मानस के घासस्थलों में मिली नई पुष्पीय प्रजाति

मानस के घासस्थलों में मिली नई पुष्पीय प्रजाति

असम के मानस राष्ट्रीय उद्यान के घासस्थलों में शोधकर्ताओं ने गुलाबी फूलों वाले पौधे की एक नई प्रजाति की पहचान की है। बरनाली दास और नमिता नाथ ने इसे Osbeckia assamensis नाम दिया है। इस प्रजाति का विवरण वनस्पति विज्ञान की पत्रिका फाइटोटैक्सा में प्रकाशित हुआ।

मानस के घासस्थलों में दर्ज हुई प्रजाति

शोधकर्ताओं ने 2021 से 2025 के बीच मानस राष्ट्रीय उद्यान में क्षेत्रीय सर्वेक्षण किए और पौधे की बिखरी हुई आबादी दर्ज की। इसका पहला संदर्भ नमूना 8 अक्टूबर 2022 को एकत्र किया गया था, जबकि अक्टूबर 2025 में एक अन्य नमूना दर्ज किया गया। पौधा उद्यान के घासस्थलों में पाया गया है।

Osbeckia assamensis बहुवर्षीय झाड़ी है और मेलास्टोमेटेसी कुल के ओस्बेकिया वंश से संबंधित है। यह झाड़ी लगभग 2 से 2.5 मीटर ऊँची होती है। इसके गुलाबी फूल करीब 3 से 3.5 सेंटीमीटर के होते हैं और एक गुच्छे में लगभग 30 से 35 फूल हो सकते हैं। इसमें फूल और फल आने का समय सितंबर से फरवरी तक रहता है।

समान प्रजाति से पहचान कैसे हुई

शोधकर्ताओं ने नई प्रजाति की तुलना इससे निकट संबंध रखने वाली Osbeckia nayarii से की। दोनों के बीच तने, पत्तियों, फूलों की व्यवस्था, बाह्यदलपुंज के रोएँदार किनारों और बीजों के आकार में अंतर पाया गया। बाह्यदलपुंज फूल का सबसे बाहरी हिस्सा होता है, जो बाह्यदलों से बनता है। इन विशेषताओं के आधार पर O. assamensis को अलग प्रजाति के रूप में पहचाना गया।

संरक्षण स्थिति और मानस का महत्व

अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ के मानदंडों के अनुसार इस पौधे को ‘आँकड़ों की कमी’ श्रेणी में रखा गया है। इसका अर्थ है कि उपलब्ध जानकारी इतनी पर्याप्त नहीं है कि प्रजाति के विलुप्त होने के जोखिम का आकलन किया जा सके। यह श्रेणी अपने आप में न तो प्रजाति के सुरक्षित होने का संकेत है और न ही उसके संकटग्रस्त होने का।

मानस राष्ट्रीय उद्यान असम में हिमालय की तलहटी के पास स्थित है। इसे यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा प्राप्त है और यह मानस बाघ अभयारण्य तथा जीवमंडल आरक्षित क्षेत्र का भी हिस्सा है। उद्यान के घासस्थलों में मिली यह प्रजाति क्षेत्र की वनस्पति विविधता के दस्तावेजीकरण को आगे बढ़ाती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • Osbeckia assamensis मेलास्टोमेटेसी कुल और ओस्बेकिया वंश से संबंधित है।
  • इस पौधे में फूल और फल आने का समय सितंबर से फरवरी तक है।
  • ‘आँकड़ों की कमी’ श्रेणी तब दी जाती है, जब किसी प्रजाति के विलुप्ति जोखिम का आकलन करने के लिए पर्याप्त जानकारी उपलब्ध न हो।
  • मानस राष्ट्रीय उद्यान असम में स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है और मानस बाघ अभयारण्य का हिस्सा है।

मानस में इस पौधे की पहचान से उद्यान की जैव विविधता की जानकारी और समृद्ध हुई है। इसके संरक्षण की स्थिति स्पष्ट करने के लिए आगे आबादी और वितरण से जुड़े आँकड़े जुटाना महत्त्वपूर्ण होगा।

Originally written on October 27, 2026 and last modified on October 27, 2026.

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