तेस्ता पर नया छह लेन पुल उत्तर-पूर्व कनेक्टिविटी को मिलेगी मजबूती
केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले में सेवक के पास तीस्ता नदी पर 1,175.59 करोड़ रुपये की लागत से छह लेन के बड़े पुल को मंजूरी दी है। एनएच-10 पर बनने वाला यह 6.91 किलोमीटर लंबा प्रोजेक्ट उत्तर-पूर्वी राज्यों, सिक्किम और सिलीगुड़ी कॉरिडोर के बीच सड़क संपर्क को बेहतर बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
सेवक में बनेगा वैकल्पिक पुल
यह नया पुल मौजूदा कोरोनेशन ब्रिज के विकल्प के रूप में काम करेगा, जो 1941 में चालू हुआ था और इस मार्ग पर लंबे समय से यातायात संभाल रहा है। परियोजना में पुल के साथ उसके एप्रोच रोड भी शामिल हैं, जिससे इस पूरे रूट पर वाहनों की आवाजाही अधिक सुगम होने की उम्मीद है।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 1 अक्टूबर 2026 को इस मंजूरी की जानकारी दी। यह परियोजना खास तौर पर उस क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है, जहां पहाड़ी भूगोल, नदी-प्रवाह और भारी यातायात के कारण सड़क ढांचे पर लगातार दबाव बना रहता है।
सिक्किम-उत्तर पूर्व के लिए क्यों अहम है यह परियोजना
तीस्ता नदी पूर्वी हिमालय की एक अंतरराष्ट्रीय नदी प्रणाली है, जो सिक्किम और पश्चिम बंगाल से होकर बांग्लादेश में प्रवेश करती है। सेवक दार्जिलिंग जिले में हिमालय की तलहटी के पास स्थित है और एनएच-10 सिक्किम जाने वाले प्रमुख मार्गों में शामिल है। ऐसे में इस पुल से न केवल यात्रा समय घटने की संभावना है, बल्कि माल ढुलाई और आपातकालीन आवाजाही भी अधिक भरोसेमंद हो सकती है।
सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जिसे भारत के भूगोल में ‘चिकन नेक’ भी कहा जाता है, देश के मुख्य भूभाग को उत्तर-पूर्व से जोड़ने वाली संकरी पट्टी है। इस क्षेत्र में किसी भी बड़े सड़क ढांचे का मजबूत होना रणनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
बाढ़ के बाद ढांचे को मजबूत करने की दिशा में कदम
यह परियोजना 2023 की भीषण तीस्ता बाढ़ के बाद क्षेत्रीय ढांचे को फिर से मजबूत करने की व्यापक जरूरत से भी जुड़ी है। उस आपदा में सड़कें और पुल प्रभावित हुए थे, जिससे आवागमन और आपूर्ति श्रृंखला पर असर पड़ा था। नया पुल व्यापार, पर्यटन, लॉजिस्टिक्स और उत्तर बंगाल तथा उत्तर-पूर्व के बीच नियमित सड़क संपर्क को सहारा दे सकता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- तीस्ता नदी पूर्वी हिमालय की प्रमुख अंतरराष्ट्रीय नदी प्रणाली है।
- कोरोनेशन ब्रिज 1941 में चालू हुआ था और सिक्किम मार्ग पर एक महत्वपूर्ण पुल है।
- सिलीगुड़ी कॉरिडोर को भारतीय भूगोल में ‘चिकन नेक’ कहा जाता है।
- एनएच-10 सिक्किम की ओर जाने वाला एक अहम राष्ट्रीय राजमार्ग मार्ग है।
सेवक में प्रस्तावित यह छह लेन पुल केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि उत्तर-पूर्वी भारत की कनेक्टिविटी, आपदा-रोधी ढांचे और क्षेत्रीय विकास से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम है।