कर्नाटक में पहली राज्यव्यापी पक्षी गणना से जुटेगा जैव-विविधता का आंकड़ा
कर्नाटक वन विभाग, बर्ड काउंट इंडिया और कर्नाटक बर्ड मॉनिटरिंग नेटवर्क ने पहली ‘कर्नाटक राज्योत्सव पक्षी गणना’ शुरू की है। यह चार दिवसीय गणना 30 अक्टूबर से 2 नवंबर 2026 तक चलेगी। इसका उद्देश्य राज्य के विभिन्न प्राकृतिक और मानवीय आवासों में दर्ज लगभग 550 पक्षी प्रजातियों से जुड़ी जानकारी जुटाना है।
अलग-अलग आवासों में पक्षियों का अवलोकन
इस पहल में प्रतिभागी आर्द्रभूमियों, जंगलों, खेतों, झीलों, उद्यानों और पार्कों में पक्षियों को देख सकते हैं। इसमें शामिल होने के लिए किसी विशेष पक्षी-विज्ञान प्रशिक्षण की शर्त नहीं रखी गई है। कोई भी व्यक्ति कम-से-कम 15 मिनट पक्षियों का अवलोकन कर सकता है और अपनी सुविधा के अनुसार दिन तथा समय चुन सकता है।
प्रतिभागियों को अपने अवलोकनों की पूरी सूची ईबर्ड मंच पर 10 नवंबर 2026 तक जमा करनी होगी। पूरी सूची में देखे गए पक्षियों का व्यवस्थित विवरण दर्ज होता है, जिससे अलग-अलग स्थानों और समयों के अवलोकनों को एक साथ समझना संभव होता है। इस गणना से मिले आंकड़े कर्नाटक के पक्षी जीवन के वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण में योगदान देंगे। पहल के संबंध में वन विभाग ने अपने अधिकारियों के लिए राज्यस्तरीय ऑनलाइन कार्यशाला भी आयोजित की है।
नागरिक विज्ञान में तकनीक की भूमिका
इस गणना का आधार नागरिक विज्ञान है, जिसमें आम लोग वैज्ञानिक जानकारी जुटाने या उसमें योगदान देने वाली गतिविधियों में भाग लेते हैं। प्रतिभागी पक्षियों के अवलोकन दर्ज करने के लिए ईबर्ड ऐप और उनकी पहचान में सहायता के लिए मर्लिन बर्ड आईडी ऐप का उपयोग कर सकते हैं। इस तरह अलग-अलग लोगों द्वारा दर्ज की गई जानकारी को चेकलिस्ट के रूप में संकलित किया जा सकता है।
कर्नाटक के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं मुख्य वन्यजीव वार्डन कुमार पुष्कर ने राज्योत्सव के अवसर पर लोगों से इसमें भाग लेने का आह्वान किया है। बर्ड काउंट इंडिया के डॉ. अश्विन विश्वनाथन के अनुसार, कार्यक्रम के दौरान जमा किए गए अवलोकन राज्य के पक्षियों से संबंधित वैज्ञानिक आंकड़ों में जुड़ेंगे।
पक्षी अवलोकन में सावधानी जरूरी
पक्षियों को देखने के दौरान उनके व्यवहार और आवास को प्रभावित न करना इस पहल का अहम पक्ष है। प्रतिभागियों को घोंसलों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने, पक्षियों को आकर्षित करने के लिए ध्वनि रिकॉर्डिंग न चलाने और तय रास्तों पर ही रहने की सलाह दी गई है। पक्षियों का पीछा करने या उन्हें परेशान करने से बचना चाहिए। स्थानीय समुदायों और उनकी निजता का सम्मान करना भी जरूरी है। संवेदनशील घोंसलों के स्थान की जानकारी साझा करने में विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- कर्नाटक राज्योत्सव हर वर्ष 1 नवंबर को मनाया जाता है।
- 1956 में कन्नड़-भाषी क्षेत्रों के एकीकरण के बाद मैसूर राज्य बना; 1973 में इसका नाम कर्नाटक रखा गया।
- ईबर्ड पक्षी अवलोकनों को दर्ज और साझा करने का मंच है।
- मर्लिन बर्ड आईडी पक्षियों की पहचान में सहायता करने वाला अनुप्रयोग है।
30 अक्टूबर से 2 नवंबर तक होने वाली यह गणना नागरिकों के स्थानीय अवलोकनों को वैज्ञानिक उपयोग के आंकड़ों में बदलने का अवसर देती है।