले उसका इस सूची में होना जरूरी होता है।
- विश्व धरोहर स्थल 1972 के विश्व धरोहर सम्मेलन के तहत “असाधारण सार्वभौमिक मूल्य” के आधार पर चुने जाते हैं।
- भारत की नवीनतम टेंटेटिव लिस्ट संशोधन तिथि 3 सितंबर 2026 बताई गई है।
इन नई प्रविष्टियों के साथ भारत की विरासत सूची और अधिक विविध हुई है, जिसमें बौद्ध कला, गुप्तकालीन स्थापत्य, जनजातीय परंपराएं और गांधीवादी स्मृति—चारों का प्रतिनिधित्व दिखाई देता है।