मेडोग बांध से ब्रह्मपुत्र के बाढ़ जोखिम पर बढ़ी चिंता

मेडोग बांध से ब्रह्मपुत्र के बाढ़ जोखिम पर बढ़ी चिंता

तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो के नाम से बहने वाली ब्रह्मपुत्र पर चीन की प्रस्तावित विशाल जलविद्युत परियोजना ने नदी के भविष्य और निचले इलाकों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ाई हैं। चीनी शोधकर्ताओं के अनुसार, इस सदी में नदी के जलप्रवाह और बाढ़ के जोखिम में वृद्धि हो सकती है। लगभग 168 अरब डॉलर की लागत वाली मेडोग परियोजना की प्रस्तावित क्षमता 60,000 मेगावाट से अधिक है।

जलप्रवाह में बदलाव के संकेत

चीनी विज्ञान अकादमी और युन्नान विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने जलवायु संबंधी आंकड़ों के साथ 1325 से 2020 तक के नदी-जलप्रवाह का पुनर्निर्मित रिकॉर्ड जोड़ा। इसके लिए दक्षिण-पूर्वी तिब्बती पठार के वृक्ष-वृत्तों से मिली जानकारी का उपयोग किया गया। वृक्षों के तनों में बने वार्षिक वृत्त पुराने जलवायु और जलविज्ञान संबंधी हालात के संकेत सुरक्षित रख सकते हैं। शोध के निष्कर्ष 8 अक्टूबर 2026 को चाइना साइंस बुलेटिन में प्रकाशित हुए।

जलप्रवाह से आशय उस पानी की मात्रा से है जो भूमि की सतह से बहकर नदी, झील या अन्य जलस्रोतों तक पहुंचती है। वर्षा, बर्फ और हिमनदों के पिघलने तथा तापमान में बदलाव से जलप्रवाह प्रभावित होता है। तिब्बती पठार वैश्विक औसत की तुलना में लगभग दोगुनी गति से गर्म हो रहा है। इससे क्षेत्र के जलचक्र के साथ सूखे और बाढ़ के स्वरूप में भी बदलाव की आशंका है।

भूकंपीय क्षेत्र में प्रस्तावित विशाल परियोजना

मेडोग बांध हिमालय की एक गहरी घाटी में, सक्रिय भ्रंश रेखा के निकट प्रस्तावित है। जुलाई 2026 में चीनी भूवैज्ञानिकों ने इस भ्रंश से जुड़े जोखिमों पर चिंता जताई और भूस्खलन की आशंका से निपटने के लिए ढलानों को मजबूत करने की जरूरत बताई। परियोजना स्थल उस मोड़ के पास है जहां यारलुंग त्सांगपो यू-आकार का तीखा घुमाव लेकर भारत की ओर बहती है।

60,000 मेगावाट से अधिक की प्रस्तावित क्षमता के साथ यह दुनिया की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना बनने की योजना है। तुलना के लिए, चीन के थ्री गॉर्जेस बांध की स्थापित क्षमता 22,500 मेगावाट है। जलविद्युत में बहते या गिरते पानी से टरबाइन चलाकर बिजली बनाई जाती है।

भारत और बांग्लादेश के लिए नदी प्रबंधन की अहमियत

भारत में ब्रह्मपुत्र अरुणाचल प्रदेश और असम से होकर बहती है, फिर बांग्लादेश पहुंचती है, जहां इसकी मुख्य धारा को जमुना कहा जाता है। भारत और बांग्लादेश ने जलप्रवाह, बाढ़ प्रबंधन और नदी पारिस्थितिकी पर संभावित असर को लेकर चिंता जताई है। चीन के विदेश मंत्रालय का कहना है कि परियोजना से निचले देशों पर प्रभाव नहीं पड़ेगा और सुरक्षा का अध्ययन किया गया है। 26 अक्टूबर 2026 तक भारत नदी के प्रवाह में उतार-चढ़ाव के प्रबंधन और पानी के भंडारण के लिए एक बड़ी निचली बांध परियोजना की योजना बना रहा था।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • तिब्बत में ब्रह्मपुत्र को यारलुंग त्सांगपो और बांग्लादेश में इसकी मुख्य धारा को जमुना कहा जाता है।
  • ब्रह्मपुत्र चीन, भारत और बांग्लादेश से जुड़ी एक अंतरराष्ट्रीय नदी है।
  • थ्री गॉर्जेस बांध की स्थापित क्षमता 22,500 मेगावाट है।
  • वृक्ष-वृत्तों का अध्ययन अतीत की जलवायु और जलप्रवाह का अनुमान लगाने में सहायक होता है।

मेडोग परियोजना का पैमाना और उसका भूकंपीय क्षेत्र में स्थित होना, ब्रह्मपुत्र के प्रवाह तथा सीमापार जल प्रबंधन पर लगातार निगरानी और सहयोग की जरूरत को रेखांकित करता है।

Originally written on October 27, 2026 and last modified on October 27, 2026.

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