वीरानम झील में फ्लेमिंगो: सूखे तटीय क्षेत्रों से बदला पक्षियों का ठिकाना
तमिलनाडु के कुड्डालोर जिले की वीरानम झील में 25 अक्टूबर 2026 को 18 बड़े राजहंस (ग्रेटर फ्लेमिंगो) देखे गए। इस दृश्य को ए.वी.सी. कॉलेज, मयिलादुथुराई के पक्षी शोधकर्ता और सहायक प्राध्यापक जे. पांडियन ने शोधार्थियों सरवनकुमार तथा वीरासामी के साथ दर्ज किया। यह मीठे पानी की झील समुद्रतट से लगभग 50 किलोमीटर भीतर स्थित है, जबकि बड़े राजहंस सामान्यतः तटीय आर्द्रभूमियों में भोजन करते हैं।
तटीय पक्षियों का अंतर्देशीय झील तक पहुंचना
वीरानम में इन पक्षियों की मौजूदगी को उनके सामान्य आवास से अलग घटना माना जा रहा है। शोधकर्ताओं के अनुसार, इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून में कम बारिश और कावेरी नदी के प्रवाह में कमी से जल की उपलब्धता प्रभावित हुई। इससे तटीय इलाकों में पानी की कमी और ज्वार-भाटा प्रभावित कीचड़ वाले क्षेत्रों के सूखने जैसी स्थितियां बनीं। ऐसे बदलावों से राजहंसों के सामान्य भोजन-स्थलों में उपलब्ध आहार घट सकता है।
शोधकर्ताओं ने इस असामान्य उपस्थिति के संभावित कारणों में बारिश के बदलते पैटर्न और ‘सुपर एल नीनो’ घटना का भी उल्लेख किया है। हालांकि, झील में पक्षियों के पहुंचने के पीछे एक ही कारण तय नहीं किया गया है। तट पर भोजन की कमी और वीरानम में बनी अस्थायी अनुकूल परिस्थितियों को संभावित कारकों के रूप में देखा गया है।
वीरानम झील का जल और स्थानीय महत्व
वीरानम कुड्डालोर जिले का मीठे पानी का जलाशय है। यह नहरों के जरिए कावेरी नदी तंत्र से जुड़ा है और कोल्लिडम नदी से पानी यहां तक पहुंचता है। जलाशय का उपयोग सिंचाई के लिए होता है तथा यह चेन्नई की जलापूर्ति व्यवस्था का भी हिस्सा है। इस कारण झील के जलस्तर में बदलाव का महत्व केवल पक्षियों तक सीमित नहीं है।
जलस्तर घटने से झील में उथले हिस्से बने, जहां पक्षियों को भोजन तलाशने के अनुकूल परिस्थितियां मिल सकती थीं। पानी के वाष्पीकरण से प्लवक और अन्य खाद्य संसाधन अपेक्षाकृत सघन हुए हों, यह भी एक संभावना है। इस तरह जल की कमी ने एक ओर तटीय भोजन-स्थलों को प्रभावित किया, तो दूसरी ओर अंतर्देशीय झील में अस्थायी भोजन क्षेत्र बना दिया।
राजहंस की भोजन पद्धति और निगरानी का महत्व
बड़ा राजहंस जीवित फ्लेमिंगो प्रजातियों में सबसे बड़ा है। इसकी लंबी टांगें और गर्दन तथा नीचे की ओर मुड़ी विशेष चोंच इसे उथले पानी और नरम तलछट में भोजन खोजने में मदद करती हैं। चोंच की छन्नी जैसी संरचनाएं पानी से शैवाल, छोटे क्रस्टेशियन और अन्य जलीय जीवों को छानने में सहायक होती हैं।
लैगून, मुहाने, नमक के मैदान और तटीय कीचड़ क्षेत्र इस प्रजाति के उपयोग में आने वाली आर्द्रभूमियों में शामिल हैं। वीरानम में पक्षियों की निगरानी से यह समझने में मदद मिल सकती है कि सामान्य आवासों में दबाव बढ़ने पर तटीय पक्षी अंतर्देशीय जलाशयों का उपयोग कैसे करते हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- बड़े राजहंस का वैज्ञानिक नाम फीनिकॉप्टेरस रोसियस है।
- यह जीवित फ्लेमिंगो प्रजातियों में सबसे बड़ा है।
- वीरानम झील तमिलनाडु के कुड्डालोर जिले में स्थित मीठे पानी का जलाशय है।
- लैगून, नदी-मुहाने, नमक के मैदान और कीचड़ वाले तटीय क्षेत्र राजहंसों के उपयोग में आने वाली आर्द्रभूमियां हैं।
वीरानम में 18 बड़े राजहंसों का दिखना जलवायु, जलस्तर और भोजन की उपलब्धता के बीच संबंध को रेखांकित करता है। ऐसी घटनाओं का नियमित अभिलेखन बदलती आर्द्रभूमियों और पक्षियों के व्यवहार को समझने में सहायक हो सकता है।